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अगवा शुभम के साथ 21 को ही हो गई थी अनहोनी
मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 01 Dec 2013 04:05 PM IST
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पुलिस की ढीली कार्यप्रणाली के कारण एक सप्ताह पहले गायब हुए कोटद्वार के शुभम देवरानी के परीजनों परीजन उसका अंतिम संस्कार भी नहीं कर पाए।
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बिजनौर से दबोचे गए जहरखुरानी जितेंद्र चौहान ने शुभम को 21 नंबर को ही मौत के घाट उतार दिया था।
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एक सप्ताह से गायब बीबीए छात्र शुभम देवरानी को ढूढंने में जुटी पुलिस ने जहरखुरान जितेंद्र निवासी नूरपुर, बिजनौर को दबोचा, जिसके बाद यह पूरा मामला साफ हो गया है।
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परिचित लड़की से मिलने जा रहा था कोटद्वार
जितेंद्र ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसे शुभम हरिद्वार में मिला था। जहां उसने शुभम से दोस्ती की और बातों ही बातों में कोटद्वार जाने की बात उगलवा ली।
वह भी नजीमाबाद जाने की बात बोलकर शुभम के साथ चल पड़ा। हितेंद्र ने बताया कि शुभम कोटद्वार में किसी परिचित लड़की से मिलने जा रहा था।
उसके बाद दोनों लक्सर से रेल में बैठ गए। जितेंद्र ने मौका पाकर शुभम को नशीला पदार्थ मिला खाना खिलाया, जिससे शुभम बेहोश हो गया। इसके बाद आरोपी जितेंद्र ने शुभम को पैसे, सामान और मोबाइल लूटे और बरेली के पास फतेहगंज प. में शुभम को चलती ट्रेन से फेंक दिया।
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इस दौरान शुभम का एक हाथ कट गया था और मौत हो गई। इसके बाद आरोपी ने पैसों के लालच में शुभम के मोबाइल से दोस्तों के नंबर लेकर उन्हें फिरौती से संबंधित फोन किया।
आरोपी से पूरा मामला जानने के बाद दून पुलिस बरेली पहुंची, जहां फतेहगंज पुलिस तीन दिन लाश को रखने के बाद लावारिस समझ कर अंतिम संस्कार कर चुकी थी। पुलिस ने शुभम की फोटो देखकर उसे पहचान लिया और सारी बात दून पुलिस को बताई।
मृतक छात्र के कपडों से परिजनों ने शुभम की शिनाख्त कर ली है। इस बात से शुभम के घर में मातम का माहौल है।
क्या था मामला
क्लेमेंटटाउन स्थित एक इंस्टीट्यूट का छात्र शुभम देवरानी निवासी देवी रोड कोटद्वार 21 नवंबर को देहरादून से संदिग्ध हालात में लापता हो गया था। उसके मोबाइल फोन से उसके दोस्तों को की गई कॉल में पांच लाख की फिरौती मांगी गई थी। नंबर ट्रेस करते हुए बिजनौर पहुंची पुलिस ने एक जहरखुरान को दबोच लिया। जिसके बाद पूरा मामला सामने आया।
पुलिस का ढीला रवैया
देहरादून पुलिस के ढीले रवैये से एक मां अपने बेटे आखिरी बार नहीं देख पाई। 21 नवंबर से गायब छात्र के बारे में जांच में हुई देरी से शुभम के परीजन उसका अंतिम संस्कार भी नहीं कर पाए।
अगर पुलिस समय रहते देहरादून के नजदीकी पुलिस स्टेशनों से लापता डेडबॉडी की जानकारी लेती तो शायद शुभम की मां अपने बेटे को आखिरी बाद देख पाती।
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