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Forest Conservation Act: बंदिशों से मुक्ति, चिड़ियाघर और रेस्क्यू सेंटर के लिए नहीं करनी होगी वन भूमि हस्तांतरित

Sun, 12 Jun 2022 04:09 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sun, 12 Jun 2022 04:09 PM IST
सार

पूर्व में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की वन सलाहकार समिति के सम्मुख राज्यों की ओर से इन कार्यों को वन संरक्षण अधिनियम की बंदिशों से दूर रखने की मांग की गई थी। इन कार्यों को अब तक गैर वानिकी की श्रेणी में रखा गया था। जिससे वन विभाग को अपनी ही भूमि पर काम करने करने से पहले भूमि हस्तांरण की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था।

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forest conservation act: Forest land will not have to be transferred for zoo and rescue center
सांकेतिक फोटो - फोटो : Social Media

विस्तार

प्रदेश में वन विभाग के अंतर्गत चिड़ियाघर, सफारी, रेस्क्यू सेंटर, बंदरबाड़ों की स्थापना, पुनर्निर्माण या उच्चीकरण में अब वन संरक्षण अधिनियम रोड़ा नहीं बनेंगे। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने इनमें होने वाले सभी कार्यों को वानिकी के अंतर्गत मानते हुए इस संबंध में सभी राज्यों को नई गाइडलाइन जारी की है। 
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मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि मंत्रालय के इस निर्णय के बाद उत्तराखंड को भी बड़ी राहत मिली है। इससे प्रदेश में प्रस्तावित चिड़ियाघर, टाइगर सफारी, रेस्क्यू सेंटर, बंदरबाड़ों की स्थापना में तेजी आएगी। धकाते के अनुसार, मंत्रालय की ओर से भेजी गई नई गाइडलाइन के बाद चिड़ियाघर, टाइगर सफारी, रेस्क्यू सेंटर, बंदरबाड़े जैसे कार्यों के लिए प्रतिकरात्मक वन रोपण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैंपा) से भी धनराशि मिल सकेगी। 
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बताते चलें कि पूर्व में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की वन सलाहकार समिति के सम्मुख राज्यों की ओर से इन कार्यों को वन संरक्षण अधिनियम की बंदिशों से दूर रखने की मांग की गई थी। इन कार्यों को अब तक गैर वानिकी की श्रेणी में रखा गया था। जिससे वन विभाग को अपनी ही भूमि पर काम करने करने से पहले भूमि हस्तांरण की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। नई गाइडलाइन के बाद अब उत्तराखंड में हल्द्वानी चिड़ियाघर, जसपुर टाइगर सफारी के निर्माण और कण्वाश्रम व चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर का उच्चीकरण किया जा सकेगा।
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