Dehradun: गंगोत्री नेशनल पार्क पर्वतारोहियों के स्वागत को तैयार, पहले दिन नेलांग घाटी पहुंचे पर्यटक
पार्क क्षेत्र में गंगोत्री के साथ गोमुख, तपोवन ट्रैक, केदारताल, सुंदरवन, नंदनवन, वासुकीताल, जनकताल ट्रैक तथा भारत-तिब्बत के बीच व्यापारिक संबंधों की गवाह गरतांग गली स्थित हैं।
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गंगोत्री नेशनल पार्क के गेट ट्रैकरों, पर्यटकों और पर्वतारोहियों के लिए खुल गए हैं। पहले ही दिन चार पर्यटक नेलांग घाटी और 22 पर्यटक गरतांग गली का भ्रमण करने पहुंचे। गंगोत्री नेशनल पार्क देश का तीसरा सबसे बड़ा पार्क है। पार्क क्षेत्र में गंगोत्री के साथ गोमुख, तपोवन ट्रैक, केदारताल, सुंदरवन, नंदनवन, वासुकीताल, जनकताल ट्रैक तथा भारत-तिब्बत के बीच व्यापारिक संबंधों की गवाह गरतांग गली स्थित हैं।
दुर्लभ वन्यजीवों का है घर
गंगोत्री नेशनल पार्क हिम तेंदुए के साथ कई लुप्तप्राय वन्यजीवों का घर भी है। यहां करीब 35 से अधिक हिम तेंदुए होने का अनुमान है। यहां लाल लोमड़ी, भूरा भालू, काला भालू, हिमालयन मोनाल, कस्तूरी मृग, भरड़ या नीली भेड़, हिमालयन स्नोकॉक और दुर्लभ अरगली भेड़ भी पाई जाती है।
गंगोत्री नेशनल पार्क के प्रमुख स्थल
गरतांग गली: ये रास्ता भारत-तिब्बत के बीच व्यापारिक रिश्तों की गवाह रहा। चीन युद्ध के बाद से बंद ये रास्ता 2021 में जीर्णोद्धार कर खोला गया। गरतांग गली में खड़ी चट्टानों को काटकर लकड़ियों से सीढ़ीदार ट्रैक बनाया गया है।
नेलांग घाटी: उत्तरकाशी से करीब 115 किमी की दूरी पर स्थित यह घाटी भौगोलिक परिस्थितियों में लद़्दाख और स्फीति घाटी से मिलती जुलती है। इसे उत्तराखंड का लद्दाख भी कहा जाता है। चीन सीमा के करीब स्थित है।
गोमुख-तपोवन ट्रैक: गोमुख पहुंचने का ट्रैक गोमुख तपोवन ट्रैक के नाम से जाना जाता है। प्रतिदिन 150 लोग जा सकते हैं। गंगोत्री से पैदल दूरी 18 से 22 किमी है।
केदारताल ट्रैक: केदारताल हिमालय में स्थित एक सुंदर ताल है, जो गंगोत्री से करीब 18 किमी की दूरी पर है।
कालिंदीखाल ट्रैक: कालिंदीखाल ट्रैक गंगोत्री और बदरीनाथ धाम को जोड़ता है। यह करीब 90 किमी लंबा है। दुनिया का सबसे ऊंचा ट्रैक है।