एक-एक कर परिवार के चार सदस्यों को निगल गई मौत
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एक-एक करके एक ही परिवार के चार लोगों को मौत ने लील लिया। एक मौत बीमारी से हुई, तो दो हादसे में। चौथी, बेटे की मौत की जानकारी मिलने पर पिता के जहर खाने पर हुई। चार मौतों ने पूरे इलाके को गमगीन बना दिया।
अभागे परिवार के सुदर्शन सिंह (निवासी घाट उप तहसील के बांजबगड़ विकासनगर) ने बताया कि बीएसएफ में कार्यरत उनके भाई बलवीर सिंह (46) पंद्रह दिनों से बीमार थे।
लीवर में इंफेक्शन के कारण उनका दिल्ली के आर्मी अस्पताल में इलाज चल रहा था। बलबीर की पत्नी बीना देवी (37) पति की तीमारदारी के लिए दिल्ली गई थीं। मंगलवार को बलबीर का निधन हो गया। उनका शव आर्मी ट्रक से गांव लाया जा रहा था। आगे-आगे बीना देवी बलबीर के ममेरे भाई राकेश नेगी (24) के साथ इंडिका कार से गांव लौट रही थीं।
कार एक्सीडेंट में देवर-भाभी की मौत
ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर मूल्यागांव के समीप कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। इसमें बीना देवी और उसके देवर (बलबीर के ममेरे भाई) राकेश नेगी (24) पुत्र विक्रम सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। पीछे से आ रहा आर्मी ट्रक पीछे होने की वजह से किसी को दुर्घटना का पता नहीं चल पाया।
बुधवार की सुबह जब हादसे में घायल चालक को होश आया तो उसने बीना देवी के मोबाइल से उनके पिता को फोन किया। तब जाकर आठ बजे घटना की जानकारी परिजनों और पुलिस को हो पाई।
घायल चालक जगवीर सिंह पुत्र स्व. लाजपत राय निवासी अवानकोट जिला रूपनगर (पंजाब) की हालत गंभीर है। घायल जगवीर सिंह को बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
उधर, जब बलबीर के मामा विक्रम सिंह (64) को हादसे में बेटे राकेश की मौत की खबर मिली तो गम में उन्होंने भी जहर खाकर जान दे दी।
बेटे की मौत की खबर सुन पिता ने दे दी जान
बुधवार सुबह नौ बजे जब राकेश के पिता विक्रम सिंह (64) ने राकेश की दुर्घटना में मौत होने की खबर सुनी तो उन्होंने जहर खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर दी।
एक साल पहले हुई थी शादी
मूल्यागांव के पास भाभी बीना के साथ हादसे का शिकार हुए राकेश की एक वर्ष पूर्व ही शादी हुई थी। उसकी पत्नी नीलू का भी रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, बलवीर और बीना की मौत के बाद उनके तीन बच्चों हिमांशु (13), अनिल और सुनील (जुड़वा 10 वर्ष) के लालन-पालन की जिम्मेदारी दादा देव सिंह और दादी रेवती देवी के कंधों पर आ गई है।
इधर राकेश की मां मथुरा देवी ने भी मौत की खबर से बदहवास पड़ी हैं। बलवीर का ननिहाल भी बांजबगड़ गांव में ही था। एक साथ चार मौतें होने पर गांव में मातम छाया हुआ है।