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शराब न पिलाने पर ड्राइवर ने ली 22 सवारियों की जान

Tue, 03 Jun 2014 10:30 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 03 Jun 2014 10:30 PM IST
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ten year jail to driver for death of passenger

मसूरी से लौटते हुए यात्रियों से भरी बस को खाई में गिराकर 22 यात्रियों की मौत के मामले में ड्राइवर को दस साल की सजा सुनाई गई है।

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इसके अतिरिक्त ड्राइवर एक लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड न देने पर दोषी चालक को छह महीने का अतिरिक्त कारावास होगा।

हरिद्वार व्यापार मंडल से जुड़े कुछ व्यापारी नये साल पर पांच जनवरी वर्ष 2011 को परिजनों के साथ मसूरी घूमने गए थे। उन्होंने हरिद्वार से बस बुक की थी।

यात्रियों ने टोका तो खाई में गिरा दी बस

ten year jail to driver for death of passenger

बस मूल रुप से उत्तरकाशी और हाल छिद्दरवाला निवासी राकेश कुमार चला रहा था। अभियोजन पक्ष के अनुसार चालक तेजी से बस चला रहा था।

बस में सवार यात्रियों ने जब उसे तेज गत‌ि से बस चलाने से टोका तो उसने जवाब दिया कि वे ड्राइवर है और बस चलाना जानता है।

कोल्हूखेत के मैगी प्वाइंट के पास उसने बस खाई की और मोड़ दी व खुद बस से कूद गया। जिससे 22 यात्रियों की मौत हो गई। जिला जज राम सिंह की अदालत में हुई सुनवाई में अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में 12 गवाह पेश किए गए।

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मसूरी में शराब न मिलने से था नाराज

ten year jail to driver for death of passenger

मंगलवार को अदालत बस हादसे में बच गए हरीश वाधवा ने अदालत को बताया कि चालक ने मसूरी में यात्रियों से शराब मांगी थी। इस पर यात्रियों ने यह कहकर शराब देने से इंकार कर दिया था क‌ि तुम्हें बस चलानी है। इससे नाराज चालक मसूरी में ही यात्रियों से उलझने लगा।

पांच जनवरी की शाम मसूरी घूमने के बाद जैसे ही वे लोग हरिद्वार के लिए लौटने लगे बस चालक तेजी से बस चलाने लगा। यात्रियों ने समझाया तो भी नहीं माना।

हरीश वाधवा ने कहा कि चालक की लापरवाही के चलते इस हादसे में उन्होंने अपनी पत्नी सोनिया वाधवा, भाई वीरेंद्र वाधवा, पुत्र निशांत वाधवा और भतीजी भाव्या वाधवा को खोया है। दोषी चालक को कड़ी सजा सुनाई जाए। ज्वालापुर हरिद्वार के दिनेश कुमार ने भी अदालत को प्रकरण की जानकारी दी।

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जानबूझ कर गिराई खाई में बस: रिपोर्ट

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यात्रियों को बस को खाई में गिराने के मामले में दोषी बस चालक को सलाखों के पीछे पहुंचाने में बस में सवार जिंदा बचे यात्रियों को आरआई की रिपोर्ट अहम रही।

अभियोजन के गवाह आरआई टैक्नीकल राम प्रकाश ने अदालत को बताया कि छह जनवरी को वे आरआई टैक्नीकल के पद पर आरटीओ दून में तैनात थे। उन्होंने दुर्घटनाग्रस्त बस का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि बस का स्टेयरिंग ठीक था, पैरों के ब्रेक और टायर भी ठीक थे, केवल गाड़ी की बॉडी टूटी थी। जबकि बचाव पक्ष इस बात पर जोर देता रहा कि बस में खराबी की वजह से हादसा हुआ।

हत्या से गंभीर है अपराध, आजीवन कारावास हो

ten year jail to driver for death of passenger

बचाव पक्ष ने कहा कि सामान्य दुर्घटना है, ब्रेक ठीक से न लगने और बस में खराबी से यह हादसा हुआ। बस चालक के दो छोटे बच्चे हैं।

अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता बीएस नेगी ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि बस चालक बस को तेजी से कटमारते हुए चला रहा था। यात्रियों के टोकने पर उसने बस खाई में गिरा दी।

दोषी ने 22 यात्रियों की हत्या की है। इससे कई परिवारों की रोजी रोटी छिन गई। अपराध हत्या से गंभीर है। दोषी को आजीवन कारावास हो।

इन धाराओं में माना दोष‌ी

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जिला जज राम सिंह की अदालत ने दोषी बस चालक को 304 द्वितीय (हत्या की कोटी में न आने वाला मानव वध) पर दस साल का सश्रम कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।

अर्थदंड न देने पर उसे छह महीने का अतिरिक्त कारावास काटना होगा। वही धारा 325 (जानबूझकर चोट पहुंचाना) पर दोषी चालक को तीन साल की कैद और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा हुई है।

अर्थदंड न देने पर दो महीने का अतिरिक्त कारावास होगा। दोनों सजाए साथ चलेंगी।

अदालत को गुमराह करने का किया प्रयास

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सजा पर बहस के बाद चालक ने अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया। उसने कहा कि वे बस से कूदा नहीं बल्कि बस में ही बैठा था। ये तो भगवान का शुक्र था कि उसे चोट नहीं आई।

वे पिछले 11 साल से पहाड़ में बस चला रहा है। वही प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि चालक बस छोड़कर बस से कूद गया। जिला जज ने चालक से पूछा कि यदि वे बस में ही था तो उसे चोट क्यों नहीं आई।

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