{"_id":"58a726944f1c1bda4ed83dda","slug":"fir-against-doctors","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंडः शर्तें नहीं मानने वाले डॉक्टरों के खिलाफ होगी एफआईआर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंडः शर्तें नहीं मानने वाले डॉक्टरों के खिलाफ होगी एफआईआर
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 17 Feb 2017 10:23 PM IST
विज्ञापन
doctor shimla
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सस्ती फीस पर एमबीबीएस और एमडी करने के बाद पांच साल तक पर्वतीय क्षेत्रों में नौकरी करने संबंधी बॉंड की शर्त न मानने वाले एमडी डाक्टरों के खिलाफ एफआईआर की जाएगी। इस संबंध में शुक्रवार को महानिदेशालय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण में बैठक के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र भेजा गया है। इसके साथ ही बॉंड भरकर एमबीबीएस करने वाले ढाई सौ डाक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के संबंध में महानिदेशालय ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को रिमाइंडर भेजा है।
विज्ञापन
मेडिकल कालेज हल्द्वानी से एमडी डाक्टरों का जो ताजा बैच पास हुआ है, उनमें 15 डाक्टरों ने अभी तक बॉंड की शर्तों का पालन नहीं किया है। बॉंड भरने वाले डाक्टरों को प्रदेश सरकार सस्ती फीस पर चिकित्सा की पढ़ाई करवाती है। इसके बदले में यह शर्त होती है कि डाक्टर पांच साल तक पर्वतीय क्षेत्रों में नौकरी करके लोगों को चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। लेकिन सस्ती दर पर पढ़ाई करने के बाद पीजी डाक्टर विभाग को गच्चा देने की फिराक में हैं।
विज्ञापन
चिकित्सा विभाग को लिखा गया है कि पीजी करके अभी तक ज्वाइन न करने वाले बॉंडेड डाक्टरों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही कार्रवाई के संबंध में सूचना महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को उपलब्ध कराई जाए। इसी तरह ढाई सौ डाक्टरों ने सस्ती फीस पर एमबीबीएस तो कर लिया, लेकिन बॉंड की शर्तें मानने के लिए तैयार नहीं हैं। अपर निदेशक (प्रशासन) डा. प्रेमलाल का कहना है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग को ढाई सौ एमबीबीएस डाक्टरों की सूची महानिदेशालय पहले ही कार्रवाई के लिए भेज चुका है। अब इस संबंध में रिमाइंडर भेजा गया है।
विज्ञापन
बॉंडेड डाक्टरों के संबंध में बनेगी संयुक्त कमेटी
बॉंड भरकर सस्ती दरों पर डिग्री हासिल करके शर्तें पूरी न करने वाले डाक्टरों के खिलाफ कार्रवाई में पेंच फंसा हुआ है। महानिदेशालय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण इसके लिए मेडिकल चिकित्सा विभाग को पत्र भेज रहा है और विभाग यह सोच रहा है कि कार्रवाई कौन करेगा? फिलहाल शासन स्तर पर एक संयुक्त कमेटी का गठन किया जा रहा है। यह कमेटी कार्रवाई के संबंध में फैसला लेगी।
निदेशक चिकित्सा शिक्षा विभाग आशुतोष सयाना का कहना है कि जब छात्र पढ़ता है तो मेडिकल कालेज के प्राचार्य के अंडर में रहता है। इसके बाद जब ज्वाइन करता है तो महानिदेशालय के अंडर में आ जाता है। ऐसी स्थिति में कार्रवाई महानिदेशालय करेगा।
इस संबंध में शासन स्तर पर अपर सचिव की अध्यक्षता में गठित होने वाली संयुक्त कमेटी फैसला करेगी। इसका रास्ता निकाला जा रहा है। बता दें कि बीते साल एमबीबीएस पास करने वाले बॉंडेड डाक्टरों के संबंध में भी अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया है। अब यही स्थिति पीजी करने वाले डाक्टरों की हो गई है। इस संबंध में अर्थदंड की व्यवस्था शासन स्तर पर भी की जा चुकी है।