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Diwali 2025: 20 या 21 कब मनाएं दिवाली? तारीख पर भ्रम के बीच जानिए क्या हैं विद्वानों के मत

Sun, 12 Oct 2025 06:44 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 12 Oct 2025 06:44 PM IST
सार

दिवाली को लेकर हर बार की तरह इस बार भी लोगों में भ्रम की स्थिति है। ऐसे में विद्वान अमावस्या तिथि और प्रदोष काल पर अलग-अलग मत दे रहे हैं।

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Diwali 2025 When should we celebrate Diwali on the 20th or 21st  Scholars differ on date Uttarakhand News
दिवाली - फोटो : पीटीआई

विस्तार

दीपावली 20 को है या 21 को इस पर बहस छिड़ी हुई है। विद्वान अलग-अलग मत दे रहे हैं। यही कारण है कि लोग भी दीपावली मनाने की तारीख तय नहीं कर पा रहे हैं। विद्वान अमावस्या तिथि और प्रदोष काल पर अलग-अलग मत दे रहे हैं।

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सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में अमावस्या तिथि की रात लक्ष्मी पूजन करना चाहिए। 20 अक्तूबर को प्रदोष काल 5:42 बजे से है। इस दिन प्रदोष काल में अमावस्या तिथि पूरी है लेकिन 21 अक्तूबर को अमावस्या तिथि 5:55 बजे समाप्त होगी। लक्ष्मी पूजा के लिए 20 अक्तूबर ही व्याप्त है। इसलिए 20 अक्तूबर को ही दीपावली का पर्व मनाया जाएगा।
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- आचार्य रमेश सेमवाल, अध्यक्ष उत्तरांखड ज्योतिष परिषद

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उत्तराखंड में लक्ष्मी पूजा और महालक्ष्मी व्रत अहम है। पुराणों में लिखा है कि मां घनघोर रात में आती हैं। 20 अक्तूबर को प्रदोष काल भी मिल रहा है। इसी दिन प्रदोष और अर्धरात्रि में अमावस्या दोनों मिल रहे है। इसके चलते 20 अक्तूबर को ही दीपावली का पर्व मनाया जाएगा।
- आचार्य पवन पाठक

अमावस्या प्रदोष काल में व्याप्त होना जरूरी है। 21 अक्तूबर को प्रदोष काल 14 मिनट पड़ रही है लेकिन इसका एक दंड यानी 24 मिनट होना जरूरी है। इसके कारण 20 अक्तूबर को दीपावली का पर्व मनाया जाना है। कई पंचाग में यही लिखा है।
- आचार्य राजेश बेंजवाल, तंत्रकुल के संस्थापक

21 को दीपावली मनाने के मत

अमावस्या की तिथि 20 अक्तूबर को 3:44 बजे शुरू होगी। दीपावली का पर्व अमावस्या में होता है। कोई भी कार्य में पितृ पूजन करते हैं। शास्त्र में दिन में किया जाता है। 21 अक्तूबर को उदय तिथि पड़ रही है। ऐसे में दीपावली का पर्व 21 अक्तूबर को ही मनाया जाएगा।
- सौरभ डोभाल, आचार्य श्री श्री आनंदमई आश्रम, रायपुर

धर्मशास्त्र निर्णय सिंधु के अनुसार महालक्ष्मी पूजन व दीपोत्सव प्रदोष काल अमावस्या एवं तंत्र-मंत्र साधना निशीथ काल में ही हो सकती है। 20 अक्तूबर को चतुर्दशी तिथि अपराह्न 3:45 बजे पर समाप्त हो रही है, उसके बाद अमावस्या 21 अक्तूबर को शाम 5:55 बजे तक है। अक्षांश और देशांतर में अंतर होने से पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित देश के अन्य भागों में दीपावली 20 अक्तूबर को मनाया जाना सही है लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित गढ़वाल और कुमाऊं मिलाकर पूरे उत्तराखंड में 20 अक्तूबर को छोटी दीपावली और 21 अक्तूबर को शाम 5:35 बजे से 8:14 बजे तक प्रदोष काल में महालक्ष्मी पूजन और दीपोत्सव का त्योहार मनाना शास्त्र सम्मत है।
- डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल, आचार्य उत्तराखंड ज्योतिष रत्न

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