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'देश ही नहीं विदेश में भी बज रहा मोदी का डंका'
अमर उजाला, विकासनगर/देहरादून
Updated Sun, 15 Dec 2013 10:40 AM IST
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देहरादून में मोदी की शंखनाद रैली को सफल बनाने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं ने विकासनगर में रथ यात्रा निकाली।
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हर वर्ग का व्यक्ति भाजपा के पक्ष में
इस रथ यात्रा में राज्यसभा सांसद भगत सिंह कोश्यारी, टिहरी सांसद राज्यलक्ष्मी शाह, पूर्व विधायक मुन्ना सिंह चौहान शामिल हुए। कालसी गेट से शुरू हुई यात्रा हरिपुर, बाड़वाला, डाकपत्थर, विकासनगर, हरबर्टपुर, सहसपुर होते हुए सेलाकुई में संपन्न हुई।
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कार्यकर्ताओं ने लोगों से रैली में शामिल होने का आह्वान किया। यात्रा के दौरान कोश्यारी ने कहा कि देश के साथ विदेश में भी मोदी का डंका बज रहा है। हर वर्ग का व्यक्ति भाजपा के पक्ष में खड़ा है।
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रैली में सहसपुर विधायक सहदेव पुंडीर, पूर्व विधायक कुलदीप कुमार, भाजयुमो के जिलाध्यक्ष नवीन ठाकुर, सुखदेव फरस्वाण, विनोद लक्खा, राजकुमार रोहिला, पीयूष गुप्ता, राजकुमारी फरासी, वंदना ठाकुर, रितेश, धमेंद्र ठाकुर, वीरेंद्र सिंह बॉबी, मूरतराम शर्मा, शूरवीर तोमर समेत कई लोग शामिल रहे।
रथ यात्रा से लगा जाम
भाजपा की रथ यात्रा लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी। डाकपत्थर तिराहे के बीचों बीच कार्यकर्ता रथ यात्रा की अगुवानी के लिए करीब आधा घंटे खडे़ रहे, जिस कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।
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रथ यात्रा के पहुंचते ही चौक पर जाम की स्थिति बन गई। पुलिस ने बमुश्किल यातायात सुचारु कराया। यात्रा के दौरान पूरे विकासनगर बाजार में जाम की स्थिति बनी रही।
निराशा के माहौल में चमत्कार का इंतजार
नरेंद्र मोदी की लहर ने देहरादून को गिरफ्त में ले लिया है। हर तरफ नमो-नमो की चर्चा है। समाजशास्त्रियों की मानें तो लोग किसी चमत्कार की उम्मीद कर रहे हैं।
निराशा ने आम आदमी के भीतर इस कदर घर कर लिया है कि उनकी यह उम्मीद बेमानी भी नहीं लगती। लेकिन उनका मानना है कि विकल्पहीनता की स्थिति में मोदी उन्हें बेशक तारणहार नजर आ रहे हों, लेकिन अगर उनकी उम्मीदें पूरी नहीं हुईं तो स्थिति अराजक भी हो सकती है।
एमकेपी पीजी कॉलेज में समाज शास्त्र की प्रवक्ता डा. रेनू सिंह का कहना है कि देश में दो बड़ी पार्टियां हैं। एक इस वक्त केंद्र पर काबिज है, लेकिन आम आदमी से जुड़े मुद्दों पर ढुल-मुल रवैये ने लोगों के भीतर अंधकार भर दिया है।
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यह सच है कि महंगाई, रोजगार जैसे मुद्दे कोई एक दिन में सुलझने वाले नहीं, लेकिन लोगों को उनकी उम्मीदों के सवाल पर कोई संतुष्टिदायक जवाब तक नहीं मिल रहा। कांग्रेस का दिल्ली चुनाव में हाल इसी असंतोष का परिणाम है।
एक आशा का संचार
वह अभी तक पीएम पद का उम्मीदवार तक घोषित नहीं कर पाई है। इस दृष्टि से मोदी के रवैये और उनकी एक अहम पद की तैयारी ने लोगों में एक आशा का संचार तो किया ही है।
जेवी कॉलेज सहारनपुर से सेवानिवृत्त समाज शास्त्री प्रो. आरडी जैन के मुताबिक मोदी और राहुल गांधी दोनों को एक स्तर पर प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा है, लेकिन लोगों को रिझाने के मामले में मोदी आगे हैं।
वह सहानुभूति हासिल करने की जगह युवाओं को रोजगार, विकास का रास्ता सुझाते नजर आते हैं। अर्थशास्त्री बेशक उनके बारे में कुछ भी राय रखें, लेकिन वह हताशा के माहौल में उम्मीद की किरण तो नजर आ ही रहे हैं।