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Dehradun: आयुष्मान कार्ड फर्जीवाड़ा; मुकदमा दर्ज, उपचार में खर्च 1.35 लाख मरीज से वसूलेगा दून अस्पताल

Mon, 01 Jun 2026 11:17 PM IST
Alka Tyagi संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Mon, 01 Jun 2026 11:17 PM IST
सार

मामले में आयुष्मान कार्ड किसी और का लगाया गया और उपचार किसी अन्य का किया गया। फाइल बंद होने के अंतिम पड़ाव पर यह मामला पकड़ में आ गया लेकिन तब तक मरीज की एंजियोप्लास्टी की जा चुकी थी।

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Dehradun Ayushman Card Fraud  Doon Hospital to Recover ₹1.35 Lakhs in Treatment Costs from Patient
दून अस्पताल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

दून अस्पताल में आयुष्मान फर्जीवाड़े के मामले में मरीज के इलाज में खर्च 1.35 लाख रुपये की वसूली की जाएगी। प्रबंधन के अनुसार आरोपी यह रकम देने के लिए तैयार है। सोमवार को इस मामले पर प्रबंधन की बैठकें होती रहीं।

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इस मामले में आयुष्मान कार्ड किसी और का लगाया गया और उपचार किसी अन्य का किया गया। फाइल बंद होने के अंतिम पड़ाव पर यह मामला पकड़ में आ गया लेकिन तब तक मरीज की एंजियोप्लास्टी की जा चुकी थी।
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मंजीत नामक व्यक्ति ने दिल की बीमारी बताते हुए उपचार के लिए अपना आयुष्मान कार्ड लगाया था। इसके बाद दिल के डॉक्टर के सामने दूसरे मरीज को लाया गया। डॉक्टर की सलाह में उसकी तमाम जांचे हुई और मरीज को भर्ती कर इलाज किया गया।
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जांच के लिए समिति गठित
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है। उन्होंने बताया कि यह मामला केवल किसी अन्य व्यक्ति के आयुष्मान कार्ड पर उपचार प्राप्त करने तक सीमित नहीं है बल्कि मरीजों की सुरक्षा, अधिकारों और चिकित्सा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर विषय है। तीन सदस्यीय समिति की अध्यक्षता मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. विवेकानंद सत्यवाली करेंगे। समिति में डॉ. वंदना बिष्ट और डॉ. पवनीश लोहान भी शामिल हैं। समिति को तीन कार्य दिवसों के भीतर जांच रिपोर्ट और सुधारात्मक सुझाव सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। प्राचार्य ने कहा कि समिति आयुष्मान लाभार्थी सत्यापन, फोटो मिलान, आधार-बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण और निगरानी तंत्र की विस्तृत समीक्षा करेगी।

मंजीत के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज, जांच शुरू
अपना आयुष्मान कार्ड लगाकर किसी दूसरे व्यक्ति का उपचार कराने मामले में अस्पताल प्रबंधन की तहरीर पर पुलिस ने मंजीत के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 26 मई को मंजीत सिंह निवासी गोविंदगढ़ ने कोर्डियोलॉजी विभाग में डॉ. सलील गर्ग की निगरानी में भर्ती होने के लिए अपना बायोमीट्रिक कराया। आरोप है कि इस दौरान उसने विक्की नामक मरीज को अपनी जगह भर्ती कराया और उसका उपचार करा दिया। उपचार पूरा होने के बाद 29 मई को मंजीत स्वयं आयुष्मान काउंटर पर पहुंचे लेकिन आयुष्मान मित्र की सक्रियता के चलते यह मामला पकड़ा गया। उसी समय आयुष्मान मित्र ने इसकी सूचना अस्पताल प्रबंधन को दी। इसके बाद जांच कराई गई। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। 

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