रणवीर एनकाउंटरः सोमवार को होगा सजा का ऐलान
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दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने करीब चार साल पहले देहरादून में हुए एमबीए छात्र रणवीर सिंह एनकाउंटर को शुक्रवार को फर्जी एनकाउंटर करार देने के बाद शनिवार को दोषियों की सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।
अदालत सोमवार को इस मामले में सजा का ऐलान करेगी। अदालत ने इस मामले में लिप्त उत्तराखंड पुलिस के एक इंस्पेक्टर और पांच सब इंस्पेक्टर सहित 18 पुलिसकर्मियों को दोषी माना है।
इनमें से 17 को आपराधिक साजिश, अपहरण, हत्या इत्यादि आरोप में दोषी पाया गया है जबकि एक अन्य को दस्तावेजों से छेड़छाड़ का दोषी ठहराया गया है।
दोषी ठहराए गए 17 को आजीवन कारावास या मृत्युदंड की सजा प्रदान करने को लेकर शनिवार को बहस हुई। मृतक रणवीर सिंह गाजियाबाद के शालीमार गार्डन क्षेत्र का रहने वाला था।
ये पुलिसकर्मी हैं दोषी
अदालत ने मामले में उत्तराखंड पुलिस के इंस्पेक्टर संतोष कुमार जायसवाल, सब इंस्पेक्टर गोपाल दत्त भट्ट, नितीन चौहान, नीरज यादव, चंद्र मोहन सिंह रावत और राजेश बिष्ट व कांस्टेबल अजित सिंह को हत्या, आपराधिक साजिश व अपहरण के आरोप में दोषी ठहराया है।
जबकि उक्त सातों के अलावा अन्य कांस्टेबल सतवीर सिंह, सुनील सैनी, चंद्रपाल, सौरभ नौटियाल, नागेंद्र राठी, विकास चंद्रा बालुनी, संजय रावत, मोहन सिंह राणा, इंदर भान सिंह और मनोज कुमार को भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी उपधारा 364 व 302 के तहत हत्या व अपहरण के लिए साजिश रचने के आरोप में दोषी ठहराया है। अदालत ने दोषियों को साक्ष्य नष्ट करने के आरोप में बरी कर दिया।
केवल एक पुलिसकर्मी हत्या के आरोप से बरी
अदालत ने 18वें आरोपी जसपाल सिंह गोसांई को धारा 218 के तहत जनसेवक होने के बावजूद अन्य आरोपियों को बचाने के उद्देश्य से गलत रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में दोषी ठहराया है।
अदालत ने उसे आपराधिक साजिश, साक्ष्य नष्ट करने, अपहरण व हत्या के आरोप से बरी कर दिया। इस जुर्म में तीन वर्ष की सजा का प्रावधान है।
तीस हजारी अदालत स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश जेपीएस मलिक ने खचाखच भरी अदालत में सुनाए अपने फैसले में कहा कि सीबीआई द्वारा पेश साक्ष्यों व गवाहों के बयानों से स्पष्ट है कि दोषियों की गोलीबारी में मारा गया युवक रणवीर निर्दोष था।
अदालत ने कहा कि तथ्यों से स्पष्ट है कि दोषी पुलिसकर्मियों ने कहासुनी के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया व देहरादून के डालनवाला थाना क्षेत्र के लाडपुर जंगलों में ले जाकर उसकी हत्या कर दी और इसे एनकाउंटर का नाम दे दिया।
उम्रकैद या मृत्युदंड की सजा मिलना तय
अदालत ने फैसले में कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आया कि जिससे यह पता चले कि रणवीर सिंह के पास रिवाल्वर या कोई अन्य हथियार था।
स्पष्ट है कि पुलिसकर्मियों ने अपनी साजिश को अंजाम देने के लिए हथियार उसके शव के पास रख दिए। अदालत ने फैसले में पोस्टमार्टम व चिकित्सा रिकार्ड का हवाला देते हुए कहा कि रणवीर को काफी करीब से गोलियां मारी गई और ऐसा कोई साक्ष्य नहीं कि यह एनकाउंटर था।
तय कानून के मुताबिक पहले सात दोषियों को सीधे 302 के तहत हत्या के आरोप में आजीवन कारावास या मृत्युदंड की सजा हो सकती है। जबकि अन्य 10 को भी न्यूनतम आजीवन कारावास की सजा मिल सकती है।
क्या था मामला
गाजियाबाद के शालीमार गार्डन निवासी एमबीए छात्र रणवीर सिंह अपने दोस्त के साथ 2 जुलाई 2009 को घूमने व नौकरी के लिए साक्षात्कार देने देहरादून गया था। वहां कुछ पुलिस अधिकारियों के साथ उसकी किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई।
पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया व 3 जुलाई, 2009 को उत्तराखंड पुलिस ने रणवीर को लुटेरा बताकर जंगल में एनकाउंटर में मार गिराने का दावा किया था।
फर्जी एनकाउंटर को लेकर उठे विवाद के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई व बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस मामले को देहरादून से दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था। मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ 22 दिसंबर, 09 को आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया था।