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Dehradun: चिंताजनक...राजधानी में केवल 6% बचे हरियाली वाले इलाके, हर तरफ उगे कंक्रीट का जंगल

Tue, 11 Apr 2023 05:13 PM IST
अलका त्यागी अश्वनी त्रिपाठी, अमर उजाला, देहरादून
अश्वनी त्रिपाठी, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 11 Apr 2023 05:13 PM IST
सार

प्राधिकरण नए मास्टरप्लान लागू होने के बाद ऐसे भवनों को चिन्हित करेगा, जो पार्क, बगीचे या ग्रीन बेल्ट में बना दिए गए हैं।

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Dehradun News: Only 6 Percent green areas left in City concrete jungle growing everywhere
हरियाली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम आधारित दून का मास्टर प्लान सार्वजनिक कर दिया है। इसमें री-क्रियेशन (हरियाली) के लिए शहर के कुल विकसित क्षेत्र का 5.98 फीसदी स्थान चिन्हित किया गया है। यानि, पार्क, बाग, बगीचे और हरियाली के लिए कुल क्षेत्र का करीब छह फीसदी स्थान चिन्हित हुआ जबकि एक अच्छे शहर में यह पैमाना 18 फीसदी है। अब प्राधिकरण नए मास्टरप्लान लागू होने के बाद ऐसे भवनों को चिन्हित करेगा, जो पार्क, बगीचे या ग्रीन बेल्ट में बना दिए गए हैं।

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इन पर जुर्माना लगाया जाएगा। नए मास्टर प्लान के अनुसार, शहर में कुल विकसित क्षेत्र 17916 हेक्टेयर है जबकि हरियाली के लिए चिन्हित किया गया क्षेत्र महज 1071 हेक्टेयर है। मानक के अनुसार, यह विकसित क्षेत्र का 18 प्रतिशत अर्थात 3224 हेक्टयर होना चाहिए। इस क्षेत्र में बाग-बगीचे, नर्सरी, खुला स्थान और पार्क शामिल होने चाहिए। लेकिन, पिछले एक दशक में यहां हरियाली का जमकर गला घोंटा गया। पार्कों की जमीनों पर भवन बना दिए गए। पेड़ों को काटकर कंक्रीट के जंगल खड़े होते गए। इस तरह पिछले दस साल में हरियाली के लिए चिन्हित 2152 हेक्टेयर जगह गायब हो गई।

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यह है मास्टर प्लान

महानगरीय क्षेत्र                          58.43 प्रतिशत
मिश्रित एरिया                             9.33 प्रतिशत
कामर्शियल एरिया                       4.28 प्रतिशत
औद्योगिक क्षेत्र                           1.07 प्रतिशत
पब्लिक एंड सेमी पब्लिक एरिया    9.42 प्रतिशत
हरियाली                                   5.98 प्रतिशत
ट्रांसपोर्टेशन                             11.15 प्रतिशत
पर्यटन                                     0.34 प्रतिशत

अफॉर्डेबल हाउसिंग के लिए प्रस्ताव

2041 तक महानगर में सभी को छत दिलाने की चुनौती होगी। सभी के लिए भूखंड मिलना बेहद कठिन होगा। इस स्थिति को देखते हुए एमडीडीए ने अफॉर्डेबल हाउसिंग के लिए अलग से क्षेत्र चिन्हित किया है। इसमें सस्ते आवास, प्रधानमंत्री आवास, मलिन बस्ती को शामिल किया जाएगा।

अब कब्जा नहीं पाएंगे नदी-नाले

देहरादून में नदियों और नहरों की जमीनों पर कब्जे कर हजारों की संख्या में मकान बना लिए गए लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा। पहली बार एमडीडीए ने नदियों और नहरों को सुरक्षित करने के लिए उनके दोनों ओर ग्रीन कॉरिडोर बना दिए हैं। आवासीय क्षेत्र ग्रीन कॉरिडेार के एक तरफ ही रहेगा। ग्रीन कॉरिडोर में पहुंचते ही उसे चिन्हित कर लिया जाएगा और कार्रवाई की जाएगी।

85 फीसदी बस चुका है शहर

नए मास्टर प्लान में महानगरीय क्षेत्र को 58.43 प्रतिशत तक किया गया है जबकि वास्तव में यह 85 फीसदी तक पहुंच चुका है। एमडीडीए के पास इस बार विस्तार की अधिक गुंजाइश नहीं थी। फिर भी एमडीडीए ने क्षेत्र विस्तार करते हुए महानगरीय क्षेत्र को 58.43 प्रतिशत तक कर दिया है।

औद्योगिक क्षेत्र का नहीं दिया प्रपोजल

शहर में नए औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार की कोई संभावना नहीं थी। इसलिए, यहां पर नए औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार का कोई प्रस्ताव नहीं रखा गया। इसके लिए 1.07 प्रतिशत क्षेत्र ही चिन्हित किया गया है।

नए मास्टर प्लान में महानगर की आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न श्रेणियों में क्षेत्रफल चिन्हित किया गया है। इस पर आपत्तियों को भी आमंत्रित किया गया है। जल्द आपत्तियों को निस्तारित कर मास्टर प्लान को अमल में लाया जाएगा।
- बंशीधर तिवारी, उपाध्यक्ष, एमडीडीए

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