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Dehradun News: सबूत नहीं टिके, दहेज हत्या के आरोपी पति, सास और देवर बरी
Wed, 30 Sep 2026 01:58 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Wed, 30 Sep 2026 01:58 AM IST
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अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नंदन सिंह की अदालत ने दहेज हत्या के मामले में सिंघनीवाला निवासी मृतका सिया के पति मनीष राणा, सास सीमा देवी और चचेरे देवर आकाश राणा को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। घटना 14 सितंबर 2022 की है। अभियोजन पक्ष के अनुसार सिया की शादी चार मई 2017 को मनीष से हुई थी।
उनकी मां रीता देवी ने 15 सितंबर 2022 को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि कम दहेज लाने पर बेटी को प्रताड़ित किया गया और जहर देकर मार डाला गया। धूलकोट स्थित अस्पताल में इलाज के दौरान सिया की मृत्यु हुई थी। पोस्टमार्टम में मौत का कारण एल्यूमीनियम फॉस्फाइड जहर बताया गया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधी धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की।
अभियोजन ने 11 गवाह पेश किए, जबकि बचाव पक्ष ने कोई गवाह नहीं रखा। न्यायालय ने पाया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में दहेज मांग का कोई उल्लेख नहीं था। मां रीता देवी ने जिरह में स्वीकार किया कि तीन साल तक ससुराल पक्ष ने दहेज नहीं मांगा और पहले कभी शिकायत नहीं की। विवेचक पुलिस क्षेत्राधिकारी संदीप नेगी ने भी कहा कि किसी गवाह ने मृत्यु से पहले दहेज के लिए उत्पीड़न नहीं बताया। अवैध संबंधों के आरोप का भी कोई प्रमाण नहीं मिला। न्यायालय ने कहा कि मृत्यु से ठीक पूर्व क्रूरता साबित नहीं हुई, इसलिए संबंधी धारा की धारणा लागू नहीं होती। संदेह का लाभ देते हुए तीनों को दोषमुक्त किया गया।
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उनकी मां रीता देवी ने 15 सितंबर 2022 को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि कम दहेज लाने पर बेटी को प्रताड़ित किया गया और जहर देकर मार डाला गया। धूलकोट स्थित अस्पताल में इलाज के दौरान सिया की मृत्यु हुई थी। पोस्टमार्टम में मौत का कारण एल्यूमीनियम फॉस्फाइड जहर बताया गया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधी धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की।
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अभियोजन ने 11 गवाह पेश किए, जबकि बचाव पक्ष ने कोई गवाह नहीं रखा। न्यायालय ने पाया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में दहेज मांग का कोई उल्लेख नहीं था। मां रीता देवी ने जिरह में स्वीकार किया कि तीन साल तक ससुराल पक्ष ने दहेज नहीं मांगा और पहले कभी शिकायत नहीं की। विवेचक पुलिस क्षेत्राधिकारी संदीप नेगी ने भी कहा कि किसी गवाह ने मृत्यु से पहले दहेज के लिए उत्पीड़न नहीं बताया। अवैध संबंधों के आरोप का भी कोई प्रमाण नहीं मिला। न्यायालय ने कहा कि मृत्यु से ठीक पूर्व क्रूरता साबित नहीं हुई, इसलिए संबंधी धारा की धारणा लागू नहीं होती। संदेह का लाभ देते हुए तीनों को दोषमुक्त किया गया।
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