दहेज की खातिर विवाहिता को जिंदा जलाया, मौत
दहेज की खातिर जिंदा जलाई गई औरंगाबाद की विवाहिता की देहरादून के कोरोनेशन अस्पताल में मौत हो गई है। सिडकुल पुलिस ने आरोपियों को दबोचने के लिए औरंगाबाद गांव में दबिश भी दी लेकिन कोई आरोपी हत्थे नहीं चढ़े। मायकेवालों ने देहरादून पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
हरिद्वार के रानीपुर क्षेत्र के औरंगाबाद निवासी गुरमीत (पेशे से चालक) की पत्नी लखविंदर सोमवार रात को बुरी तरह झुलसने पर स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे देहरादून के कोरोनेशन अस्पताल रेफर कर दिया था।
मंगलवार को मुजफ्फरनगर की गांधी कालोनी से पहुंची नवविवाहिता की मां सुशीला ने ससुराल पक्ष पर दहेज की खातिर बेटी को जिंदा जलाने का आरोप लगाते हुए दस ससुरालियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।
पुलिस के पास गई थी मदद मांगने
देर रात उपचार के दौरान लखविंदर की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि सोमवार देर रात उनका दामाद बेटी को लेकर देहरादून गया था। वह वहां कुछ समय से किराये पर रह रहा था।
बताया कि पति से झगड़ा होने पर बेटी पटेलनगर (देहरादून) चौकी भी पहुंची थी लेकिन पुलिस ने मदद करने के बजाय पुत्री को दामाद के साथ यह कहकर वापस भेज दिया था कि यह आपका आपसी विवाद है घर पर ही निपटा लें।
एसओ सिडकुल ऋतुराज सिंह रावत ने बताया कि आरोपी ससुरालियों की तलाश में दबिश दी जा रही है। जल्द आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
2014 में हुई थी शादी
लखविंदर और गुरमीत की शादी अगस्त 2014 में हुई थी। बताया जाता है कि लखविंदर चार माह की गर्भवती थी।