फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   dehradun master plan dispute

'एमडीडीए बना रहा है जंगल में होटल'

Tue, 03 Dec 2013 11:27 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 03 Dec 2013 11:27 PM IST
विज्ञापन
dehradun master plan dispute

राजधानी देहरादून में संशोधित मास्टर प्लान में परत दर परत खामियां सामने आ रही है। मौके पर गलत भू उपयोग दिखाने के कारण आम आदमी की परेशानियां एक बार फिर जस की तस बनी हुई नजर आ रही है।

विज्ञापन


इससे भविष्य में न केवल एमडीडीए अभियंताओं की उगाही बढ़ जाएगी बल्कि आम जनता को बेवजह चक्कर काटने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उत्तरांचल इंजीनियर्स एवं ड्राफ्टमैन वेलफेयर एसोसिएशन के अध्ययन में फिर कुछ नए मामले प्रकाश में आए है।
विज्ञापन


केस-1
मसूरी रोड पर एक होटल बन रहा है। एमडीडीए की ओर से इस होटल का मानचित्र भी पास है, लेकिन संशोधित मास्टर प्लान में इसे जंगल दिखाया गया है।

संशोधित मास्टर प्लान के अनुसार मौके पर एक ईट होटल मालिक नहीं रख सकता। एमडीडीए के अधिकारी भी कुछ नहीं कर सकते। उन्हें भी मास्टर प्लान के अनुसार होटल स्वामी के खिलाफ कार्रवाई करना पड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


केस-2
पुरुकुल गांव के पास लगभग 150 बीघे जमीन का भू उपयोग कृषि से बदलकर आवासीय कराया गया था। इसके लिए राजकीय कोष में शुल्क भी जमा किया गया, लेकिन संशोधित मास्टर प्लान में आज भी मौके पर कृषि दर्शाया गया है। ऐसे में मौके पर लेआउट पास कराने में परेशानी खड़ी हो सकती है।

केस-3
फूलसैनी के पास टिहरी विस्थापितों की एक पुरानी कालोनी है। यहां लगभग 100 से अधिक परिवार के लोग रहते है, लेकिन मास्टर प्लान के अनुसार उक्त भूमि पर खेती हो रही है।

हालांकि इन विस्थापितों को मानचित्र पास कराने की कोई बाध्यता नहीं है। इसके बावजूद भविष्य में परेशानी खड़ी हो सकती है।

केस-4
कारगी से जुड़े कुछ क्षेत्रों को तो राहत मिल गई है, लेकिन कारगी ग्रांट के तमाम इलाकों को आज भी राहत नहीं मिल पाई है।

आईएसबीटी की ओर से कारगी चौक से पहले वाले इलाकों को आज भी सरकारी और अर्धसरकारी क्षेत्र में दर्शाया गया है। जबकि, इन इलाकों में तेजी से कालोनियां बनाई जा रही है।

तकनीकी अफसर बताता था दांव पेंच
संशोधित मास्टर प्लान में फेरबदल करवाने के लिए एमडीडीए का एक तकनीकी अफसर पूरा दांव पेंच बताता रहा। यह वहीं अफसर है, जिसके सलाह पर 50 फीसदी से अधिक बदलाव मास्टर प्लान में किया गया।


यह अफसर नीली बत्ती वाली गाड़ी से भी संपर्क में था। इससे मास्टर प्लान का बेड़ा इतना अधिक गर्क हो गया है कि आम आदमी को एक दशक से अधिक समय तक एमडीडीए से लेकर शासन तक के चक्कर काटने के लिए भटकना पड़ेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed