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Dehradun News: मिट्टी के चूल्हे पर बनाया भोज, छठी मईया की अराधना कर लगाया भोग
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IIमंगलवार को नहाय खाय के साथ शुरू हुआ चार दिवसीय छठ महापर्व
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I नहाय खाय के साथ मंगलवार को चार दिवसीय छठ महापर्व की शुरुआत हो गई। महिलाओं ने स्नान कर सूर्य को जल अर्पित किया और मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से पारंपरिक भोजन बनाया। छठी मईया की अराधना कर भोग लगाया गया। इसके बाद प्रसाद स्वरूप इसे ग्रहण किया। वहीं, समितियों की ओर से छठ घाटों की सफाई की गई।
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Iछठ व्रती महिलाओं ने मिट्टी के चूल्हे और आम की लकड़ी से कद्दू की सब्जी, अरहर की दाल व अरवा (कच्चा चावल) का भात बनाया। इस दौरान छठी मईया की अराधना कर प्रसाद स्वरूप उसे ग्रहण किया। दून के टपकेश्वर महादेव मंदिर, सेलाकुई, रायवाला, मालदेवता, केशरवाला, ब्रह्मपुरी, रिस्पना, पुलिया नंबर छह, नत्थनपुरा, सिंघल मंडी, चंद्रबनी, गुल्लरघाटी सहित कई सभी छठ घाटों पर साफ-सफाई की गई। पूर्वा सांस्कृतिक मंच के संस्थापक व महासचिव सुभाष झा ने बताया कि मंच अपने 18 घाटों का गंगाजल युक्त जल से छिड़काव कर पवित्र करेगा।
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Iखरना आज, शुरू होगा 36 घंटे का निर्जला उपवास
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Iछठ महापर्व के दूसरे दिन बुधवार को खरना होगा। खरना में भी महिलाएं पूरे दिन व्रत रखेंगी और केवल एक बार भोजन करेंगी। शाम को व्रती भगवान सूर्य का पूजन कर प्रसाद अर्पित करेंगी। शाम को चावल, गुड़ और गन्ने के रस से बने रसियाव (खीर) को खाया जाता है। खाने में नमक और चीनी का प्रयोग नहीं किया जाता। इस भोजन को एकांत में रहकर ही खाने का रिवाज है। इसके बाद व्रती महिलाएं अपने परिजनों को रसियाव रोटी का प्रसाद देती हैं। इसके बाद अगले 36 घंटे के लिए निर्जला उपवास शुरू होता है। मध्य रात को व्रती छठ पूजा के लिए विशेष प्रसाद ठेकुआ बनाती हैं।
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Iगुलजार रहे बाजार, खूब हुई खरीदारी
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Iछठ महापर्व को लेकर मंगलवार को भी बाजार गुलजार रहे। फल-सब्जी से लेकर बांस के सूप, टोकरी, ईख आदि की खूब खरीदारी की गई। दून के झंडा बाजार पर महिलाएं काफी संख्या में छठ महापर्व के लिए टोकरी में सामान लेकर जाती दिखीं।
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Iअब उत्तराखंड का पैसा उत्तराखंड में ही होता है खर्च
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Iपूर्वा सांस्कृतिक मंच के संस्थापक सुभाष झा ने बताया कि बिहार, यूपी, झारखंड मूल के लोगों का यह महापर्व अब उत्तराखंड और विशेष देहरादून में भी मनाया जाने लगा है। इससे उत्तराखंड को धार्मिक गतिविधियों के साथ ही राजस्व में भी फायदा मिला है। उत्तराखंड में कमाया हुआ पैसा अब उत्तराखंड में ही खर्च होता है। अनुमानित तौर पर प्रदेश में 200 से 300 करोड़ के करीब तीन दिन में कारोबार होता है।I
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IIमंगलवार को नहाय खाय के साथ शुरू हुआ चार दिवसीय छठ महापर्व
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I नहाय खाय के साथ मंगलवार को चार दिवसीय छठ महापर्व की शुरुआत हो गई। महिलाओं ने स्नान कर सूर्य को जल अर्पित किया और मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से पारंपरिक भोजन बनाया। छठी मईया की अराधना कर भोग लगाया गया। इसके बाद प्रसाद स्वरूप इसे ग्रहण किया। वहीं, समितियों की ओर से छठ घाटों की सफाई की गई।
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Iछठ व्रती महिलाओं ने मिट्टी के चूल्हे और आम की लकड़ी से कद्दू की सब्जी, अरहर की दाल व अरवा (कच्चा चावल) का भात बनाया। इस दौरान छठी मईया की अराधना कर प्रसाद स्वरूप उसे ग्रहण किया। दून के टपकेश्वर महादेव मंदिर, सेलाकुई, रायवाला, मालदेवता, केशरवाला, ब्रह्मपुरी, रिस्पना, पुलिया नंबर छह, नत्थनपुरा, सिंघल मंडी, चंद्रबनी, गुल्लरघाटी सहित कई सभी छठ घाटों पर साफ-सफाई की गई। पूर्वा सांस्कृतिक मंच के संस्थापक व महासचिव सुभाष झा ने बताया कि मंच अपने 18 घाटों का गंगाजल युक्त जल से छिड़काव कर पवित्र करेगा।
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Iखरना आज, शुरू होगा 36 घंटे का निर्जला उपवास
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Iछठ महापर्व के दूसरे दिन बुधवार को खरना होगा। खरना में भी महिलाएं पूरे दिन व्रत रखेंगी और केवल एक बार भोजन करेंगी। शाम को व्रती भगवान सूर्य का पूजन कर प्रसाद अर्पित करेंगी। शाम को चावल, गुड़ और गन्ने के रस से बने रसियाव (खीर) को खाया जाता है। खाने में नमक और चीनी का प्रयोग नहीं किया जाता। इस भोजन को एकांत में रहकर ही खाने का रिवाज है। इसके बाद व्रती महिलाएं अपने परिजनों को रसियाव रोटी का प्रसाद देती हैं। इसके बाद अगले 36 घंटे के लिए निर्जला उपवास शुरू होता है। मध्य रात को व्रती छठ पूजा के लिए विशेष प्रसाद ठेकुआ बनाती हैं।
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Iगुलजार रहे बाजार, खूब हुई खरीदारी
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Iछठ महापर्व को लेकर मंगलवार को भी बाजार गुलजार रहे। फल-सब्जी से लेकर बांस के सूप, टोकरी, ईख आदि की खूब खरीदारी की गई। दून के झंडा बाजार पर महिलाएं काफी संख्या में छठ महापर्व के लिए टोकरी में सामान लेकर जाती दिखीं।
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Iअब उत्तराखंड का पैसा उत्तराखंड में ही होता है खर्च
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Iपूर्वा सांस्कृतिक मंच के संस्थापक सुभाष झा ने बताया कि बिहार, यूपी, झारखंड मूल के लोगों का यह महापर्व अब उत्तराखंड और विशेष देहरादून में भी मनाया जाने लगा है। इससे उत्तराखंड को धार्मिक गतिविधियों के साथ ही राजस्व में भी फायदा मिला है। उत्तराखंड में कमाया हुआ पैसा अब उत्तराखंड में ही खर्च होता है। अनुमानित तौर पर प्रदेश में 200 से 300 करोड़ के करीब तीन दिन में कारोबार होता है।I