सात साल बाद: परिवार के चार लोगों का कत्ल करने वाला हरमीत दोषी करार, संपत्ति के लिए उतारा था मौत के घाट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 04 Oct 2021 11:10 PM IST

सार

हत्याकांड 23-24 अक्तूबर 2014 को कैंट थाना क्षेत्र के आदर्शनगर में हुआ था। अपर जिला जज पंचम आशुतोष मिश्रा की अदालत में सजा पर मंगलवार को बहस होगी। 
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कोर्ट - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार

देहरादून में सात साल पहले दीवाली की रात परिवार के चार सदस्यों को बेरहमी से कत्ल करने वाले हरमीत को न्यायालय ने दोषी करार दिया है। हत्याकांड में हरमीत की बहन के गर्भ में पल रहे बच्चे की भी मौत हो गई थी। अपर जिला जज पंचम आशुतोष मिश्रा की अदालत में सजा पर मंगलवार को बहस होगी। 
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शासकीय अधिवक्ता राजीव गुप्ता ने बताया कि हत्याकांड 23-24 अक्तूबर 2014 को कैंट थाना क्षेत्र के आदर्शनगर में हुआ था। यहां होर्डिंग कारोबारी जय सिंह का मकान है। इस मकान में जय सिंह, उनकी पत्नी कुलवंत कौर, बेटी हरजीत कौर, नातिन सुखमणि (तीन साल), नाती कंवलजीत सिंह (पांच साल) और बेटा हरमीत (जय सिंह की पहली पत्नी का बेटा) रहते थे। दीवाली से अगले दिन घर के अंदर से कोई बाहर नहीं निकला था। कुछ देर बाद वहां नौकरानी राजी पहुंची तो उसने देखा कि घर में खून फैला हुआ था। वह अंदर गई तो वहां हरजीत कौर, सुखमणि, जय सिंह और कुलवंत कौर के लहुलूहान शव पड़े थे। दरवाजे की ओट में हाथ में चाकू लिए हरमीत खड़ा था। पास में ही पांच साल का कंवलजीत भी डरा सहमा खड़ा था।


उसके हाथों में भी घाव थे। यह सब नजारा देखकर वह चिल्लाती हुई बाहर आई। आसपास के लोग भी वहां इकट्ठा हो गए। पास में रहने वाले जय सिंह के भाई अजीत सिंह आए और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने तत्काल मौके से हरमीत को मय आला कत्ल (चाकू) के गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने तीन माह बाद हरजीत के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। कुछ समय बाद मुकदमे का ट्रायल सेशन कोर्ट में शुरू हुआ। इस मुकदमे में वादी की ओर से अधिवक्ता बीडी झा भी शामिल रहे। मुकदमे में कुल 21 गवाह पेश हुए। इन्हीं के आधार पर हरमीत सिंह को आईपीसी की धारा 302 (हत्या), धारा 307 (हत्या का प्रयास) और 316 (गर्भस्थ शिशु की हत्या करना) में दोषी ठहराया गया। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि मंगलवार को कोर्ट में सजा पर बहस होगी। 

फांसी हो तभी मिलेगी आत्मा को शांति : अजीत सिंह 
मुकदमा जय सिंह के भाई अजीत सिंह ने दर्ज कराया था। उन्होंने बताया कि उनके कलेजे को ठंडक मंगलवार को पड़ेगी। हरमीत को फांसी की सजा होनी चाहिए। फांसी की सजा के बाद ही मेरे परिवार की आत्मा को शांति मिलेगी। अजीत के अनुसार वह इन सात साल में हर रोज घर को देखकर रोते हैं। 

घटना के बाद से बंद है घर 
कारोबारी जय सिंह के मकान में हत्याकांड के बाद से ही ताला लगा दिया गया था। अजीत सिंह के परिवार ने एक बार इसकी सफाई कराई थी। उसके बाद से वहां कोई नहीं गया है। सात साल से मकान जस का तस पड़ा हुआ है। 

संपत्ति के लिए किया था कत्ल

हरमीत ने इस जघन्य हत्याकांड को संपत्ति के लिए अंजाम दिया था। यह बात अभियोजन कोर्ट में साबित करने में सफल रहा। हरमीत ने पकड़े जाने के बाद खुद को दिमागी रूप से बीमार भी बताया था, लेकिन चिकित्सकों की जांच में उसका यह दावा गलत साबित हुआ। 

