{"_id":"6aaef32a146aea079504c3b6","slug":"disaster-management-10-master-trainers-to-be-prepared-in-every-district-now-dehradun-news-c-5-hld1006-1069832-2026-09-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"आपदा प्रबंधन : अब हर जिले में 10 मास्टर ट्रेनर होंगे तैयार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आपदा प्रबंधन : अब हर जिले में 10 मास्टर ट्रेनर होंगे तैयार
विज्ञापन
देहरादून। उत्तराखंड राज्य में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) के सहयोग से आपदा प्रबंधन के प्रशिक्षण कार्यक्रम व्यापक स्तर पर चलाए जाएंगे। इसके तहत प्रत्येक जिले में 10 मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे। यह निर्णय एनआईडीएम और उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के बीच बैठक में हुआ।
एनआईडीएम के निदेशक मधूप व्यास ने कहा कि उत्तराखंड भौगोलिक रूप से संवेदनशील राज्य है। यहां भूकंप, भूस्खलन, बाढ़ और वनाग्नि जैसी आपदाओं का खतरा बना रहता है। ऐसे में आपदा से पहले की तैयारी और प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए नियमित प्रशिक्षण आवश्यक है। बैठक में आपदा प्रबंधन में प्रभावी क्षमता विकास के लिए प्रशिक्षण, अभ्यास और अनुभव से सीखने पर जोर दिया गया।
प्रशिक्षण के साथ-साथ अभ्यास सत्र और व्यावहारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इसका उद्देश्य वास्तविक आपदा की स्थिति में प्रशिक्षित कार्मिकों को प्रभावी ढंग से कार्य करने में सक्षम बनाना है। विनोद कुमार सुमन ने कहा कि यूएसडीएमए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को विभागीय आवश्यकताओं और स्थानीय आपदा जोखिमों के अनुरूप तैयार करेगा। इस व्यवस्था का लक्ष्य एक ऐसी प्रशिक्षित मानवशक्ति तैयार करना है, जो आपदा के सभी चरणों में प्रभावी भूमिका निभा सके। बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने यूएसडीएमए के कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
विज्ञापन
प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा
प्रथम चरण में प्रत्येक जिले में 10 मास्टर ट्रेनर तैयार होंगे। इन मास्टर ट्रेनरों को आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद ये ट्रेनर अपने-अपने जिलों में संबंधित विभागों और हितधारकों को प्रशिक्षित करेंगे। राज्य स्तर पर भी मास्टर ट्रेनरों का एक प्रशिक्षित समूह तैयार होगा। यह समूह जिला स्तर के ट्रेनरों के प्रशिक्षण और मार्गदर्शन में सहयोग करेगा। बैठक में आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
विज्ञापन
एनआईडीएम के निदेशक मधूप व्यास ने कहा कि उत्तराखंड भौगोलिक रूप से संवेदनशील राज्य है। यहां भूकंप, भूस्खलन, बाढ़ और वनाग्नि जैसी आपदाओं का खतरा बना रहता है। ऐसे में आपदा से पहले की तैयारी और प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए नियमित प्रशिक्षण आवश्यक है। बैठक में आपदा प्रबंधन में प्रभावी क्षमता विकास के लिए प्रशिक्षण, अभ्यास और अनुभव से सीखने पर जोर दिया गया।
विज्ञापन
प्रशिक्षण के साथ-साथ अभ्यास सत्र और व्यावहारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इसका उद्देश्य वास्तविक आपदा की स्थिति में प्रशिक्षित कार्मिकों को प्रभावी ढंग से कार्य करने में सक्षम बनाना है। विनोद कुमार सुमन ने कहा कि यूएसडीएमए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को विभागीय आवश्यकताओं और स्थानीय आपदा जोखिमों के अनुरूप तैयार करेगा। इस व्यवस्था का लक्ष्य एक ऐसी प्रशिक्षित मानवशक्ति तैयार करना है, जो आपदा के सभी चरणों में प्रभावी भूमिका निभा सके। बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने यूएसडीएमए के कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
विज्ञापन
प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा
प्रथम चरण में प्रत्येक जिले में 10 मास्टर ट्रेनर तैयार होंगे। इन मास्टर ट्रेनरों को आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद ये ट्रेनर अपने-अपने जिलों में संबंधित विभागों और हितधारकों को प्रशिक्षित करेंगे। राज्य स्तर पर भी मास्टर ट्रेनरों का एक प्रशिक्षित समूह तैयार होगा। यह समूह जिला स्तर के ट्रेनरों के प्रशिक्षण और मार्गदर्शन में सहयोग करेगा। बैठक में आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी मौजूद थे।