फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   geo mapping of kailash holy land

कैलास पवित्र भू परिक्षेत्र की होगी जियो स्पेशल मैपिंग

Tue, 26 Sep 2017 01:45 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 26 Sep 2017 01:45 PM IST
विज्ञापन
geo mapping of kailash holy land
kailash mansarovar

कैलास पवित्र भूक्षेत्र की पहली बार जियो स्पेशल मैपिंग की जाएगी। चीन के हिस्से वाले पवित्र भू क्षेत्र को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किए जाने के बाद भारत भी अपने हिस्से वाले क्षेत्र को विकसित करने के लिए स्पेशल जियो मैपिंग करा रहा है।

विज्ञापन


इसमें पांच बिंदुओं की कार्ययोजना फाइनल कर दी गई है। पहली बार कैलास भू क्षेत्र की जियो मैपिंग कराई जा रही है। इसमें बादल फटने के मामले में नए संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित किए जाने के साथ ही मानव-वन्य जीव संघर्ष और जंगल की आग को प्राथमिकता दी गई है।
विज्ञापन


अंतरराष्ट्रीय संस्था ईसी मोड के बैनर तले संचालित की जा रही है कैलाश पवित्र भू क्षेत्र परियोजना का पहला चरण पूरा हो गया है। इसमें भारत और नेपाल ने तो मिलकर काम किया, लेकिन चीन ने अपनी अलग रणनीति बना रखी है। चीन अपने हिस्से के परिक्षेत्र को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करके अलग काम कर रहा है। इससे ईसी मोड के संयोजक राजन कोत्रू ने नीति आयोग और उत्तराखंड सरकार के अफसरों से मिलकर कार्य में तेजी लाने के लिए कहा था।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस कार्य में जुटे भारतीय वन्य जीव संस्थान, जीबी पंत इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन एनवायरनमेंट एंड डेवलपमेंट ने दूसरे चरण का खाका तैयार कर लिया है। इस कार्ययोजना को विज्ञानियों के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है। इसके तहत भारतीय हिस्से में आने वाले कैलास लैंडस्केप में पांच समस्याओं पर कार्य होगा। परियोजना में जुटे संस्थान प्रदेश सरकार के साथ यहां काम करेंगे। यहां भूस्खलन, अचानक बादल फटने के स्थान, नदियों की धारा में बदलाव होने से प्रभावित होने वाले क्षेत्र, मानव-वन्य जीव संघर्ष और फोरेस्ट फायर है। इनके साथ ही कैलास लैंडस्केप को प्रभावित करने वाले आक्रांता खरपतवार से नुकसान रोकने की भी कार्ययोजना बनाई गई है। इनमें लैंटाना, काला बांसा आदि हैं।


भारतीय वन्य जीव संस्थान के डीन डॉ. जीएस रावत ने बताया कि लैंडस्केप के 1600 गांवों में से 90 गांव मानव वन्य जीव की समस्या से ग्रसित हैं। इसके साथ ही फॉरेस्ट फायर के मामले में अथॉरिटी और गांववालों के साथ मैनेजमेंट किए जाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इन बिंदुओं पर परियोजना के सेकेंड फेज में काम किया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed