उत्तराखंड में बाढ़ की जद में हजारों लोग
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पिछले साल की आपदा की जद आए धारचूला के खोतिला कस्बे को बचाने के लिए सरकार एक साल बाद भी कोई इंतजाम नहीं कर पाई है।
तब महाकाली ने आवासीय भवनों तक की जमीन भी बहा दी थी। इस बार नदी का बहाव तेज होते ही खोतिला के 250 परिवारों के सिर पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है।
बाढ़ सुरक्षा के काम तक शुरू नहीं हुए हैं। कस्बे के 17 मकान कभी भी नदी के बहाव की चपेट में आ सकते हैं।
स्थानीय लोगों ने कई बार किया आंदोलन
खोतिला को बचाने के लिए बाढ़ सुरक्षा के काम शुरू न होने के खिलाफ पिछले साल स्थानीय लोगों ने कई बार आंदोलन किया, लेकिन सरकार और प्रशासन की नींद नहीं टूटी।
अब तक बाढ़ सुरक्षा के नाम पर एक पत्थर भी नहीं लगा है। ऐसा तब है जब निवर्तमान विधायक और प्रशासनिक अधिकारी हालात का जायजा ले चुके हैं।
नव निर्वाचित क्षेत्र पंचायत सदस्य विजय गर्ब्याल कहते हैं कि सरकार ने खोतिला के लोगों को आपदा प्रभावित ही नहीं माना है।
अब बरसात का सीजन शुरू
बताया गया कि नवंबर, दिसंबर 2013 में बाढ़ सुरक्षा के काम शुरू करने के लिए स्थानीय लोगों ने कई बार आंदोलन किया।
प्रशासन ने बाढ़ सुरक्षा के कामों के टेंडर लगवाने का आश्वासन दिया, लेकिन यह काम अब तक शुरू नहीं हुए हैं। कहते हैं कि बरसात का सीजन शुरू हो गया है।
तटबंध नहीं बने तो 17 मकान तो कभी भी बाढ़ में बह जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस अनदेखी के खिलाफ अब व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
खोतिला में बाढ़ सुरक्षा के काम के स्टीमेट बने है, टेंडर नहीं लग पाए हैं। सिंचाई विभाग से तत्काल टेंडर लगाने के लिए कहा जा रहा है।
- प्रमोद कुमार, एसडीएम धारचूला