नए मेयर के सम्मान समारोह के दौरान कारोबारी ने दूसरे की जमीन कर दी निगम को दान
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शहर के एक कारोबारी की ओर से बीते रविवार को मेयर अनिता ममगाईं के शपथ ग्रहण समारोह में नगर निगम को दान दी गई जमीन उस कारोबारी की थी ही नहीं। यह मामला आज उस समय खुला जब मंगलवार को मेयर लाव लश्कर के साथ लक्कड़घाट स्थित जमीन का मौका मुआयना करने पहुंचीं। मेयर के मुआयने की भनक लगते ही जमीन का असल मालिक भी मौके पर पहुंच गया और पूरे मामले का खुलासा हो गया।
जानकारी के अनुसार रविवार को आयोजित मेयर के सम्मान ग्रहण समारोह में कारोबारी डॉ. आरके गुप्ता भी मौजूद थे। इसी दौरान उन्होंने निगम को अपनी दो बीघा जमीन दान देने की घोषणा कर डाली। इससे उत्साहित मेयर ने भी आनन फानन में मौका मुुआयना करने की योजना बनाई। मंगलवार को मेयर अनिता ममगाईं, दानदाता के प्रतिनिधि के तौर पर अजय गर्ग सहित तमाम लोग श्यामपुर स्थित लक्कड़घाट पहुंचे। इस दौरान जमीन का रकबा दो बीघा न होकर महज एक बीघा ही पाया गया। दूसरी दिलचस्प घटना ये हुई कि जिस जमीन को दान देने का दावा किया जा रहा था वह डॉ. आरके गुप्ता की है नहीं। मौके पर ही जमीन के मालिकाना हक को लेकर बहस छिड़ गई।
दस्तावेजों की करवाएंगे जांच
डॉ. आरके गुप्ता की फर्म में डॉयरेक्टर और खुद को रिश्तेदार कहने वाले अजय गर्ग का कहना है कि वे खुद मौके पर गए थे। डॉ. आरके गुप्ता ने गलतफहमी में दो बीघा जमीन की बात कह दी थी। दरअसल एक बीघा जमीन नगर निगम को दान में देने की बात हुई है। हमने पूर्व में भी पालिका को जमीन दान में दी थी। करीब 15 साल पहले जमीन ली गई थी। हम दस्तावेज निकलवाएंगे। नगर निगम को जमीन दी जाएगी, वह जो चाहे उपयोग करे।
राजस्व अभिलेखों की करवाएंगे जांच
मेयर अनिता ममगाईं ने बताया कि वह दान में मिली जमीन का मुआयना करने गए थे। पहले ही डॉ. आरके गुप्ता को कह दिया था कि जमीन के दस्तावेज उपलब्ध कराइए। उन्होंने अजय गर्ग को जमीन का मौका मुआयना करवाने के लिए भेजा था। भूमि के कागजात मांगे तो वे दिखा नहीं पाए। योजना है कि यदि जमीन मिल जाती है तो सामुदायिक केंद्र बनाया जाएगा। फिलहाल हम अपने स्तर पर भी पड़ताल करवाएंगे कि राजस्व अभिलेखों में उक्त जमीन किसकी है।
जमीन हमारी...दान कोई और कैसे करेगा
जमीन पर मालिकाना हक जताने वाले राजेंद्र सिंह ने बताया कि जमीन हमारी है। जमीन की रजिस्ट्री उनके पिता सावन सिंह के नाम पर है। भूमि किसी को दान में नहीं दी गई है। डॉ. आरके गुप्ता को उनके पिता ने जमीन बेची जरूर थी, लेकिन वह भूखंड कहीं और है।
डॉ. गुप्ता की जमीन जहां हो उसे दान करें या अपने पास रखें। दूसरे की जमीन पर हवाई किला बनाने की जरूरत नहीं है। बेहतर होता कि मेयर पहले दस्तावेजों की जांच करवातीं उसके बाद भूमि का निरीक्षण करने पहुंचतीं।