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23 अप्रैल तक अंतरिक्ष से बरसेंगी मन्नतें
अमर उजाला, नैनीताल
Updated Tue, 22 Apr 2014 11:08 AM IST
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तारा टूटते समय विश मांगने की बात आपने सुनी होगी, लेकिन अब यह संभव हो सकता है। जी हां, सोमवार रात से आसमान में यह क्रिया शुरू हो गई है।
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वार्षिक सौरमंडलीय घटना
लायरा कांस्टीलेशन (अंतरिक्ष में तारों का समूह) की दिशा से छोटे-छोटे पत्थर और कणों के पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने और घर्षण से जलकर आतिशबाजी का सा नजारा करने वाली वार्षिक सौरमंडलीय घटना सोमवार रात से शुरू हो गई।
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23 अप्रैल तक करीब 20 उल्कापात प्रति घंटे रात में दिखाई देंगे। आम लोग इस घटना को तारे टूटने के नाम से जानते हैं।
प्रतिवर्ष अप्रैल में यह घटना घटित होती है, क्योंकि इस वक्त पृथ्वी ऐसे क्षेत्र से गुजरती है, जहां अंतरिक्ष में धूमकेतुओं की पूंछ से छूटे छोटे-छोटे उल्काओं (पत्थरों) की बहुत ज्यादा संख्या होती है।
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वायुमंडलीय घर्षण से जलकर चमकते हैं पत्थर
पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से यह पत्थर पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं और हमारे वायुमंडलीय घर्षण से जलकर चमकते हुए आतिशबाजी जैसे नजर आते हैं। लायरा कांस्टीलेशन की ओर से आने पर यह लिरिड कहलाते हैं।
ऐरीज के वैज्ञानिक डॉ. हूम चंद्र कहते हैं कि यह लिरिड एक सामान्य खगोलीय घटना है, जो हर वर्ष इन्हीं दिनों घटित होती है। लोग इसे तारा टूटने की घटना भी कहते हैं।
आम धारणा है कि इन्हें देखकर की गई विश (मन्नत) जरूर पूरी होती है लेकिन विज्ञान इससे इत्तफाक नहीं रखता। डॉ. हूम चंद्र ने बताया कि रात करीब 12 बजे चंद्रोदय से पूर्व वेगा दिशा (पूर्व से पश्चिम की ओर) से यह उल्कापात दिखाई देगा।