देहरादून: फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला, किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल कैद
- दस साल की किशोरी से साल 2018 में हुआ था दुष्कर्म, 20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया
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देहरादून में दस साल की किशोरी से दुष्कर्म करने के दोषी को कोर्ट ने 20 साल की सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष ने इस मामले में नौ गवाह पेश किए।
शासकीय अधिवक्ता अरविंद कपिल ने बताया कि पीड़िता के पिता ने 27 अक्तूबर 2018 को डोईवाला कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। पुलिस ने छानबीन शुरू की लेकिन पीड़िता का कहीं पता नहीं चला। इसी बीच राजस्थान पुलिस को कोटा में किशोरी भटकती मिली।
उसने खुद को अनाथ बताया। इस पर उसे अनाथालय में दाखिल कर दिया गया। कुछ दिन बाद उसने आपबीती सुनाई तो राजस्थान पुलिस ने देहरादून पुलिस से संपर्क कर उसे घर पहुंचाया।
पीड़िता के बयानों के आधार पर डोईवाला कोतवाली पुलिस ने गुमशुदगी को दुष्कर्म और पॉस्को की धाराओं में तरमीम कर आरोपी सफीक पुत्र अब्दुल हमीद निवासी बिचली जोली पाल, मोहल्ला डोईवाला के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। उसके बाद सफीक को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में बताया कि सफीक पीड़िता के पिता के साथ ठेकेदारी करता था। किशोरी को अकेला पाकर वह अक्सर उससे दुष्कर्म करता था। घटना के दिन भी आरोपी ने पीड़िता से दुष्कर्म किया था।
इस दौरान आरोपी को पीड़िता के भाई ने देख लिया था। भाई के डर से पीड़िता घर से भाग निकली। उस दिन से आरोपी भी गायब हो गया। फास्ट ट्रैक कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अनिरुद्ध भट्ट की अदालत ने सफीक को दोषी पाते सजा सुनाई। कोर्ट ने चश्मदीद गवाह के रूप में पीड़िता के भाई के बयान को सबसे अहम माना।