उक्रांद को बड़ा झटका, निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे प्रत्याशी
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उत्तराखंड क्रांति दल में चल रही धड़ेबाजी एक बार फिर दल पर भारी पड़ी है। त्रिवेंद्र सिंह पंवार और काशी सिंह ऐरी के बीच असली उक्रांद को लेकर चल रही खींचतान पर निर्वाचन आयोग ने उनके प्रत्याशियों को निर्दलीय मानने का फैसला दिया है।
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निर्वाचन आयोग ने ऐरी और पंवार धड़े के पदाधिकारियों को अनधिकृत करार दिया है। हालांकि आयोग ने उक्रांद के नाम के इस्तेमाल पर कोई निर्देश नहीं दिया है न ही उसे समाप्त किया है, इसका फैसला चुनाव के बाद होगा।
आयोग ने साफ किया है कि पार्टी का विवाद अभी सुलझा नहीं है जिससे उसे चुनाव चिन्ह आवंटित नहीं किया जाएगा।
ईवीएम मशीन पर नहीं होगा उक्रांद
चुनाव आयोग के फैसले के बाद अब ईवीएम मशीन में उक्रांद के प्रत्याशियों के तौर पर कोई प्रत्याशी नहीं होगा। पंवार और ऐरी धड़े को आयोग जो चुनाव चिन्ह आवंटित करेगा वह बतौर निर्दलीय ही दर्ज किये जाएंगे।
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इसका नुकसान दोनों धड़ों को उठाना पड़ेगा। गौरतलब है उक्रांद डेमोक्रेटिक दल पंजीकृत है लेकिन उसका कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं है।
चुनाव नहीं, अस्त्त्वि की लड़ाई लड़ रहा यूकेडी
1979 में बने उत्तराखंड क्रांति दल चुनाव जीतने से अधिक अपना अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहा है। निर्वाचन आयोग ने काशी सिंह ऐरी और त्रिवेंद्र पंवार धड़े की सुनवाई के बाद उनके प्रत्याशियों को निर्दलीय करार दे दिया है।
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ऐसे में पार्टी प्रत्याशियों की स्थिति और दयनीय हो गई है। प्रत्याशियों को यह चिंता सता रही है कि अगर सबको समान चिन्ह नहीं मिले तो प्रचार अभियान कैसे चलेगा। ऐरी धड़े के पांचों सीटों पर प्रत्याशी हैं, जबकि पंवार धड़े को दो सीटों टिहरी और पौड़ी में प्रत्याशी हैं।
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उधर, उक्रांद की खेमेबाजी का फायदा क्षेत्रीय मुद्दों पर संघर्ष करने वाले दलों को मिल सकता है। आम आदमी पार्टी ने गैरसैंण स्थाई राजधानी और रामपुर तिराहा कांड जैसे मुद्दों को घोषणा पत्र में शामिल कर इसकी शुरुआत कर दी है।
उक्रांद के नुकसान से इन दलों को फायदा
उत्तराखंड क्रांति दल के नेताओं में मतभेदों के चलते अब पार्टी हाशिये पर पहुंच गई है। दल के दो मुख्य धड़े अपने प्रत्याशी चुनाव में उतार चुके है लेकिन अब निर्दलीय उतरने से उनके सामने वोटर के बीच पहचान एक बड़ी चुनौती बन गई है।
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उक्रांद की गिरती साख का फायदा आम आदमी पार्टी और उत्तराखंड़ परिवर्तन पार्टी जैसे दलों को होगा।
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जिन मुद्दों पर उक्रांद चुनाव लड़ा करती है उन्हीं को आप ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल कर खुद को क्षेत्रीय फ्रंट पर विकल्प के तौर पर पेश किया है।
क्या कहते हैं उक्रांद के नेता
आयोग ने पार्टी नाम के इस्तेमाल पर कोई रोक नहीं लगाई है। 2012 में हमारे नेतृत्व वाले दल को आयोग ने असली उक्रांद माना था, जो फैसला बरकरार है जब तक नया फैसला नहीं आता है। हमने कप प्लेट की मांग आयोग के समक्ष रखी है। हालांकि काशी सिंह ऐरी दल का नाम इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।
-त्रिवेंद्र सिंह पंवार, उक्रांद (पंवार)
आयोग ने केवल प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटन बतौर निर्दलीय करने के निर्देश दिए हैं। पार्टी का नाम प्रचार अभियान में किए जाने पर कोई रोक नहीं है। हालांकि आयोग के फैसले से प्रत्याशियों को प्रचार में दिक्कत आएगी, जिसके लिए दल ने एक समान चिन्ह पांचों सीटों पर मांगा है।
-काशी सिंह ऐरी, (ऐरी)