Dehradun: मैं हूं तिनका...जेल के बंदियों का सिग्नेचर ट्यून रिलीज, मिलिए इन कलाकारों से जिन्हें मिली नई पहचान
मैं हूं तिनका- शीर्षक की मन को छूती धुन को देश की जेलों पर काम कर रही तिनका तिनका फाउंडेशन की 7वीं वर्षगांठ के अवसर पर जेल रेडियो के यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया है। यह भारत का इकलौता ऐसा पॉडकास्ट है जो जेल सुधार को समर्पित है।
विस्तार
मैं हूं तिनका... देहरादून की सुद्दोवाला जेल के बंदियों का बनाया सिग्नेचर ट्यून रिलीज किया गया है। डॉ.सुचित नारंग, रोहित वर्मा और अरुण, ये वे कलाकार हैं जिन्होंने जेल में रहते हुए जेल के रेडियो के जरिए अपनी नई पहचान बनाने का संकल्प लिया है।
देहरादून की सुद्दोवाला जेल के इन तीन बंदियों ने देश की जेलों के नाम एक सिग्नेचर ट्यून बनाया है। मैं हूं तिनका- शीर्षक की मन को छूती धुन को देश की जेलों पर काम कर रही तिनका तिनका फाउंडेशन की 7वीं वर्षगांठ के अवसर पर तिनका-तिनका जेल रेडियो के यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया है। यह भारत का इकलौता ऐसा पॉडकास्ट है जो जेल सुधार को समर्पित है।
कौन हैं यह बंदी
यह बंदी उन 14 बंदियों की टीम में शामिल हैं जिन्हें 2021 में जेल रेडियो के रेडियो जॉकी के तौर पर प्रशिक्षित किया गया था। सुचित नारंग जेल में आने से पहले प्रतिष्ठित संगीतज्ञ थे और अपनी कला के लिए राष्ट्रपति से सम्मानित किए गए थे। 46 साल के सुचित नारंग साल 2018 से जेल में है और हवालाती हैं। 29 साल के अरुण कुमार ने राजनीति विज्ञान से ग्रेजुएशन की है। रोहित वर्मा की उम्र 36 साल है। वो जेल में आने से पहले जागरण में गाने गाता था और जेल में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन करता था। रोहित और अरुण दोनों ही 2016 में जेल में आए और सजायाफ्ता हैं।
सुचित नारंग, रोहित वर्मा और अरुण- इन तीनों ने मिलकर देहरादून जेल रेडियो की कमान संभाली है। तिनका हूं मैं- इस शीर्षक के गाने को इन्हीं तीनों ने रचा है। इसे गाया सुचित नारंग ने है और इसका ऑडियो संपादन तीनों ने मिलकर किया है। सुचित नेत्रहीन हैं लेकिन संगीत में पारंगत। संपादन का काम सुद्दोवाला जेल में ही हुआ है।
भारतीय जेल में एक नई पहल
दून जेल और तिनका तिनका के आपसी सहयोग से रिलीज की गई यह धुन का मकसद बंदियों की कला के लिए मंच प्रदान करना, देशभर के बंदियों को सकारात्मक कामों के लिए प्रेरित करना, बंदियों को कार्यकुशल बनाना और जेल सुधार के लिए भागीदारी करना है। यह सिग्नेचर ट्यून अब जेलों पर काम करने वाली संस्था तिनका तिनका फाउंडेशन की पहचान होगा। अक्तूबर, 2022 से इस परियोजना पर काम चल रहा था। तिनका तिनका फाउंडेशन और जिला जेल, उत्तराखंड ने बंदियों के सकारात्मक औऱ सृजनात्मक कामों को सामने लाने के लिए एक साझेदारी की है। इसके तहत सृजन की एक श्रृंखला तैयार की जाएगी। दिलचस्प बात यह भी है कि सिग्नेचर ट्यून का संपादन दून जेल में ही किया गया है।
अधिकारियों का सहयोग
इस अनूठी धुन को लाने में राज्य की जेल महानिरीक्षक विमला गुंज्याल, उपमहानिरीक्षक कारागार और देहरादून जेल के सीनियर सुपरिटेंडेंट दधिराम और जेलर पवन कोठारी का विशेष योगदान रहा है। इन तीनों ने उतराखंड की जेल में रेडियो को लाने में ऐतिहासिक पहल की है।
यूट्यूब पर हुआ रिलीज
जेल रेडियो का सिग्नेचर ट्यून तिनका तिनका प्रिजन रिफ़ार्मस के यूट्यूब चैनल- तिनका तिनका जेल रेडियो पर रिलीज किया गया है। यह फाउंडेशन का 65वां एपिसोड है।
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तिनका तिनका फाउंडेशन
तिनका तिनका फाउंडेशन की संस्थापक वर्तिका नन्दा ने 2019 में जिला जेल, आगरा और हरियाणा की जेलों में जेल रेडियो स्थापित किया है। वे जेल सुधारक हैं। तिनका तिनका भारतीय जेलों पर उनकी श्रृंखला है। वर्ष 2014 में वह भारत के राष्ट्रपति से स्त्री शक्ति पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं। जेलों पर उनके काम को दो बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी जगह मिली है। तिनका तिनका की टैगलाइन है- जेलों मे इंद्र्धनुष बनाने की कोशिश। भारतीय जेलों पर वर्तिका नन्दा के हालिया शोध को आईसीएसएसआर ने 'उत्कृष्ट' माना है। वे दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज में पत्रकारिता विभाग की प्रमुख हैं।