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Dehradun News: उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास के लिए पांच क्रांति की जरूरत

Fri, 28 Nov 2025 07:18 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 28 Nov 2025 07:18 PM IST
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Five revolutions are needed for the all-round development of Uttarakhand.
-राजभवन में सुरक्षा, पर्यावरण चुनौतियों और पर्यटन की संभावनाओं पर हुआ विमर्श
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-राज्यपाल ने कहा, सब मिलकर द्वितीय पंक्ति के सुरक्षा प्रहरी का संकल्प लें

अमर उजाला ब्यूरो

देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने कहा कि उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास के लिए पांच क्रांति की जरूरत है। इसमें हनी, एरोमा, मिलेट क्रांति, स्वयं सहायता समूह क्रांति और होम स्टे क्रांति शामिल है।

राजभवन में शुक्रवार को उत्तराखंड में सुरक्षा और पर्यावरण चुनौतियां, पर्यटन विषय पर विमर्श का आयोजन किया गया। राज्यपाल ने कहा कि हमें आज संकल्प लेना है कि हम उत्तराखंड में द्वितीय पंक्ति के सुरक्षा प्रहरी के रूप में सेवा करेंगे। पर्यावरण की रक्षा के लिए हम देवभूमि के प्राचीन संतों की तरह आचरण करेंगे। पर्यटन के उत्थान में हम अतिथि देवो भवः की अवधारणा को आत्मसात करेंगे। विशेष कर युवाओं और पूर्व सैनिकों को इसका दृढ़ निश्चय होकर संकल्प लेना चाहिए। मन में सभी को यह गांठ बांध लेनी चाहिए कि यदि राष्ट्र होगा तो समाज होगा, समाज होगा तो परिवार होगा।
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कार्यक्रम में लेफ्टिनेंट जनरल एके सिंह ने उत्तराखंड के विशेष संदर्भ में सुरक्षा क्रियान्वयन विषय पर कहा कि चीन-पाक गठजोड़, बांग्लादेश की पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकी, सीमा पर तस्करी, साइबर हमले, नकारात्मक सोशल मीडिया, देश विरोधी टूलकिट, नकारात्मक प्रचार हमारी बाहरी और आंतरिक सुरक्षा के सबसे बड़े खतरे हैं। आंतरिक खतरों से निपटने के लिए उन्होंने भारतीय जन समुदाय को प्रशिक्षित सुशिक्षित और जागरूक रहने तथा देश के प्रति निष्ठा, समर्पण और सेवाभाव को आत्मसात करने की अपील की।
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मैती आंदोलन के प्रणेता पदमश्री कल्याण सिंह रावत ने पर्यावरण विषय पर कहा कि बांझ उत्तराखंड के पर्यावरण के केंद्र में है। अंग्रेजों ने कोयला बनाने के लिए बांझ के पेड़ों पर आरी चलाई। इसके स्थान पर रेजिन और औद्योगिक आवश्यकताओं के लिए चीड़ की विदेशी प्रजातियां लगाईं। आज यहां बांझ के पेड़ सिमटकर 14 प्रतिशत के आसपास रह गए। चीड़ के पेड़ 27 प्रतिशत से ऊपर पहुंच चुके हैं। बांझ के पेड़ घटे तो पहाड़ों में जल स्रोत सूख गए, जंगल में नमी कम हो गई, जिससे वन्य जीवों को जंगल में न हरियाली मिल रही और न ही पीने का पानी।


पर्यटन की संभावना पर कमांडर दीपक खंडूरी ने कहा कि ग्रामीण पर्यटन, पारिस्थितिकी पर्यटन, झील पर्यटन, वेलनेस पर्यटन, आध्यात्मिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन, एंग्लिंग पर्यटन, वन्य जीव पर्यटन जैसे अनेक पर्यटन आयाम तेजी से विकसित हो रहे हैं। अधिकतर पर्यटक नैनीताल, मसूरी, हरिद्वार, राजाजी पार्क में ही केंद्रित हो रहा है, जिससे इन क्षेत्रों की कैरिंग कैपेसिटी ओवरलोड हो रही है। अनेक जगह नए-नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित करने होंगे। इस मौके पर अखिल भारतीय पूर्व सैनिक परिषद के अध्यक्ष ले जनरल बीके चतुर्वेदी(सेनि), कर्नल अजय कोठियाल (सेनि), पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एसएस नेगी, सैनिक अधिकारी सीके अहलूवालिया, प्रदीप जोशी उपस्थित रहे।
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