उत्तरकाशी मुठभेड़ ने ताजा कर दी 4 साल पुरानी काली रात की याद
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उत्तरकाशी की लाल घाटी में बुधवार रात सिपाही अनंत यादव की शहादत की घटना ने देहरादून एसएसपी डा. सदानंद दाते को 22 फरवरी 2012 की उस काली रात की याद को ताजा कर दिया, जिसमें उनपर और उनके साथियों की जान पर बन आई थी।
वन्य जीव तस्करों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए बदमाश-बदमाश का हल्ला मचा दिया। इससे बारातियों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया था। अतिरिक्त पुलिस बल के आने तक उन्हें कई घंटे झाड़ियों के बीच गुजारने पड़े थे।
उत्तरकाशी के चिन्याली सौड़, चोपडाली, दिखोली और चौंदियाट गांव का इलाका वन्य जीव और चरस आदि की तस्करी के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। राजस्व पुलिस के इस इलाके में सिविल पुलिस की कामयाबी का ग्राफ बेहद नीचे था। एसटीएफ सिपाही अनंत यादव की हत्या ने पुलिस विभाग को झकझोर दिया है।
‘झाड़ियों में नहीं छिपते तो हो जाती अनहोनी’
एसटीएफ के एसएसपी रहते हुए डॉ दाते का सिपाही यादव से नजदीकी जुड़ाव रहा है। कई मामलों में सिपाही ने उत्कृष्ट कार्य किए थे। कप्तान बताते है कि उत्तरकाशी में एसपी रहते समय उनके सामने ही ऐसे ही हालात बने थे।
वन्य जीव तस्करों की सौदेबाजी की खबर पर एसओजी टीम को चिन्याली चोपडाली इलाके में भेजा गया था। एक तस्कर पकड़ा गया तो गांव में बदमाशों के आने का हल्ला मचा दिया गया। पास में एक बारात ठहरी थी।
बारातियों ने पुलिस बल पर हमला कर दिया, जिसमें पहली टीम के कई पुलिसकर्मी जख्मी हो गए थे। रात के अंधेरे में उन्हें टीम के साथ कई घंटे झाड़ियों में बिताने पड़े थे। बाद में अतिरिक्त पुलिस बल आने के बाद तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।