कुणाल हत्याकांड: दो साल बाद संदिग्धों का लाई डिटेक्टर टेस्ट
- 2014 में राजपुर क्षेत्र में हुई थी प्रापर्टी डीलर के बेटे की हत्या
- कुछ घंटों में अनावरण का था दावा, दो साल में नहीं सुलझी गुत्थी
- पुलिस के फेल होने पर सीबीसीआईडी कर रही है माथापच्ची
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सीबीसीआईडी ने जाखन के कुणाल हत्याकांड में कई संदिग्धों का लाई डिटेक्टर टेस्ट (झूठ पकड़ने वाली मशीन) कराया है। दो साल की लंबी जांच पड़ताल में क्लू ढूंढने में नाकाम एजेंसी को टेस्ट में कुछ हाथ लगने की उम्मीद है। 2014 में हुए इस कत्ल का कुछ घंटे में खुलासा करने का दावा ठोका गया था, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी हत्या की गुत्थी सुलझ नहीं पाई है।
राजपुर थाना क्षेत्र के जाखन में प्रापर्टी डीलर संजीव गुप्ता के बेटे कुणाल गुप्ता की मार्च 2014 में एक खंडहर में खून से लथपथ लाश मिली थी। उसकी ईंटों से पीट-पीट कर हत्या की गई थी।
कुणाल की हत्या के मोटिव को लेकर पुलिस में दो विचार धाराएं थी। पुलिस का एक वर्ग हत्या को लेकर पारिवारिक कारणों से जोड़ रहा है तो दूसरा नशे और जुएं में कत्ल होने की आशंका जता रहा है। पुलिस ने एक संदिग्ध पर गहरा शक जताते हुए उसके खिलाफ साक्ष्य मिलने का दावा भी कर दिया था।
परिजनों की आपत्ति पर सीबीसीआईडी को सौंपी गई जांच
परिजनों ने विवेचना के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए तो पुलिस बैकफुट पर आ गई। बाद में यह विवेचना पुलिस से लेकर सीबीसीआईडी के सुपुर्द कर दी गई। विवेचक ने करीब पौने दो साल में संदिग्धों से पूछताछ की, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा।
इसी बीच कुणाल के पिता संजीव गुप्ता को दुनिया को अलविदा कह गए। संदिग्धों के बयानों में विरोधाभास ने जरूर शक को गहराया है। सीबीसीआईडी ने कत्ल की गुत्थी सुलझाने के लिए अब झूठ पकड़ने वाली मशीन का सहारा लिया है।
अदालत के आदेश पर कई संदिग्धों को दिल्ली ले जाकर लाई डिटेक्टर टेस्ट कराया गया है। हालांकि टेस्ट की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। सीबीसीआईडी सूत्रों का दावा है कि रिपोर्ट से हत्याकांड को लेकर धुंधली तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है।