{"_id":"ac501836faef6158d2b30326cbe0f56c","slug":"dehradun-son-s-funeral","type":"story","status":"publish","title_hn":"देहरादून के लाल का अंतिम संस्कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देहरादून के लाल का अंतिम संस्कार
हरिद्वार/देहरादून/ब्यूरो
Updated Thu, 01 Aug 2013 07:45 AM IST
विज्ञापन
सीमा पर देश की रक्षा के दौरान शहीद देहरादून के लाल मनोज राणा का खड़खड़ी श्मशान घाट पर सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
विज्ञापन
ओल्ड राजपुर रोड(चंद्रलोक कालोनी) निवासी राइफलमैन मनोज राणा जम्मू-कश्मीर में 15 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे। शनिवार रात सरहद पर निगहबानी के दौरान वह पाकिस्तान की ओर से हुई गोलाबारी में शहीद हो गए थे।
बुधवार सुबह शव खड़खड़ी (हरिद्वार) श्मशान घाट लाया गया। यहां सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान एसपी सिटी जेएस भंडारी, खड़खड़ी चौकी प्रभारी महावीर सिंह रावत आदि भी उपस्थित रहे।
विज्ञापन
इससे पहले देहरादून स्थित शहीद के आवास में सुबह करीब पांच बजे पार्थिव लाया गया। शव को देखते ही परिजन उससे लिपटकर बिलखने लगे। इससे सारा माहौल गमगीन हो गया। सुबह से ही पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शनों के लिए लोगों का हुजुम राजपुर में उमड़ पड़ा।
विज्ञापन
हर कोई शहीद के पार्थिव शरीर के सामने सिर झुकाकर नमन करता दिखा। वहीं तीनों बहनें अपने इकलौते भाई के शरीर को देख बदहवास ही हो गई। छोटी बहन पिंकी और मां ऊषा राणा का रो-रोककर बुरा हाल था।
पार्थिक शरीर पहुंचने की सूचना मिलने के बाद मसूरी विधायक गणेश जोशी, इंटक के राष्ट्रीय सचिव हीरा सिंह बिष्ट ने भी शहीद के आवास पर पहुंचकर उनके पिता जीत सिंह राणा को ढांढस बंधाया।
वहीं शासन की ओर से एडीएम प्रताप सिंह शाह, एसडीएम सदर रामजीत शरण, एसओ राजपुर अमरजीत सिंह मौके पर पहुंचे।
सुबह करीब साढ़े आठ बजे चंद्रलोक कालोनी से राजपुर बस अड्डे तक पैदल शव यात्रा निकाली गई। इस दौरान रास्ते में लोगों ने अमर शहीद को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी ने भी शहीद को श्रद्घांजलि देते हुए परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
बिखर गए सपने
मनोज घर का एकमात्र लड़का था, जिसकी शादी के लिए घरवालों ने एक लड़की भी ढूंढ ली थी। 2 अगस्त को मनोज के छुट्टी पर घर आने का प्रोग्राम था, जिसमें उसकी सगाई भी होने वाली थी।
इसके लिए परिजनों ने तैयारी भी कर ली थी। मनोज की छुट्टी भी मंजूर हो गई थी, लेकिन उनकी शहादत के बाद सारे सपने बिखर गए।
तीन बहनों के इकलौते भाई थे मनोज
शहीद मनोज तीन बहनों के इकलौते भाई थे। उनकी दो बड़ी बहनों मंजू व पूनम की शादी हो चुकी है, जबकि तीसरी बहन पिंकी ने इसी साल बीए पास किया है।
शहंशाही इंटर कॉलेज से 12वीं करने के बाद मनोज ने डीएवी कॉलेज से ग्रेजुएशन में एडमिशन लिया था, इसी दौरान 2006 में वे आर्मी में भर्ती हो गए थे। उनके पिता जीत सिंह राणा भी कमर में चोट लगने के कारण घर पर ही रहते हैं।