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Dehradun News: सात माह बाद भी नहीं हो पाया 19 आपदा प्रभावित परिवारों का विस्थापन
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विकासनगर। जाखन गांव के 19 आपदा प्रभावित परिवारों का सात माह बीतने के बाद विस्थापन नहीं हो पाया है। रुद्रपुर में स्थानीय ग्रामीणों ने आपदा प्रभावितों के विस्थापन को लेकर आपत्ति जता दी थी। जबकि जामनखाता में आपदा प्रभावित बसने के लिए तैयार नहीं हैं। करीब चार महीने से कमरे का किराया न मिलने के चलते आपदा प्रभावित अपने रिश्तेदारों और परिचितों के घर में रहने को मजबूर हैं।
बीते साल 16 अगस्त को लांघा-मटोगी मोटरमार्ग के ऊपर भूस्खलन के चलते जाखन गांव में मलबा आ गया था। इस दौरान गांव की सड़क धंस गई थी। कुछ देर में गांव में हुए भू धंसाव के चलते 10 घर जमींनदोज हो गए थे। लोगों के खेतों और छानियों को नुकसान पहुंचा था। सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन ने आपदा प्रभावितों को पास ही स्थित पष्टा गांव में शिफ्ट किया गया था। आपदा पीड़ित परिवारों को पूर्व मे राजकीय माध्यमिक विद्यालय पष्टा में रखा गया था। यहां करीब तीन माह के लिए रहे थे। 10 आपदा प्रभावितों को 1.32 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई थी। 28 परिवारों को पांच हजार रुपये की राहत राशि मिली थी।
भूगर्भ विज्ञानियों की टीम ने भू-सर्वेक्षण में जाखन और आसपास के क्षेत्र को आपदा की द़ृष्टि से संवेदशील पाया था। उसके बाद आपदा प्रभावित 19 परिवारों को अन्यत्र विस्थापित करने की तैयारी शुरू हुई थी। प्रशासन ने रुद्रपुर और जामनखाता में आपदा प्रभावितों के विस्थापन के लिए भूमि चिह्नित की गई थी। रुद्रपुर में विरोध के चलते दूसरे विकल्प के तौर जामनखाता में भूमि चिह्नित की गई थी। यहां आपदा प्रभावितों ने विस्थापित होने से मना कर दिया।
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इस बीच प्रशासन ने विस्थापन के लिए भूमि के विकल्प खोजने तक आपदा प्रभावित परिवारों को किराये के कमरे के लिए चार हजार रुपये मासिक देने का आश्वासन दिया। आपदा प्रभवित जगत सिंह, आनंद सिंह तोमर, जीवन सिंह, सुदामा देवी, मुन्नी देवी आदि ने बताया कि अब तक न तो उनका विस्थापन हुआ है, न ही चार महीने से कमरे का किराया मिल रहा है। बताया कि कई लोग अपने खर्च पर किराये के कमरे, रिश्तेदारों और परिचितों के घर पर रह रहे हैं। आपदा प्रभावितों ने बताया कि विस्थापन न होने से उनको भविष्य की चिंता सता रही है।
विकासनगर एसडीएम विनोद कुमार ने बताया कि जाखन आपदा प्रभावितों के विस्थापन के लिए दो स्थानों का चयन किया गया है। विस्थापन के लिए जिलाधिकारी को प्रस्ताव भेजा गया है। किराये के भुगतान के लिए भी शासन को सहायता धनराशि का प्रस्ताव भी भेज दिया गया है।
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बीते साल 16 अगस्त को लांघा-मटोगी मोटरमार्ग के ऊपर भूस्खलन के चलते जाखन गांव में मलबा आ गया था। इस दौरान गांव की सड़क धंस गई थी। कुछ देर में गांव में हुए भू धंसाव के चलते 10 घर जमींनदोज हो गए थे। लोगों के खेतों और छानियों को नुकसान पहुंचा था। सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन ने आपदा प्रभावितों को पास ही स्थित पष्टा गांव में शिफ्ट किया गया था। आपदा पीड़ित परिवारों को पूर्व मे राजकीय माध्यमिक विद्यालय पष्टा में रखा गया था। यहां करीब तीन माह के लिए रहे थे। 10 आपदा प्रभावितों को 1.32 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई थी। 28 परिवारों को पांच हजार रुपये की राहत राशि मिली थी।
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भूगर्भ विज्ञानियों की टीम ने भू-सर्वेक्षण में जाखन और आसपास के क्षेत्र को आपदा की द़ृष्टि से संवेदशील पाया था। उसके बाद आपदा प्रभावित 19 परिवारों को अन्यत्र विस्थापित करने की तैयारी शुरू हुई थी। प्रशासन ने रुद्रपुर और जामनखाता में आपदा प्रभावितों के विस्थापन के लिए भूमि चिह्नित की गई थी। रुद्रपुर में विरोध के चलते दूसरे विकल्प के तौर जामनखाता में भूमि चिह्नित की गई थी। यहां आपदा प्रभावितों ने विस्थापित होने से मना कर दिया।
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इस बीच प्रशासन ने विस्थापन के लिए भूमि के विकल्प खोजने तक आपदा प्रभावित परिवारों को किराये के कमरे के लिए चार हजार रुपये मासिक देने का आश्वासन दिया। आपदा प्रभवित जगत सिंह, आनंद सिंह तोमर, जीवन सिंह, सुदामा देवी, मुन्नी देवी आदि ने बताया कि अब तक न तो उनका विस्थापन हुआ है, न ही चार महीने से कमरे का किराया मिल रहा है। बताया कि कई लोग अपने खर्च पर किराये के कमरे, रिश्तेदारों और परिचितों के घर पर रह रहे हैं। आपदा प्रभावितों ने बताया कि विस्थापन न होने से उनको भविष्य की चिंता सता रही है।
विकासनगर एसडीएम विनोद कुमार ने बताया कि जाखन आपदा प्रभावितों के विस्थापन के लिए दो स्थानों का चयन किया गया है। विस्थापन के लिए जिलाधिकारी को प्रस्ताव भेजा गया है। किराये के भुगतान के लिए भी शासन को सहायता धनराशि का प्रस्ताव भी भेज दिया गया है।