देहरादूनः डेंगू और वायरल के चलते दो माह में खप गई सात लाख से अधिक पैरासिटामॉल
- डेंगू और वायरल के चलते बढ़ी बेतहाशा मांग
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डेंगू और वायरल के प्रकोप के चलते दून के विभिन्न अस्पतालों में सात लाख से अधिक पैरासिटामॉल (पीसीएम) की गोलियां खपत हो गईं। इसके अलावा मेडिकल स्टोरों से थर्मामीटर की ब्रिकी में भी काफी इजाफा हुआ।
बता दें, दून में जुलाई से डेंगू ने कहर बरपाना शुरू कर दिया था। अगस्त और सितंबर में अस्पतालों में डेंगू मरीजों की संख्या में अचानक तेजी आई और मरीजों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो गई। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जुलाई, अगस्त और सितंबर में डेंगू मरीजों की संख्या चार हजार से अधिक रही।
इसके चलते पैरासिटामॉल, थर्मामीटर और आईवी फ्ल्यूड की ब्रिकी और खपत में जबरदस्त इजाफा हुआ। दून के तीन प्रमुख अस्पतालों दून मेडिकल कॉलेज, कोरोनेशन और गांधी शताब्दी अस्पताल में सिर्फ अगस्त, सितंबर में साढ़े सात लाख से अधिक पैरासिटामॉल की गोलियां खपत हो गईं।
सरकारी अस्पतालों में पैरासिटामॉल की खपत
दून अस्पताल : अगस्त में 1,88500, सितंबर में 271000 गोलियां
कोरोनेशन अस्पताल : अगस्त में 123300, सितंबर में 10000 गोलियां
गांधी शताब्दी अस्पताल : अगस्त में 50000, सितंबर में 60000
मेडिकल स्टोरों में दो गुनी बढ़ी ब्रिकी
केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष नवनीत मल्होत्रा ने बताया कि दून में करीब एक हजार के करीब मेडिकल स्टोर हैं। बीते दो माह में मेडिकल स्टोरों पर पैरासिटामॉल की बिक्री दो गुना रही। पहले जहां मेडिकल स्टोरों पर दो से तीन डिब्बे बिकते थे। वहीं अगस्त-सितंबर में यह संख्या चार से पांच रही। थर्मामीटरों की ब्रिकी में भी एक से डेढ़ गुना की बढ़ोतरी हुई।
डेंगू में पैरासिटामॉल ही मरीजों को अधिक तर लेने की सलाह दी जाती है। इसलिए इसकी खपत और ब्रिकी में इजाफा लाजमी है। वायरल आदि बुखार में भी पैरासिटामॉल ही लाभदायक होती है। इससे पैरासिटामॉल की मांग बढ़ जाती है।
- प्रवीन पंवार, वरिष्ठ फिजीशियन, गांधी शताब्दी अस्पताल