पिता के मरने के बाद 37 साल तक बेटा इस तरह हड़पता रहा पेंशन, तरीका जान सकते में आए बैंक अधिकारी
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महज नौ हजार रुपए के लिए एक बेटा इस हद तक गिर गया, कि उसने पिता के नाम को ही बदनाम कर दिया। उसने ऐसा फ्रॉड किया कि अधिकारी भी सकते में आ गए।
परलोक सिधार गए पिता कुमुद कांत सरकार को जिंदा दर्शाकर बेटा 37 साल तक उनकी पेंशन हड़पता रहा। हर साल वह ऑनलाइन सत्यापन कराकर बैंक और विभाग की आंखों में धूल झोंकता रहा।
119 साल की उम्र होने पर पेंशन धारक को भौतिक सत्यापन के लिए बैंक बुलाया तो इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। यही नहीं आरोपी ने मुर्दा पिता के नाम पर बैंक से कई ऋण लेकर लाखों की रकम भी हड़प ली।
बैंक ने जांच पड़ताल के बाद आरोपी के खिलाफ डालनवाला कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने मामले की जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। भारतीय स्टेट बैंक के सहायक जनरल मैनेजर विनय कुमार खत्री ने डालनवाला कोतवाली में क्लेमेंटटाउन के नई बस्ती निवासी यूके सरकार के खिलाफ मृत पिता को जिंदा दर्शाकर पेंशन वसूलने का मुकदमा दर्ज कराया है।
ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
जालसाजी का यह किस्सा बेहद दिलचस्प भरा है। क्लेमेंटटाउन निवासी कुमुद कांत सरकार वन विभाग में कर्मचारी थे। 1899 में जन्मे सरकार 1956 में विभाग से सेवानिवृत्त हो गए थे। इसके बाद 1981 में उनका निधन हो गया।
पिता की मौत के बाद भी बेटे यूके सरकार ने उन्हें जिंदा दर्शाया और उनकी पेंशन वसूलनी शुरू कर दी। बैंकों ने हर साल होने वाली सत्यापन की प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं लिया। आरोप है कि यूके सरकार खुद को कुमुंद कांत दर्शाकर 37 साल तक पिता की पेंशन वसूलता रहा।
न तो वन विभाग और न ही बैंक को इसकी भनक लगी। अब एसपी ट्रैफिक और क्राइम लोकेश्वर सिंह के संज्ञान में यह प्रकरण आया तो उन्होंने पुलिस को मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
इस साल जनवरी में बैंक की सामान्य जांच पड़ताल में कुमुद कांत सरकार की उम्र 119 साल नजर आई तो अधिकारियों में उन्हें देखने की उत्सुकता हुई। बैंक की तरफ से कुमुद कांत सरकार को भौतिक सत्यापन के लिए बुलाया गया। यूके सरकार फोन पर पहले तो पिता की ज्यादा उम्र और बीमारी की बात कहकर ऑनलाइन सत्यापन करने की बात कहता रहा, लेकिन जब बैंक अधिकारियों ने मना किया तो वो खुद को कुमुद कांत सरकार बताकर सामने आ गया। बाप-बेटे की उम्र में काफी अंतर होने के कारण यूके सरकार की पोल खुल गई।
नौ हजार रुपये प्रतिमाह थी पेंशन
अंग्रेजी में दर्ज हुआ मुकदमा
डालनवाला कोतवाली में मुर्दा को जिंदा दर्शाकर पेंशन वसूलने के मामले का मुकदमा अंग्रेजी में दर्ज हुआ है। सहायक जनरल मैनेजर की तरफ से पूरी तहरीर अंग्रेजी में दी गई थी। तहरीर का अनुवाद करने में पुलिसकर्मियों को काफी दिक्कत भी हुई।
नौ हजार रुपये प्रतिमाह थी पेंशन
डालनवाला कोतवाली इंस्पेक्टर राजीव रौथाण के मुताबिक परलोक सिधार गए कुमुद कांत सरकार की पेंशन नौ हजार रुपये प्रतिमाह आती थी। 1981 में सरकार की मौत के बाद उनका बेटा यह पेंशन वसूलता रहा है। यह जालसाजी 37 साल बाद पकड़ में आई है।