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गैरसैंण विधानसभा: किसानों की आत्महत्या को लेकर सदन में भारी हंगामा, विधायकों में धक्का-मुक्की

Sat, 24 Mar 2018 02:06 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गैरसैंण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गैरसैंण Updated Sat, 24 Mar 2018 02:06 PM IST
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fifth day of gairsain vidhan sabha budget session 2018
गैरसैंण सत्र - फोटो : AmarUjala

गैरसैंण विधानसभा सत्र का पांचवा दिन भले ही शांति से शुरू हुआ लेकिन किसानों की आत्महत्या को लेकर सदन में भारी हंगामा हो गया। इतना ही नहीं विधायकों के बीच हाथापाई और जमकर धक्कामुक्की हो गई। 

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नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने जब बजट पर चर्चा के दौरान किसान आत्महत्या का जिक्र किया तो शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने आपत्ति दर्ज की। विरोध में विपक्ष के विधायक कारण मेहरा, काजी निजामुद्दीन, हरीश धामी वेल में आ गए। हंगामें के कारण सदन को सात बार स्थगित करना पड़ा। 
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सदन में भाजपा विधायक ठुकराल, पूरण फर्त्याल, काजी निजामुद्दीन और करन धामी के बीच जमकर धक्का मुक्की हुई। वहीं सदस्यों के ऐसे आचरण से स्पीकर नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि विधायकों से ऐसे आचरण की उम्मीद नहीं थी।
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वहीं विधानसभा सत्र की कम अवधि का मसला शुक्रवार को सदन में गूंजा। कांग्रेस के काजी निजामुद्दीन ने इस मामले को उठाते हुए कहा कि सत्र कम चलेगा, तो जन सरोकारों से जुडे़ मसले कम उठेंगे। जवाब में सरकार ने कहा कि सिर्फ एक साल की बात नहीं है, बल्कि जब से राज्य बना है, तब से ही ऐसी स्थिति दिखाई देती है। इस मामले में कांग्रेस ने पीठ से विनिश्चय देने का अनुरोध किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद स्पीकर प्रेम चंद्र अग्रवाल ने अपना निर्णय सुरक्षित रखा है।


कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने नियम 299 के तहत इस मामले को उठाया। उन्होंने कहा कि साल भर में सिर्फ 13 दिन ही सदन की कार्यवाही चली है। सदन की कार्यवाही के लिए न्यूनतम अवधि पीठ के स्तर पर तय कर दिए जाने का उन्होंने अनुरोध किया। जवाब देने के लिए संसदीय और विधायी कार्य मंत्री प्रकाश पंत सामने आए। उन्होंने आंकडों के साथ अपनी रखी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2001 में सिर्फ 19 दिन सदन चला। इसके बाद, 2002 से 06 तक 83, 2007 से 11 तक 81 और 2012 से 16 तक सदन की कार्यवाही सिर्फ 72 दिन ही चल पाई थी। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही के लिए कार्य मंत्रणा समिति की सिफारिशें अहम होती है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद पीठ के स्तर पर निर्णय सुरक्षित रखने की घोषणा की गई।

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