चीन की बढ़ती बेशर्मी को लेकर बोले तिब्बत के पूर्व प्रधानमंत्री रिंपोचे, बहुत कुछ कहा
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तिब्बत की निर्वासित सरकार के पूर्व प्रधानमंत्री और समुदाय के शीर्ष नेताओं में से एक सैमडौंग रिंपोचे ने तिब्बती समुदाय का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने हाल ही में भारत की तरफ बढ़ती चीन की बेशर्मी को लेकर अपने मन की सारी बातें कही। उन्होंने चीन को लेकर बहुत कुछ बोला।
उन्होंने कहा कि वे अंतिम सांस तक चीनी साम्राज्यवाद का विरोध करें। इसके साथ ही उन्होंने पाश्चात्य संस्कृति की अंधी नकल, अमेरिकी उपभोक्तावादी संस्कृति और संकीर्णवाद से बचने की बात कही।
रिंपोचे सोमवार राजपुर स्थित तिब्बती विद्यालय और शाक्य सेंटर में अलग-अलग कार्यक्रमों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि चीन ने तिब्बती समुदाय पर बर्बर अत्याचार किए हैं। आज भी उसका क्रूर व्यवहार पहले की ही तरह कायम है।
तिब्बती समाज को यह हमेशा स्मरण रखना होगा कि चीन कभी भी हमारा मित्र नहीं हो सकता। सैमडौंग रिंपोचे ने कहा कि जब चीन ने तिब्बत पर हमला किया तब भी भारत तिब्बतियों की मदद को आगे आया। चीन की राजनीतिक सत्ता इंसानियत विरोधी है।
दिन में एक बार भोजन करते हैं रिंपोचे
वहां पर भयानक असंतोष पनप रहा है। हिंसा, स्वार्थ और प्रकृति विनाश पर टिकी समृद्धि कायम नहीं रहेगी। चीन में मानवाधिकारों का नामों निशान तक नहीं है। आर्थिक विषमता भी बढ़ रही है। वहां पर हालात विस्फोटक हो चले हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और तिब्बत के मध्य गहरे सांस्कृतिक व आर्थिक और सामाजिक रिश्ते रहे हैं। हमारे संबंधों का आधार स्वार्थ नहीं बल्कि अध्यात्म रहा है। भारत बौद्ध धर्म व दर्शन का जन्मस्थान है। भारत से ही तिब्बत गए धर्म प्रचारकों ने बौद्ध धर्म की जड़े वहां जमाई। कार्यक्रम में रिंपोचे के निजी सचिव तेनजिन होन्यो समेत बड़ी तादाद में लामा और छात्र समुदाय उपस्थित था।
सैमडौंग रिंपोचे समर्पित गांधीवादी हैं। वह बापू व विनोबा भावे के ही तरह आचार-व्यवहार करते हैं। अस्सी के आसपास पहुंचने वाले वरिष्ठ लामा की दर्शन, राजनीति, विज्ञान, चिकित्सा, भाषा, व्याकरण, समाजशास्त्र व नृशास्त्र पर गहरी पकड़ है। वह पूरी तरह से शाकाहारी भोजन करते हैं। दिन में 12 बजे के बाद भोजन ग्रहण नहीं करते हैं। उन्हें विशुद्ध भारतीय पद्धति का शाकाहारी भोजन पसंद है।