दरअसल, कारोबारी जय सिंह की पहली पत्नी से दो बेटे थे। इनमें एक हरमीत और दूसरा पारस था। पारस अपनी मां के साथ रहता था। जय सिंह और उनकी पहली पत्नी ने तलाक ले लिया था। जय सिंह के भाई अजीत सिंह ने अपनी बेटी हरजीत को बचपन में ही उन्हें गोद दे दिया था। अजीत ने बताया था कि हरमीत ने पहले भी उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। ताकि, जय सिंह की सारी संपत्ति पर वह काबिज हो सके। कोर्ट में अजीत सिंह की यह गवाही से भी साबित हुआ कि हत्या के बाद हरमीत जय सिंह की संपत्ति काबिज करना चाहता था।

इन सबसे बचने के लिए हरमीत ने खुद को दिमागी रूप से बीमार बताया था। वह पहले कुछ बयान नहीं दे रहा था, लेकिन मनो चिकित्सकों से उसकी जांच कराई गई। अधिवक्ता राजीव गुप्ता ने बताया कि चिकित्सकों ने उसके इस दावे को झूठा साबित कर दिया। उसका कभी कहीं किसी मनो चिकित्सक या मनो वैज्ञानिक से इलाज नहीं चलाया गया था। 

चश्मदीद गवाह कंवलजीत की गवाही रही अहम 
हत्याकांड में बचा हरमीत का भांजा कंवलजीत चश्मदीद गवाह बना था। हरमीत ने उसकी छोटी बहन सुखमणि को उसके सामने ही चाकू से गोद दिया था। उसने कंवलजीत पर भी वार किए थे, लेकिन इस बीच किसी वजह से उसे दया आ गई और उसे छोड़ दिया। चूंकि, कंवलजीत खुद पीड़ित भी था, लिहाजा उसकी गवाही आरोपी को दोषी ठहराने में अहम साबित हुई। 

दीवाली की रात में पूरे मोहल्ले में आतिशबाजी हुई थी। रात में सभी ने इस आतिशबाजी में हिस्सा लिया था। इसके बाद जय सिंह व उनकी पत्नी एक कमरे में और हरजीत व उनके दोनों बच्चे एक कमरे में सोने के लिए चले गए। हरमीत ने पूरे परिवार के सोने का इंतजार किया था। इसके बाद उसने पहले अपने पिता और सौतेली मां को चाकू से गोदा था। इसके बाद दूसरे कमरे में हरजीत कौर और सुखमणि को मौत के घाट उतारा। इसी कमरे में कंवलजीत भी था। पांच साल का कंवलजीत ने वहां से भागने का प्रयास किया। हरमीत ने उसके हाथ पर भी चाकू से वार किया, लेकिन एकाएक वह रुक गया। पांच साल के कंवलजीत ने हत्याकांड के बाद पुलिस और कोर्ट में भी यही बयान दिए थे। हरमीत ही कंवलजीत से बहुत प्यार करता था। शायद उस वक्त उसने उसे इसी कारण मारने से छोड़ दिया। 

धार लगाने वाले ने भी हरमीत को पहचाना

हरमीत ने एक दिन पहले चाकू पर अंसारी मार्ग पर एक कारीगर से धार लगवाई थी। इस कारीगर परवेज आलम की भी मामले में गवाही हुई। आलम ने ने कोर्ट को बताया था कि जब वह उसके पास चाकू लेकर आया था तो उसे मना कर दिया गया था। इसके बाद जब उसने जबरदस्ती की तो चाकू पर धार लगा दी। परवेज आलम ने कोर्ट में भी उसकी पहचान की। इसके अलावा नौकरानी राजी ने भी गवाही दी। राजी ही सबसे पहले वहां पर पहुंची थी। उसे देखकर हरमीत ने कहा था कि आज काम नहीं कराएंगे, लेकिन जैसे ही उसने वहां का माहौल देखा तो वह चिल्लाकर बाहर आ गई। 

कोर्ट ने किए कुल 12 प्रश्न, खुद को बताया बेकसूर 
कोर्ट ने दोषी हरमीत से सोमवार को 12 प्रश्न किए। इनमें से ज्यादातर के जवाब उसने सही दिए, लेकिन हत्या की बात उसने कबूल नहीं की। इसके अलावा उसने अजीत सिंह द्वारा कही गई कुछ बातों की तस्दीक की। साथ ही साथ कई प्रश्नों में उसने जवाब गलत दिए।
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