शराब कांड : पैसे न होने पर भर्ती नहीं किया, चालक ने भी रात को रास्ते में उतारा, रेफर
- तीमारदारों और लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जताई नाराजगी, हंगामा
- दून अस्पताल प्रबंधन बोला, आरोपी एंबुलेंस चालक का नहीं चल रहा पता
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जहरीली शराब पीने से बीमार मरीज को पैसों के अभाव में इलाज नहीं मिल पाया। इतना ही नहीं पैसे न होने पर एंबुलेंस चालक ने भी रात को मरीज और उनके तीमारदारों को मसूरी मार्ग के जंगल में उतार दिया। इससे गुस्साए लोगों ने शनिवार को प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ दून अस्पताल में हंगामा कर दिया। हालत गंभीर होने पर मरीज को दून अस्पताल से एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया गया।
जहरीली शराब के सेवन से पीड़ित अंशु (उम्र 26 वर्ष) पुत्र देशराज की शुक्रवार रात करीब साढ़े 12 बजे हालत बिगड़ गई। आनन-फानन में तीमारदार उसे दून अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां आईसीयू न होने पर तीमारदार रात को ही उसे एंबुलेंस से मैक्स अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां अस्पताल प्रबंधन ने इलाज के खर्च के रूप में 50 हजार रुपये एडवांस में जमा कराने को कहा। पैसे न होने पर तीमारदार उसी एंबुलेंस से वापस मरीज को दून अस्पताल लाने लगे। तीमारदारों का आरोप है कि एंबुलेंस चालक ने इसके एवज में 1800 रुपये मांग लिए। पैसे न होने की बात कहने पर चालक और तीमारदारों में विवाद हो गया।
मरीज और तीमारदारों को मसूरी मार्ग पर जंगल वाले क्षेत्र में छोड़ दिया
आरोप है इस पर चालक ने मरीज और तीमारदारों को मसूरी मार्ग पर जंगल वाले क्षेत्र में छोड़ दिया। जबकि इनमें महिलाएं भी शामिल थी। किसी तरह परिजन मरीज को लेकर पथरिया पीर स्थित अपने घर लेकर पहुंचे। शनिवार दोपहर फिर हालत खराब होने पर परिजन अंशु को लेकर दून अस्पताल पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी। सरकारी सिस्टम से नाराजगी जताते हुए परिजनों और क्षेत्रवासियों ने अस्पताल में हंगामा कर दिया। लोग इससे नाराज थे कि पीड़ितों को इलाज भी नहीं मिल पा रहा है। बाद में अस्पताल प्रबंधन ने 108 के माध्यम से अंशु को ऋषिकेश एम्स के लिए रेफर कर दिया है।
अस्पताल में आईसीयू न होने के कारण 108 से अंशु को ऋषिकेश एम्स रेफर कर दिया है। तीमारदार जिस एंबुलेंस चालक पर रात को बीच मार्ग में उतारने के आरोप लगा रहे हैं वह चालक दून अस्पताल का था या 108 या निजी एंबुलेंस थी, इसका पता नहीं चल पा रहा है। इसका पता लगाया जा रहा है।
- डॉ. केके टम्टा, अधीक्षक, राजकीय दून मेडिकल अस्पताल