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चाइनीज को बाय-बाय, छाएंगी लोकल झालरें, 15 अगस्त को तिरंगा झालरों से टिमटिमाएंगे सरकारी भवन
Thu, 30 Jul 2020 03:41 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
सुनीत द्विवेदी, अमर उजाला, देहरादून
सुनीत द्विवेदी, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Thu, 30 Jul 2020 03:41 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Social Media
आमतौर पर 15 अगस्त और 26 जनवरी समेत अन्य प्रमुख त्योहारों पर सरकारी भवन चाइनीज झालरों की रोशनी से जगमगाते हैं। लेकिन, इस बार सीन दूसरा होगा। 15 अगस्त को ज्यादातर सरकारी भवनों पर सेल्फ हेल्प ग्रुप द्वारा बनाई गई देसी झालरें लगाई जाएंगी। दीवाली पर इस ग्रुप के बने झालर बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। यह अभिनव पहल सीडीओ नीतिका खंडेलवाल की तरफ से की गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की कड़ी में सीडीओ ने 27 सेल्फ हेल्प ग्रुप की 117 महिलाओं को देसी झालरें बनाने के लिए बीते दिनों ट्रेनिंग दी थी। इनमें से 45 महिलाएं प्रोडक्शन में लगी हुई हैं। अगले कुछ दिनों में कई महिलाओं को और शामिल किया जाएगा। अब तक 16 मीटर लेंथ की करीब 1000 देसी झालरें बनाई जा चुकी हैं।
जिन्हें 15 अगस्त को सरकारी बिल्डिंगों पर लगाने की योजना है। सीडीओ नितिका खंडेलवाल ने केसरिया, सफेद और हरे रंग की लाइटें लगी होने के चलते इन झालरों को तिरंगा नाम दिया गया है। अब यह कहना गलत नहीं होगा कि इस स्वतंत्रता दिवस पर सरकारी भवनों पर लगने वाली चाइनीज झालरों को बाय-बाय किया जाएगा।
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दीवाली पर भी मचाएंगी धमाल
महिलाओं के समूह की ओर से बनाई गई झालरें दीवाली पर धमाल मचाएंगी। पिछले पांच-सात सालों से मार्केट पर चाइनीज झालरों का कब्जा है। लेकिन, अब चीन से चल रही तनातनी के चलते प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया पर जोर देते हुए आत्मनिर्भर भारत का आह्वान किया है। यह उसी पहल का हिस्सा है। महिलाओं को थानो स्थित एलईडी ग्रोथ सेंटर में ट्रेनर कमलप्रीत और राजवीर की ओर से ट्रेनिंग दी जा रही हैं।
सस्ती होंगी देसी झालरें
सेल्फ हेल्प ग्रुप की ओर से बनवाई जा रही देसी झालरों की कीमत चाइनीज झालरों के आसपास रखने की योजना है। अभी इसके मूल्य को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है। दीवाली से पहले इनके दाम तय हो जाएंगे। यह झालरें चाइनीज झालरों की तुलना में अधिक ड्यूरेबल होने के चलते लोगों का पसंद आने की पूरी उम्मीद है। चाइनीज झालर एक सीजन के बाद सुरक्षित रखने पर दूसरे सीजन में नहीं चलती हैं। जबकि इसमें स्थिति उलट है। यह केवल एक बार नहीं कई साल तक इस्तेमाल हो सकेंगी।
देसी झालर की खासियत
- इन झालरों को आसानी से रिपेयर किया जा सकता है।
- इनके बल्ब कवर और तार मार्केट में आसानी से उपलब्ध हैं।
- इन झालरों में अच्छी क्वालिटी का तार उपयोग किया गया है।
- इन झालरों की बिजली खपत भी चाइनीज झालरों के बराबर है।
सेल्फ हेल्प ग्रुप को झालर बनाने की ट्रेनिंग का मकसद उनके अंदर स्किल डेवलप करना है। ताकि उन्हें आसानी रोजगार मिल सके। तिरंगा झालर इसी का एक हिस्सा है। ग्रुप ने इसको लेकर काफी मेहनत की, जिसका रिजल्ट हमारे सामने है। आगे भी इस तरह के प्रयोग जारी रखे जाएंगे।
- नीतिका खंडेलवाल, सीडीओ
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की कड़ी में सीडीओ ने 27 सेल्फ हेल्प ग्रुप की 117 महिलाओं को देसी झालरें बनाने के लिए बीते दिनों ट्रेनिंग दी थी। इनमें से 45 महिलाएं प्रोडक्शन में लगी हुई हैं। अगले कुछ दिनों में कई महिलाओं को और शामिल किया जाएगा। अब तक 16 मीटर लेंथ की करीब 1000 देसी झालरें बनाई जा चुकी हैं।
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जिन्हें 15 अगस्त को सरकारी बिल्डिंगों पर लगाने की योजना है। सीडीओ नितिका खंडेलवाल ने केसरिया, सफेद और हरे रंग की लाइटें लगी होने के चलते इन झालरों को तिरंगा नाम दिया गया है। अब यह कहना गलत नहीं होगा कि इस स्वतंत्रता दिवस पर सरकारी भवनों पर लगने वाली चाइनीज झालरों को बाय-बाय किया जाएगा।
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दीवाली पर भी मचाएंगी धमाल
महिलाओं के समूह की ओर से बनाई गई झालरें दीवाली पर धमाल मचाएंगी। पिछले पांच-सात सालों से मार्केट पर चाइनीज झालरों का कब्जा है। लेकिन, अब चीन से चल रही तनातनी के चलते प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया पर जोर देते हुए आत्मनिर्भर भारत का आह्वान किया है। यह उसी पहल का हिस्सा है। महिलाओं को थानो स्थित एलईडी ग्रोथ सेंटर में ट्रेनर कमलप्रीत और राजवीर की ओर से ट्रेनिंग दी जा रही हैं।
सस्ती होंगी देसी झालरें
सेल्फ हेल्प ग्रुप की ओर से बनवाई जा रही देसी झालरों की कीमत चाइनीज झालरों के आसपास रखने की योजना है। अभी इसके मूल्य को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है। दीवाली से पहले इनके दाम तय हो जाएंगे। यह झालरें चाइनीज झालरों की तुलना में अधिक ड्यूरेबल होने के चलते लोगों का पसंद आने की पूरी उम्मीद है। चाइनीज झालर एक सीजन के बाद सुरक्षित रखने पर दूसरे सीजन में नहीं चलती हैं। जबकि इसमें स्थिति उलट है। यह केवल एक बार नहीं कई साल तक इस्तेमाल हो सकेंगी।
देसी झालर की खासियत
- इन झालरों को आसानी से रिपेयर किया जा सकता है।
- इनके बल्ब कवर और तार मार्केट में आसानी से उपलब्ध हैं।
- इन झालरों में अच्छी क्वालिटी का तार उपयोग किया गया है।
- इन झालरों की बिजली खपत भी चाइनीज झालरों के बराबर है।
सेल्फ हेल्प ग्रुप को झालर बनाने की ट्रेनिंग का मकसद उनके अंदर स्किल डेवलप करना है। ताकि उन्हें आसानी रोजगार मिल सके। तिरंगा झालर इसी का एक हिस्सा है। ग्रुप ने इसको लेकर काफी मेहनत की, जिसका रिजल्ट हमारे सामने है। आगे भी इस तरह के प्रयोग जारी रखे जाएंगे।
- नीतिका खंडेलवाल, सीडीओ