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Dehradun News: ग्रिड में नहीं पहुंची पूरी बिजली, नुकसान में आई कंपनियां पहुंची नियामक आयोग
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-सोलर कंपनियों की याचिका नियामक आयोग ने की स्वीकार, 15 दिन में मांगा जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने दो सोलर ऊर्जा कंपनियों की ओर से दायर याचिकाओं को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। याचिका दायर करने वाली कंपनियों डीएस सोलर एनर्जी और फेयरडील ने आरोप लगाया है कि यूपीसीएल ने उनकी बिजली निकासी की व्यवस्था नहीं की।
नियामक आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य तकनीकी पीके डिमरी, सदस्य विधि अनुराग शर्मा ने सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनके साथ किए गए पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) के बावजूद यूपीसीएल ने समय पर इंटरकनेक्शन सुविधाएं विकसित नहीं की, जिससे सोलर प्लांट से उत्पादित बिजली ग्रिड में नहीं भेजी जा सकी। उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। सुनवाई में यूपीसीएल के प्रतिनिधि वकील पेश हुए, जिसमें बताया गया कि वन अनुमति न मिल पाने के कारण मामला लटका हुआ है। सूचना के बावजूद उत्तराखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (उरेडा) का कोई प्रतिनिधि सुनवाई में उपस्थित नहीं हुआ। आयोग ने मामले को प्रथम दृष्टया विचार योग्य मानते हुए दोनों याचिकाओं को स्वीकार कर लिया है। प्रतिवादियों को निर्देश दिए हैं कि वे 15 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करें, जबकि याचिकाकर्ता इसके बाद 15 दिनों में प्रत्युत्तर प्रस्तुत कर सकेंगे। इसके पश्चात मामले की अगली सुनवाई तय की जाएगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने दो सोलर ऊर्जा कंपनियों की ओर से दायर याचिकाओं को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। याचिका दायर करने वाली कंपनियों डीएस सोलर एनर्जी और फेयरडील ने आरोप लगाया है कि यूपीसीएल ने उनकी बिजली निकासी की व्यवस्था नहीं की।
नियामक आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य तकनीकी पीके डिमरी, सदस्य विधि अनुराग शर्मा ने सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनके साथ किए गए पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) के बावजूद यूपीसीएल ने समय पर इंटरकनेक्शन सुविधाएं विकसित नहीं की, जिससे सोलर प्लांट से उत्पादित बिजली ग्रिड में नहीं भेजी जा सकी। उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। सुनवाई में यूपीसीएल के प्रतिनिधि वकील पेश हुए, जिसमें बताया गया कि वन अनुमति न मिल पाने के कारण मामला लटका हुआ है। सूचना के बावजूद उत्तराखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (उरेडा) का कोई प्रतिनिधि सुनवाई में उपस्थित नहीं हुआ। आयोग ने मामले को प्रथम दृष्टया विचार योग्य मानते हुए दोनों याचिकाओं को स्वीकार कर लिया है। प्रतिवादियों को निर्देश दिए हैं कि वे 15 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करें, जबकि याचिकाकर्ता इसके बाद 15 दिनों में प्रत्युत्तर प्रस्तुत कर सकेंगे। इसके पश्चात मामले की अगली सुनवाई तय की जाएगी।
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