{"_id":"69ba40a9dcadf6a73e0459e9","slug":"gas-crisis-commercial-cylinders-shortage-diesel-furnaces-emerge-as-an-alternative-for-confectioners-dehradun-2026-03-18","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"गैस संकट: व्यावसायिक सिलिंडरों की हुई कमी, हलवाइयों ने ढूंढा विकल्प, राजस्थान से देहरादून पहुंची डीजल भट्ठियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गैस संकट: व्यावसायिक सिलिंडरों की हुई कमी, हलवाइयों ने ढूंढा विकल्प, राजस्थान से देहरादून पहुंची डीजल भट्ठियां
Wed, 18 Mar 2026 11:43 AM IST
Renu Saklani
संजय चौहान, संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संजय चौहान, संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Published by: Renu Saklani
Updated Wed, 18 Mar 2026 11:43 AM IST
सार
गैस संकट के बीच डीजल भट्ठियां हलवाइयों का सहारा बनीं है। व्यवसायिक सिलिंडर की कमी हुई तो राजस्थान से देहरादून में दुकानों पर 24 से ज्यादा डीजल भट्ठियां पहुंची हैं।
विज्ञापन
गैस संकट
विस्तार
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर अब स्थानीय बाजारों तक पहुंच गया है। व्यावसायिक सिलिंडरों की कमी से जहां एलपीजी भट्ठियां ठंडी पड़ गई थीं, वहीं हलवाइयों ने इसका विकल्प खोजते हुए डीजल से चलने वाली भट्ठियों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। राजधानी में करीब 19 हजार से अधिक व्यावसायिक गैस उपभोक्ता हैं। गैस संकट के बीच सरकार ने घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देते हुए वाणिज्यिक सिलिंडर की सप्लाई सीमित कर दी। शुरुआती दिनों में पुराने स्टॉक से काम चलता रहा लेकिन सिलिंडर खत्म होने के बाद दुकानदारों को नई व्यवस्था तलाशनी पड़ी।
विज्ञापन
देहरादून पहुंचीं 24 भट्ठियां
एक प्रमुख मिठाई ब्रांड ने सबसे पहले राजस्थान से डीजल भट्ठी मंगाकर प्रयोग शुरू किया। इसके सफल होने के बाद अब तक 24 से अधिक भट्ठियां शहर की विभिन्न दुकानों में पहुंच चुकी हैं और उनका उपयोग किया जा रहा है। दुकानदारों के अनुसार यह भट्ठियां व्यावसायिक गैस सिलिंडर के मुकाबले किफायती साबित हो रही हैं।
विज्ञापन
Trending Videos
कोयला और लकड़ी का विकल्प भी अपनाया
परंपरागत रूप से हलवाई कोयला और लकड़ी की भट्ठियों का भी उपयोग करते रहे हैं लेकिन इनमें आग नियंत्रित करना मुश्किल होता है। एक बार गर्म होने के बाद इन्हें तुरंत बंद नहीं किया जा सकता जबकि डीजल और गैस भट्ठियां जरूरत के अनुसार आसानी से संचालित की जा सकती हैं।
ये भी पढ़ें...Uttarakhand: एसआईआर से पूर्व प्रदेश में चल रही बीएलओ मैपिंग में सुस्ती, तीन जिलों को चुनाव आयोग का नोटिस
कम खर्च और कम प्रदूषण का दावा
जानकारी के अनुसार, डीजल भट्ठी को 10–11 घंटे तक चलाने में करीब 20 लीटर डीजल खर्च होता है। मिठाई कारोबारी दलपत सिंह का कहना है कि इसके मुकाबले दो से अधिक गैस सिलिंडर लगते हैं। उनका दावा है कि यह विकल्प न केवल किफायती है, बल्कि अपेक्षाकृत सुरक्षित और कम प्रदूषणकारी भी है।
परंपरागत रूप से हलवाई कोयला और लकड़ी की भट्ठियों का भी उपयोग करते रहे हैं लेकिन इनमें आग नियंत्रित करना मुश्किल होता है। एक बार गर्म होने के बाद इन्हें तुरंत बंद नहीं किया जा सकता जबकि डीजल और गैस भट्ठियां जरूरत के अनुसार आसानी से संचालित की जा सकती हैं।
ये भी पढ़ें...Uttarakhand: एसआईआर से पूर्व प्रदेश में चल रही बीएलओ मैपिंग में सुस्ती, तीन जिलों को चुनाव आयोग का नोटिस
कम खर्च और कम प्रदूषण का दावा
जानकारी के अनुसार, डीजल भट्ठी को 10–11 घंटे तक चलाने में करीब 20 लीटर डीजल खर्च होता है। मिठाई कारोबारी दलपत सिंह का कहना है कि इसके मुकाबले दो से अधिक गैस सिलिंडर लगते हैं। उनका दावा है कि यह विकल्प न केवल किफायती है, बल्कि अपेक्षाकृत सुरक्षित और कम प्रदूषणकारी भी है।