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Dehradun News: मौसम की मार...नहीं बढ़ पा रहा लीची और आम का आकार
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मौसम के बदलाव ने लीची और आम के आकार को छोटा कर दिया है। समय पर बारिश न होने और अब भीषण गर्मी के कारण लीची और आम का दाना मई आखिर में तक सामान्य की तुलना में छोटा है। इससे फलों की गुणवत्ता गिर गई है। इससे बागवान परेशान हैं। गर्मी से पेड़ों में ही लीची के दाने फटने और गिरने की शिकायत आने लगी है। उधर, उद्यान विभाग के अधिकारी बागवानों को लगातार सिंचाई करने की सलाह दे रहे हैं।
जिले में इस साल लीची और आम के पेड़ों पर अच्छा बौर था। जिन पेड़ों पर अरसे से बौर नहीं आया था वो पेड़ भी लदे दिखाई दिए। इससे बागवान उत्पादन बढ़ने की उम्मीद से काफी उत्साहित थे। लेकिन, मौसम की मार ने किसानों के उत्साह ठंडा कर दिया है। प्रचंड गर्मी होने से लीची और आम का दाना सामान्य से छोटा रह गया है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि जिले में 602.74 हेक्टेयर में 6668 किसान लीची की बागवानी कर रहे हैं। इनमें कलकतिया, रोज सेंटेड और अर्ली बेदाना प्रमुख प्रजाति हैं।
विकासनगर, लांघा, सहसपुर-झाझरा, डोईवाला, रायवाला हरर्बटपुर, थानो, कालसी और मालदेवता आदि क्षेत्रों में लीची की बागवानी होती है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक इस बार बारिश न होने और गर्मी अधिक होने से लीची का आकार मई आखिर तक सामान्य के अपेक्षा काफी छोटा है। उधर, जिला उद्यान विभाग की ओर से सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को किसानों को बगीचों में लगातार सिंचाई करने और बोरेक्स का छिड़काव करने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। संवाद
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2915 हेक्टेयर में 6668 किसान कर रहे आम की बागवानी
जिले के विकासनगर, डोईवाला, सहसपुर, रायपुर और लांघा आदि क्षेत्रों में 2915 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर आम की बागवानी है। इससे 6668 किसान जुड़े हैं। जिले में दशहरी, सफेदा, चौसा और रामकेला प्रजाति की प्रमुखता से बागवानी है। आम की फसल अब तैयार होने के नजदीक है। 10 जून के बाद मंडी में आम की आवक शुरू हो जाएगी। उद्यान विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी विक्रम धानू बताया ने बताया कि सामान्यतौर पर रामकेला 150 ग्राम, चौसा और सफेदा एक से डेढ़ किलोग्राम, दशहरी 150 से 200 ग्राम वजन का फल होता है। लेकिन इस बार सभी प्रजाति के फलों का आकार छोटा रह गया है। गर्मी के कारण ऐसा हुआ है।
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1.5 से दो इंच आकार के लीची को माना जाता है बेहतर
उद्यान विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी विक्रम धानू ने बताया कि लीची का फल 20 ग्राम वजन या 1.5 से दो इंच आकार को सबसे बेहतर होता है। लेकिन इस बार बारिश न होने और लगातार तापमान बढ़ने से लीची का आकार इस समय जो होना चाहिए उसकी अपेक्षा छोटा दिखाई दे रहा है। इस बार कुछ किस्मों की तोड़ 10 जून और शेष किस्मों की जुलाई से शुरू होगी।
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तापमान वृद्धि के कारण इस बार अभी तक लीची और आम के दाने का आकार सामान्य की अपेक्षा छोटा है। किसान लगातार बगीचों की सिंचाई और पेड़ों पर स्प्रे करते रहें। इससे फलों का गिरना कम होगा। इससे फलों के फटने की संभावना कम और फल के रंग का विकास होगा। - एमपी शाही, मुख्य उद्यान अधिकारी, देहरादून
जिले में इस साल लीची और आम के पेड़ों पर अच्छा बौर था। जिन पेड़ों पर अरसे से बौर नहीं आया था वो पेड़ भी लदे दिखाई दिए। इससे बागवान उत्पादन बढ़ने की उम्मीद से काफी उत्साहित थे। लेकिन, मौसम की मार ने किसानों के उत्साह ठंडा कर दिया है। प्रचंड गर्मी होने से लीची और आम का दाना सामान्य से छोटा रह गया है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि जिले में 602.74 हेक्टेयर में 6668 किसान लीची की बागवानी कर रहे हैं। इनमें कलकतिया, रोज सेंटेड और अर्ली बेदाना प्रमुख प्रजाति हैं।
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विकासनगर, लांघा, सहसपुर-झाझरा, डोईवाला, रायवाला हरर्बटपुर, थानो, कालसी और मालदेवता आदि क्षेत्रों में लीची की बागवानी होती है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक इस बार बारिश न होने और गर्मी अधिक होने से लीची का आकार मई आखिर तक सामान्य के अपेक्षा काफी छोटा है। उधर, जिला उद्यान विभाग की ओर से सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को किसानों को बगीचों में लगातार सिंचाई करने और बोरेक्स का छिड़काव करने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। संवाद
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2915 हेक्टेयर में 6668 किसान कर रहे आम की बागवानी
जिले के विकासनगर, डोईवाला, सहसपुर, रायपुर और लांघा आदि क्षेत्रों में 2915 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर आम की बागवानी है। इससे 6668 किसान जुड़े हैं। जिले में दशहरी, सफेदा, चौसा और रामकेला प्रजाति की प्रमुखता से बागवानी है। आम की फसल अब तैयार होने के नजदीक है। 10 जून के बाद मंडी में आम की आवक शुरू हो जाएगी। उद्यान विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी विक्रम धानू बताया ने बताया कि सामान्यतौर पर रामकेला 150 ग्राम, चौसा और सफेदा एक से डेढ़ किलोग्राम, दशहरी 150 से 200 ग्राम वजन का फल होता है। लेकिन इस बार सभी प्रजाति के फलों का आकार छोटा रह गया है। गर्मी के कारण ऐसा हुआ है।
1.5 से दो इंच आकार के लीची को माना जाता है बेहतर
उद्यान विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी विक्रम धानू ने बताया कि लीची का फल 20 ग्राम वजन या 1.5 से दो इंच आकार को सबसे बेहतर होता है। लेकिन इस बार बारिश न होने और लगातार तापमान बढ़ने से लीची का आकार इस समय जो होना चाहिए उसकी अपेक्षा छोटा दिखाई दे रहा है। इस बार कुछ किस्मों की तोड़ 10 जून और शेष किस्मों की जुलाई से शुरू होगी।
तापमान वृद्धि के कारण इस बार अभी तक लीची और आम के दाने का आकार सामान्य की अपेक्षा छोटा है। किसान लगातार बगीचों की सिंचाई और पेड़ों पर स्प्रे करते रहें। इससे फलों का गिरना कम होगा। इससे फलों के फटने की संभावना कम और फल के रंग का विकास होगा। - एमपी शाही, मुख्य उद्यान अधिकारी, देहरादून