उत्तराखंडः पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष को घेरकर गोलियों से भूना
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आधुनिक असलहों से लैस तीन पेशेवर हत्यारों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर अपने दोस्त के भाई की दुकान में बैठे रुद्रपुर महाविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष की दिनदहाड़े हत्या कर दी। सनसनीखेज हत्याकांड में दो अन्य लोग गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें हल्द्वानी के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
हत्याकांड की सूचना मिलते ही डीआईजी जीएस मर्तोलिया, जिलाधिकारी डॉ. पंकज पांडेय और एसएसपी नीलेश आनंद भरणे ने घटनास्थल का मौका मुआयना किया। हत्याकांड के विरोध और पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष की मौत पर बाजार बंद रहा।
पुलिस ने शांतिपुरी में अवैध खनन को लेकर हत्या के शक में दो लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। प्रताप सिंह बिष्ट वर्ष 2000 में रुद्रपुर स्थित सरदार भगत सिंह राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में छात्रसंघ अध्यक्ष थे।
शनिवार सुबह करीब 10:50 बजे आनंदनगर निवासी रुद्रपुर के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष प्रताप सिंह बिष्ट तिलियापुर निवासी अपने साथी अभय सिंह के साथ उसके छोटे भाई अविनाश की दुकान में बैठकर चाय पी रहे थे। तभी एक बाइक (ब्लैक डिस्कवर) पर सवार तीन बदमाश वहां पहुंचे।
अत्याधुनिक हथियारों से लैस इन तीनों में से एक दुकान के बाहर ही रुक गया, जबकि अन्य दोनों ने दुकान के बाहर से ही प्रताप को निशाना बनाकर फायरिंग शुरू कर दी।
सिर से सटाकर मारी गोली, कई राउंड फायर
गोली लगने से घायल प्रताप बिष्ट और अभय सिंह दुकान के अंदर की ओर भागे। एक बदमाश ने दुकान स्वामी अविनाश पर रिवाल्वर तानते हुए उन्हें नीचे बैठा दिया, जबकि दूसरा ताबड़तोड़ फायर झोंकते हुए प्रताप सिंह के पीछे भागा।
इस दौरान अभय प्रताप को बचाने के लिए दौड़े पर वह दुकान में रखे सामान से टकराकर गिर पड़े, जबकि प्रताप दुकान के अंतिम छोर पर जा पहुंचे थे। बदमाश ने अभय को छोड़ प्रताप के पास पहुंच उनके सिर से सटाकर गोलियां दाग दीं।
इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। प्रताप को गोली मारने वाला बदमाश काउंटर तक लौटकर दो-तीन बार वापस गया और उनकी मृत्यु की पुष्टि के लिए कई राउंड गोलियां दागीं। माना जाता है कि प्रताप के सिर से सटाकर 312 बोर का तमंचा चलाया गया, ताकि उनके बचने की कोई गुंजाइश न रहे।
दुकान से बाहर निकलते समय बदमाशों ने अविनाश पर भी देसी तमंचे से फायर झोंका। फायर मिस होने से दुकान के बाहर खड़े बदमाश ने वहां मौजूद बसगर निवासी नागेंद्र सिंह पुत्र विजय बहादुर को भी गोलियां मारकर घायल कर दिया।
इस दौरान बाहर खड़े बदमाश ने बाइक स्टार्ट की तो सभी उसमें सवार होकर हथियार लहराते हुए गुरुग्राम गांव की ओर जाने वाले मार्ग से फरार हो गए।
फायरिंग में दो गंभीर घायल, हल्द्वानी रेफर
गोली लगने से घायल अभय सिंह पुत्र तारकेश्वर सिंह और नागेंद्र को उसके भाई मोहन ने तुरंत सितारगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति गंभीर देख हल्द्वानी रेफर कर दिया। दोनों घायलों का हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
दिनदहाड़े हुए हत्याकांड से क्षेत्र व पुलिस, प्रशासन में हड़कंप मचा रहा। डीआईजी जीएस मर्तोलिया, जिलाधिकारी डॉ. पंकज पांडेय, एसएसपी नीलेश आनंद भरणे, एएसपी टीडी वैला, सीओ उत्तम सिंह नेगी, कोतवाल राजन लाल आर्य, अजय ध्यानी समेत पुलिस के अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आसपास के दुकानदारों से पूछताछ की। डीआईजी व एसएसपी ने मातहतों को हत्याकांड के शीघ्र खुलासे के आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
दस मिनट में 20 राउंड फायरिंग
शक्तिफार्म मुख्य बाजार में ऑटो पार्ट्स की दुकान पर पेशेवर बदमाश दुस्साहसिक वारदात को दस मिनट में अंजाम देकर निकल भागे। चश्मदीदों के मुताबिक तीनों बदमाशों के पास करीब छह हथियार थे, जिनमें पिस्टल, तमंचे और माउजर थे।
उन्होंने दुकान में घुसते ही गोलियां चलानी शुरू कर दीं और करीब 20 राउंड फायरिंग कर पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष प्रताप बिष्ट की हत्या कर दी। पुलिस को घटनास्थल से प्वाइंट 32, 315 एवं 312 बोर के तमंचे के 13 खाली और एक जिंदा कारतूस मिला।
सौ मीटर दूर खड़ा भाई समझता रहा मजाक
शनिवार को दिनदहाड़े जिस ऑटो पार्ट्स की दुकान में जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया गया, उससे करीब सौ मीटर की दूरी पर मृतक प्रताप सिंह बिष्ट के बड़े भाई हरेंद्र बिष्ट की दुकान है। गोलियों की तड़तड़ाहट सुनकर वह भी टहलते हुए वहां पहुंचे।
उन्होंने दुकान से बाहर हाथ में पिस्टल लेकर खड़े बदमाश को स्थानीय दुकानदार समझा और दूर से ही मजाकिया लहज़े में बोले, दिन में ही क्यों गोली चला रहा है। उन्हें दुकान के अंदर हुए गोलीकांड का एहसास तक नहीं था।
हरेंद्र बिष्ट ने तीनों बदमाशों को बाइक पर सवार होकर जाते भी देखा। थोड़ी देर बाद दुकान स्वामी अविनाश के बाहर आकर शोर मचाने पर उन्हें असलियत का पता चला।
इधर गोली की आवाज सुन सुभाष चौक में फोटो स्टेट कराने गए नागेंद्र के भाई मोहन सिंह के वापस लौटने पर बदमाशों से उसकी झड़प भी हुई थी।