{"_id":"6904d85c5af6ca4c0d097207","slug":"demand-is-increasing-availability-is-low-so-how-will-electricity-be-supplied-without-purchasing-it-dehradun-news-c-5-drn1043-823766-2025-10-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: फोटो- मांग बढ़ रही, उपलब्धता कम तो बिना खरीदे कैसे होगी बिजली आपूर्ति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: फोटो- मांग बढ़ रही, उपलब्धता कम तो बिना खरीदे कैसे होगी बिजली आपूर्ति
विज्ञापन
- 500 मेगावाट बिजली खरीद याचिका पर जनसुनवाई में बोले यूपीसीएल के अधिकारी
- तीनों निगमों ने एकसुर में प्रस्ताव को मंजूरी की पैरवी की, उद्योगों ने भी हां में हां मिलाई
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। प्रदेश में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसके सापेक्ष उपलब्धता कम है। ऐसे में बिना खरीदे बिजली की आपूर्ति कैसे होगी। इस सवाल के साथ यूपीसीएल ने नियामक आयोग से अनुरोध किया है कि उन्हें लघु अवधि के टेंडर के माध्यम से 500 मेगावाट बिजली खरीद की अनुमति दी जाए।
यूपीसीएल ने बीते दिनों इस बिजली खरीद के लिए आयोग से अनुमति मांगी थी। यह बिजली चार वर्ष के लिए खरीदी जानी है, जिसमें जिंदल पावर से 150 मेगावाट और पावर प्लस से 350 मेगावाट बिजली की खरीद शामिल है। नियामक आयोग ने इस पर उपभोक्ताओं से सुझाव मांगते हुए शुक्रवार को जनसुनवाई की। इसमें यूपीसीएल, यूजेवीएनएल, पिटकुल के अधिकारियों के साथ ही हितधारकों ने भी अपने सुझाव रखे।
नियामक आयोग में अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा और सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी ने जनसुनवाई की। यूपीसीएल प्रबंधन का तर्क था कि नियामक आयोग के निर्देशों के क्रम में दीर्घ अवधि और लघु अवधि टेंडर से खरीद के प्रयास किए जा रहे हैं। इस क्रम में ही उन्होंने 500 मेगावाट शॉर्ट टर्म खरीद का प्रस्ताव दिया था। इस मामले में आयोग के निर्देशों के तहत तीनों निगमों की क्वांटम एप्रूवल समेत सभी कवायद की गई हैं।
विज्ञापन
जनसुनवाई में उद्योग प्रतिनिधि मयंक दत्त ने कहा कि वह यूपीसीएल की इस मांग का समर्थन करते हैं। बस इसे घटाकर 300 मेगावाट किया जाए। वहीं, यूजेवीएनएल के अधिकारियों का कहना था कि उन्हें इस बिजली खरीद से कोई आपत्ति नहीं है। बस भविष्य में उनकी आने वाली परियोजनाओं के यूपीसीएल से पीपीए में उन्हें कोई परेशानी न हो। पिटकुल के अधिकारियों ने भी आयोग के समक्ष इस खरीद पर अनापत्ति जताते हुए अपनी सहमति दी। सुनवाई में आयोग के सचिव नीरज सती, निदेशक वित्त दीपक पांडे समेत कई अधिकारी भी मौजूद रहे। अब आयोग को इस पर फैसला लेना है।
-- -
बाजार से बिजली खरीद मजबूरी : यूपीसीएल एमडी
यूपीसीएल के एमडी अनिल कुमार ने कहा कि प्रदेश में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि वे भी बाजार से पांच प्रतिशत खरीद के पैरोकार हैं लेकिन मांग के सापेक्ष बेस लोड नहीं है। इससे आपूर्ति बड़ी चुनौती है। 2910 की उच्च मांग के सापेक्ष 519 मेगावाट की कमी थी। इस कारण ओवर ड्रॉ करना पड़ता है, जिससे पेनल्टी भी लगती है। जब हमारे पास बेस लोड नहीं होता तो हम लाचार हो जाते हैं। सौर ऊर्जा दिन में तो उपलब्ध है लेकिन शाम के बाद नहीं होती। बेस लोड ही नहीं होगा तो कम उपलब्धता के बीच आपूर्ति कैसे करें। उन्होंने आयोग से आपूर्ति सुचारू रखने के लिए इस बिजली खरीद की अनुमति का अनुरोध किया।
