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Dehradun News: पिता की संपत्ति हड़पने के लिए बनाया गया उपहार पत्र रद्द
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- एक बुजुर्ग ने जिलाधिकारी से की थी शिकायत, दंपती के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
माई सिटी रिपोर्टर
देहरादून। पिता की संपत्तियों को अपनी पत्नी के नाम करने के लिए बनाया गया उपहार पत्र (गिफ्ट डीड) प्रशासन ने रद्द कर दिया है। इस मामले में आरोपी राजीव अग्रवाल और उसकी पत्नी पूजा अग्रवाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि पिछले दिनों 88 वर्षीय बुजुर्ग राजेंद्र स्वरूप अग्रवाल आए थे। उन्होंने बताया था कि उनके बेटे राजीव अग्रवाल ने जालसाजी कर एक पॉवर ऑफ अटॉर्नी बना ली थी। इसका दुरुपयोग करते हुए उसने उनकी नेहरू कॉलोनी स्थित दो संपत्तियों को एक गिफ्ट डीड के माध्यम से अपनी पत्नी पूजा अग्रवाल के नाम कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच अपर जिलाधिकारी और सब रजिस्ट्रार से कराई गई। प्रथम दृष्टया इसमें फर्जीवाड़ा पाया गया तो शनिवार को राजीव अग्रवाल और पूजा अग्रवाल के खिलाफ सब रजिस्ट्रार की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई। जांच में पाया गया कि जिस वक्त पॉवर ऑफ अटॉर्नी बनाई गई उस वक्त बुजुर्ग अपनी बेटी के पास इलाज कराने गाजियाबाद गए हुए थे। इसी बीच यह गिफ्ट डीड भी बना ली गई। इसकी भी जांच कराई गई तो सारा मामला स्पष्ट हो गया कि यह सब फर्जीवाड़ा कर तैयार किया गया है। जिलाधिकारी ने बताया कि प्राथमिक जांच पूरी होने के बाद अब इस गिफ्ट डीड को भी रद्द कर दिया गया है।
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माई सिटी रिपोर्टर
देहरादून। पिता की संपत्तियों को अपनी पत्नी के नाम करने के लिए बनाया गया उपहार पत्र (गिफ्ट डीड) प्रशासन ने रद्द कर दिया है। इस मामले में आरोपी राजीव अग्रवाल और उसकी पत्नी पूजा अग्रवाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि पिछले दिनों 88 वर्षीय बुजुर्ग राजेंद्र स्वरूप अग्रवाल आए थे। उन्होंने बताया था कि उनके बेटे राजीव अग्रवाल ने जालसाजी कर एक पॉवर ऑफ अटॉर्नी बना ली थी। इसका दुरुपयोग करते हुए उसने उनकी नेहरू कॉलोनी स्थित दो संपत्तियों को एक गिफ्ट डीड के माध्यम से अपनी पत्नी पूजा अग्रवाल के नाम कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच अपर जिलाधिकारी और सब रजिस्ट्रार से कराई गई। प्रथम दृष्टया इसमें फर्जीवाड़ा पाया गया तो शनिवार को राजीव अग्रवाल और पूजा अग्रवाल के खिलाफ सब रजिस्ट्रार की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई। जांच में पाया गया कि जिस वक्त पॉवर ऑफ अटॉर्नी बनाई गई उस वक्त बुजुर्ग अपनी बेटी के पास इलाज कराने गाजियाबाद गए हुए थे। इसी बीच यह गिफ्ट डीड भी बना ली गई। इसकी भी जांच कराई गई तो सारा मामला स्पष्ट हो गया कि यह सब फर्जीवाड़ा कर तैयार किया गया है। जिलाधिकारी ने बताया कि प्राथमिक जांच पूरी होने के बाद अब इस गिफ्ट डीड को भी रद्द कर दिया गया है।