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Dehradun: जीआर रियलकॉन के खिलाफ एक करोड़ 71 लाख की आरसी जारी, समय पर फ्लैट नहीं देने पर रेरा ने सुनाया फैसला
Thu, 17 Nov 2022 10:26 PM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Thu, 17 Nov 2022 10:26 PM IST
सार
रेरा की एकल बेंच के सदस्य नरेश सी मठपाल के निर्देश पर प्राधिकरण सचिव मोहन सिंह बर्निया की ओर से जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि वह मेसर्स जीआर रियलकॉन प्राइवेट लिमिटेड से उक्त धनराशि वसूलने के साथी इसे उत्तराखंड भू-संपदा नियामक प्राधिकरण के खाते में जमा कराएं।
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रुपये(प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : istock
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विस्तार
उत्तराखंड भू-संपदा नियामक प्राधिकरण (रेरा) ने नामीगिरामी रियल एस्टेट कंपनी रियलकॉन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ एक करोड़ 71 लाख 88 हजार 24 सौ रुपये की आरसी जारी की है। यह कार्रवाई समय पर फ्लैट मुहैया नहीं कराने पर की गई है।
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रेरा की एकल बेंच के सदस्य नरेश सी मठपाल के निर्देश पर प्राधिकरण सचिव मोहन सिंह बर्निया की ओर से जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि वह मेसर्स जीआर रियलकॉन प्राइवेट लिमिटेड से उक्त धनराशि वसूलने के साथी इसे उत्तराखंड भू-संपदा नियामक प्राधिकरण के खाते में जमा कराएं। उत्तराखंड भू-संपदा नियामक प्राधिकरण के सदस्य नरेश सी मठपाल ने बताया कि सैफी अब्दुल ने मेसर्स जीआर रियलकॉन से फ्लैट बुक कराया था। कंपनी को धनराशि देने के बाद भी फ्लैट नहीं दिया गया। इस पर सैफी अब्दुल ने रेरा में वाद दायर किया।
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सुनवाई के बाद रेरा ने उक्त कार्रवाई की है। प्राधिकरण के सदस्य नरेश सी मठपाल के मुताबिक मूलधन जो एक करोड़ तीन लाख 82 हजार 613 रुपये है। उस पर साढ़े नौ फीसदी वार्षिक ब्याज की दर से 31 अक्तूबर 2022 तक कंपनी को 67 लाख, पांच 411 रुपये का ब्याज देना होगा। इतना ही नहीं मेसर्स जीआर रियलकॉन प्राइवेट लिमिटेड को रेरा को भी एक लाख रुपये की पेनाल्टी देनी होगी।
आदेश के मुताबिक कंपनी को एक नवंबर 2022 से वसूली किए जाने की तिथि तक प्रतिदिन 2645 रुपये की दर से अतिरिक्त ब्याज भी देना होगा। बता दें कि मेसर्स जीआर रियलकॉन प्राइवेट लिमिटेड का रजिस्टर्ड कार्यालय प्रीत विहार विकास मार्ग नई दिल्ली में है। जबकि परियोजना स्थल कार्यालय देहरादून के सिक्का किमाया ग्रीन्स आईटी पार्क सहस्त्रधारा रोड पर है। दूसरी ओर आदेशों के संबंध में जब कंपनी अधिकारियों से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई तो संपर्क नहीं हो पाया।