विज्ञापन
- तीनों निगमों ने एकसुर में प्रस्ताव को मंजूरी की पैरवी की, उद्योगों ने भी हां में हां मिलाई
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। प्रदेश में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसके सापेक्ष उपलब्धता कम है। ऐसे में बिना खरीदे बिजली की आपूर्ति कैसे होगी। इस सवाल के साथ यूपीसीएल ने नियामक आयोग से अनुरोध किया है कि उन्हें लघु अवधि के टेंडर के माध्यम से 500 मेगावाट बिजली खरीद की अनुमति दी जाए।
यूपीसीएल ने बीते दिनों इस बिजली खरीद के लिए आयोग से अनुमति मांगी थी। यह बिजली चार वर्ष के लिए खरीदी जानी है, जिसमें जिंदल पावर से 150 मेगावाट और पावर प्लस से 350 मेगावाट बिजली की खरीद शामिल है। नियामक आयोग ने इस पर उपभोक्ताओं से सुझाव मांगते हुए शुक्रवार को जनसुनवाई की। इसमें यूपीसीएल, यूजेवीएनएल, पिटकुल के अधिकारियों के साथ ही हितधारकों ने भी अपने सुझाव रखे।
विज्ञापन
नियामक आयोग में अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा और सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी ने जनसुनवाई की। यूपीसीएल प्रबंधन का तर्क था कि नियामक आयोग के निर्देशों के क्रम में दीर्घ अवधि और लघु अवधि टेंडर से खरीद के प्रयास किए जा रहे हैं। इस क्रम में ही उन्होंने 500 मेगावाट शॉर्ट टर्म खरीद का प्रस्ताव दिया था। इस मामले में आयोग के निर्देशों के तहत तीनों निगमों की क्वांटम एप्रूवल समेत सभी कवायद की गई हैं।
विज्ञापन
जनसुनवाई में उद्योग प्रतिनिधि मयंक दत्त ने कहा कि वह यूपीसीएल की इस मांग का समर्थन करते हैं। बस इसे घटाकर 300 मेगावाट किया जाए। वहीं, यूजेवीएनएल के अधिकारियों का कहना था कि उन्हें इस बिजली खरीद से कोई आपत्ति नहीं है। बस भविष्य में उनकी आने वाली परियोजनाओं के यूपीसीएल से पीपीए में उन्हें कोई परेशानी न हो। पिटकुल के अधिकारियों ने भी आयोग के समक्ष इस खरीद पर अनापत्ति जताते हुए अपनी सहमति दी। सुनवाई में आयोग के सचिव नीरज सती, निदेशक वित्त दीपक पांडे समेत कई अधिकारी भी मौजूद रहे। अब आयोग को इस पर फैसला लेना है।
बाजार से बिजली खरीद मजबूरी : यूपीसीएल एमडी
यूपीसीएल के एमडी अनिल कुमार ने कहा कि प्रदेश में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि वे भी बाजार से पांच प्रतिशत खरीद के पैरोकार हैं लेकिन मांग के सापेक्ष बेस लोड नहीं है। इससे आपूर्ति बड़ी चुनौती है। 2910 की उच्च मांग के सापेक्ष 519 मेगावाट की कमी थी। इस कारण ओवर ड्रॉ करना पड़ता है, जिससे पेनल्टी भी लगती है। जब हमारे पास बेस लोड नहीं होता तो हम लाचार हो जाते हैं। सौर ऊर्जा दिन में तो उपलब्ध है लेकिन शाम के बाद नहीं होती। बेस लोड ही नहीं होगा तो कम उपलब्धता के बीच आपूर्ति कैसे करें। उन्होंने आयोग से आपूर्ति सुचारू रखने के लिए इस बिजली खरीद की अनुमति का अनुरोध किया।