Eye Donation: नेत्रदान की कमी से नहीं मिल रही कॉर्निया, बढ़ रही दृष्टिबाधितों की संख्या
देश में दृष्टिबाधितों की संख्या लाखों में और नेत्रदान करने वालों की संख्या हजारों में है। इस वजह से दृष्टिबाधा खत्म नहीं हो पा रही है।
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आंख की कॉर्निया खराब होने पर व्यक्ति को दिखना बंद हो जाता है। ऐसे में कॉर्निया ट्रांसप्लांट से ही आंख की रोशनी वापस आती है। यह तभी संभव है, जब कोई नेत्रदान करे। अभी नेत्रदान करने वालों की संख्या बहुत कम है। इस वजह से जिन लोगों की आंख की कॉर्निया खराब हो जाती हैं, उनकी आंखें नहीं बन पाती हैं।
दून मेडिकल कॉलेज, अस्पताल के नेत्ररोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुशील ओझा ने बताया कि देश में दृष्टिबाधितों की संख्या लाखों में और नेत्रदान करने वालों की संख्या हजारों में है। इस वजह से दृष्टिबाधा खत्म नहीं हो पा रही है। यही हाल जिले का भी है। रेटिना ब्लाइंडनेस, कॉर्नियल ब्लाइंडनेस और कैटरेक्स ब्लाइंडनेस में दिखना बंद हो जाता है। रेटिना ब्लाइंडनेस ठीक नहीं हो पाता है। वहीं, कॉर्नियल ब्लाइंडनेस कॉर्निया ट्रांसप्लांट से और कैटरेक्स ब्लाइंडनेस (सफेद मोतिया) ऑपरेशन के बाद लेंस डालने से ठीक हो जाता है।
गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय के नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. महेश खेतान ने बताया कि आंख में चोट लग जाए तो कॉर्नियल ब्लाइंडनेस हो सकता है। कई बार लोग खेतों में काम करते समय आंख में चोट लग जाती है। यह अंधेपन का कारण बन जाती है। चोट लगने पर जख्म ठीक हो जाता है, लेकिन आंख की कॉर्निया सफेद हो जाती है। ऐसे में व्यक्ति को दिखना बंद हो जाता है। इस सफेद कॉर्निया को हटाकर सामान्य कॉर्निया लगाना पड़ता है।
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केस 1
दून के 66 वर्षीय रामनरेश की आंख में चोट लग गई थी। आंख का शुरुआती उपचार किया गया। रोशनी हल्की हुई, लेकिन अब उन्हें देखना पूरी तरह से बंद हो गया है। रामनरेश को कॉर्निया ट्रांसप्लांट की सख्त जरूरत है।
केस 2
दून निवासी 46 वर्षीय कांति देवी खेती का काम करते समय आंख में लकड़ी लगने से चोट लग गई थी। उनकी आंख में रोशनी पूरी तरह से जा चुकी है। उन्हें भी कॉर्निया ट्रांसप्लांट की जरूरत है।
देश में सवा लाख लोग दृष्टिबाधा से जूझ रहे
डॉ. सुशील ओझा ने बताया कि देश में रोजाना लाखों लोगों की मौत हो रही है, लेकिन नेत्रदान सिर्फ हजारों में हो रहा है। पिछले वर्ष के आंकड़े देखें तो भारत में 25,000 कॉर्निया ट्रांसप्लांट किए गए और 50,000 अंधेपन के नए केस आ गए। अभी करीब सवा लाख लोग भारत में दृष्टिबाधित हैं।
दधीचि देहदान समिति के अध्यक्ष डॉ. मुकेश गोयल ने बताया कि उनकी संस्था बने 17 महीने हो चुके हैं। इसमें 200 लोग नेत्रदान कर चुके हैं। छह लोगों की मृत्योपरांत आंख की कॉर्निया ली जा चुकी है। उनकी कॉर्निया से दूसरे व्यक्ति दुनिया देख रहे हैं।
दून अस्पताल में जल्द खुलेगा आई ब्लड बैंक
दून अस्पताल में जल्द आई ब्लड बैंक शुरू होने वाला है। ऐसे में यहां पर कॉर्निया ट्रांसप्लांट भी हो सकेगा। अभी कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए मरीजों को ऋषिकेश एम्स जाना पड़ता है। दून के किसी सरकारी अस्पताल में आई ट्रांसप्लांट की सुविधा नहीं है। मृत्यु उपरांत छह से आठ घंटे के अंदर कॉर्निया लेना पड़ता है।