पुलिस हुई सुस्त, चोरों के हौसले बुलंद
- शतिर चोर डटे रहे, पुलिस ने गश्त के नाम पर दिखाई फार्मेलिटी
- पड़ोसी जागरूक रहे पर पुलिस हरकत में नहीं आई
- पुलिस भ्रमण करती तो शायद कुछ और होती तस्वीर
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विस्तार
विवेकानंद ग्राम में सीओ के घर चोरी की वजह चोरो के शातिर होने के बजाय गश्त करने वाले पुलिसकर्मियों का नकारापन ज्यादा है। वारदात से पहले चोरों के आने का शोर मचा, मौके पर पुलिस पहुंची पर सतर्कता दिखाने के बजाय औपचारिकता निभाकर लौट गई।
स्थानीय लोगों का तो यहां तक कहना है कि कहने पर भी गश्त के लिए आई टीम ने मकानों का निरीक्षण या मालिकों को आगाह करना मुनासिब नहीं समझा। टीम का रुख ऐसा था मानो किसी ने उनके आराम में खलल डाल दिया हो।
चोर चुपचाप पुलिस की कथित मुस्तैदी को देखते रहे और गश्ती दल के लौटते ही सीओ का घर साफ करके उनकी ही कार से चंपत हो गए। हालांकि घटनाक्रम का पूरा सच तो चोरों के पकड़ में आने के बाद ही साफ हो पाएगा पर घटनास्थल जो कहानी बयां कर रहा है वो कुछ ऐसी ही है।
शहर के अलावा कई राज्यों के सक्रिय चोरों की बारात इन दिनों दून को सॉफ्ट टारगेट बनाए हुए है और इनसे पार पाना दून पुलिस के लिए खासी चुनौती है। यह बात किसी से छिपा नहीं है। ऐसी कई वारदात है, जिनका खुलासा नहीं होने से पुलिस पर सवाल उठे हैं, पर नेहरू कालोनी में सीओ के घर हुई चोरी से पुलिस महकमे की काफी फजीहत हुई है।
100 नंबर पर सूचना देने पर भी पुलिस नहीं होती एक्टिव
विवेकानंद ग्राम में बीडीओ ओपी चमोली ने बताया कि रात 2:54 बजे तीन-चार युवक संदिग्ध अवस्था में घूमते नजर आए तो उन्होंने शोर मचाकर पड़ोसियों को जगाने का प्रयास किया, लेकिन किसी नहीं सुना तो उन्होंने 100 नंबर पर सूचना दी। चीता मोबाइल मौके पर आई, लेकिन औपचारिकता पूरी करके लौट गई।
हैरत की बात पुलिसकर्मियों ने इस मामले में आला अधिकारियों को भी कुछ नहीं बताया। मामला रफा-दफा करके पुलिसकर्मी फौरन वहां से निकल गए, जबकि चोर आसपास ही छिपे रहे। यदि पुलिस सक्रिय होकर इलाके में गश्त बढ़ाती अथवा पड़ोसियों को जागरूक करने का प्रयास करती तो पुलिस इस फजीहत से तो बच ही जाती।
लोगों की माने तो सीओ के घर में चोरी की वारदात सिपाहियों के लौटने के बाद अंजाम दी गई, क्योंकि पहले दो प्रयास नाकाम रहे। हालांकि अधिकारी इस मामले में खुलकर बोलने से बच रहे है। उनका कहना है कि लापरवाही के आरोप में कार्रवाई की गई है।