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गांधी जयंती विशेष : तीर्थनगरी ऋषिकेश में गांधी स्तंभ पर अंकित हैं बापू के हस्ताक्षर 

Fri, 02 Oct 2020 01:40 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 02 Oct 2020 01:40 PM IST
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Gandhi jayanti 2020:  Bapu signature is inscribed on Gandhi pillar in Rishikesh
महात्मा गांधी - फोटो : iStock

तीर्थनगरी ऋषिकेश में भी महात्मा गांधी की कई स्मृतियां हैं। इसके गवाह हैं त्रिवेणी घाट पर स्थित गांधी स्तंभ पर अंकित महात्मा गांधी के हस्ताक्षर। गांधी ने अपनी अल्मोड़ा यात्रा के दौरान ऋषिकेश से उन्हें मिलने आए क्रांतिकारियों को एक शिला पर यह हस्ताक्षर करके दिए थे। यह शिला गांधी स्तंभ के ऊपर लगाई गई है, जो आज भी बापू की याद दिलाती है। 

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उत्तराखंड यात्रा के दौरान महात्मा गांधी जब अल्मोड़ा आए थे, तब ऋषिकेश से क्रांतिकारी ब्रह्मचारी हरिजीवन, उड़िया बाबा, स्वामी सदानंद, स्वामी अद्वेतानंद आदि उनसे मिलने पहुंचे अल्मोड़ा पहुंचे थे। तब उन क्रांतिकारियों ने बापू से ऋषिकेश आने का आग्रह किया था, लेकिन समय के अभाव में बापू ने मना कर दिया और उन्होंने उन क्रांतिकारियों से समय मिलने पर ऋषिकेश आने का वादा किया।
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तब बापू ने एक शिला पर हस्ताक्षर कर क्रांतिकारियों को दी। उस शिला को लेकर वे लोग ऋषिकेश लौट आए और उन्होंने यह शिला त्रिवेणी घाट पर गांधी स्तंभ के ऊपर लगा दी। वर्तमान समय में कोई भी सामाजिक, राजनीतिक संगठन इसी स्तंभ से अपने कार्य का शुभारंभ और समापन करते हैं।

स्थानीय व्यापारी ऋषिराज ने बताया कि उन्हें 70 वर्ष हो चुके हैं। तब से लेकर अब तक वह त्रिवेणीघाट में गांधी का स्तंभ देखते आ रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि महात्मा गांधी की मृत्यु के बाद कुछ क्रांतिकारियों ने उनकी राख यहां डाली थी। राख डालने के बाद फिर यहां बापू के नाम से स्तंभ बनाया गया।

गांधी-शास्त्री जयंती पर जागोली में नहीं लगेगा खीर का भोग

कोरोना महामारी के कारण चंपावत जिले के खेतीखान में स्थित ऐतिहासिक जागोली धर्मशाला में इस बार दो अक्तूबर को गांधी और शास्त्री जयंती पर खीर का भोग नहीं लगेगा। आजादी के दौर से आज तक यह पहला मौका है जब ऐतिहासिक जागोली धर्मशाला में गांधी और शास्त्री जयंती पर खीर का भोग नहीं लगेगा। 

गौरतलब है कि खेतीखान क्षेत्र के गोसनी में स्थित जागोली धर्मशाला आजादी की लड़ाई की गवाह रही है। आजादी की लड़ाई के दौरान इस धर्मशाला में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री सहित कई वरिष्ठ क्रांतिकारियों ने पनाह ली थी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और कुमाऊं के लौह पुरुष कहे जाने वाले पंडित हर्षदेव ओली के नेतृत्व में यहां देश की आजादी के लिए कई महत्वपूर्ण मंत्रणाएं हुआ करती थी। 

आजादी मिलने के बाद हर साल दो अक्तूबर को जागोली धर्मशाला में देश के नायकों को याद करते हुए खीर का भोग लगाया जाता है। सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र ओली ने बताया कि आयोजन समिति की ओर से इस बार जागोली धर्मशाला में खीर का भोग न लगाने का निर्णय लिया गया है। अलबत्ता सामाजिक दूरी का पालन करते हुए आजादी के नायकों को याद किया जाएगा।

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