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यौन शोषण मामलाः उत्तराखंड पुलिस पर भरोसा नहीं
अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 02 Dec 2013 08:43 PM IST
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नौकरी के बहाने यौन उत्पीड़न मामले में पीड़ित युवती ने मुकदमे की जांच ट्रांसफर कराने की गुहार लगाई है। इसके लिए पीड़िता दिल्ली के लिए रवाना हो चुकी है।
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उसके अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल करने को जरूरी कागजों में हस्ताक्षर करने के लिए युवती को दिल्ली बुलाया है। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार युवती को दून में भी एक बार फिर से अपना ठिकाना बदलना पड़ रहा है।
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दून में भी बदला ठिकाना
ऐसा मीडिया के बार-बार पहुंचने और मकान मालिक के ऐतराज के बाद किया है। युवती का कहना है कि मीडिया के पहुंचने पर उसकी पहचान उजागर हो रही है। आरोपियों से खतरा होने की आशंका के कारण वह अपना ठिकाना गोपनीय रखना चाहती है।
सूत्रों का कहना है कि युवती दिल्ली की अदालत से मिली ट्रांजिट बेल की अवधि खत्म होने से पहले आरोपी अपर सचिव जेपी जोशी की गिरफ्तारी चाहती है। युवती ने दून में अधिवक्ताओं से संपर्क किया है।
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सूत्रों का कहना है कि युवती पर एक चैनल द्वारा उनके मुताबिक, बयान देने का दबाव भी बनाया गया है। इस नजरिए से भी युवती को खतरा जताया गया है। चूंकि, मामले का आरोपी प्रदेश का एक बड़ा अधिकारी है, इसलिए युवती को उत्तराखंड पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है।
वह निष्पक्ष जांच के लिए मुकदमे को किसी दूसरे राज्य में ट्रांसफर कराना चाहती है। इस बीच, एएसपी ममता बोहरा के नेतृत्व में नैनीताल पहुंची टीम ने हल्द्वानी से भी जरूरी जानकारी जुटाई है।
कौन था पुलिस की गाड़ियों में
सूत्रों के अनुसार, 17 नवंबर को जिस वक्त जीएमएस रोड स्थित कमला पैलेस होटल में बुलाकर युवती के अपहरण का प्रयास हुआ, उस वक्त वहां पर पुलिस की चार गाड़ियां भी थीं।
बताया जाता है कि उस समय जेपी जोशी होटल में थे और वहां से जोर-जोर से हंसने की आवाजें आ रही थीं। युवती किसी तरह खुद को बचाकर वहां से निकल पाई थी।
जांच टीम ने हल्द्वानी में की पूछताछ
यौन शोषण प्रकरण में जांच टीम ने रविवार को हल्द्वानी में भी पूछताछ की। वहीं, नैनीताल में शनिवार देर रात जांच टीम ने राज्य अतिथि गृह में रिकार्ड खंगाले।
सूत्रों के अनुसार जांच अधिकारी एएसपी ममता बोहरा के नेतृत्व में टीम नैनीताल में गंगा गेस्ट हाउस (ऑफिसर्स क्लब) का निरीक्षण करने के बाद गेस्ट हाउस के वरिष्ठ व्यवस्था अधिकारी नवीन चंद्र उप्रेती से पूछताछ की।
इसके बाद टीम देर तक लैपटॉप के साथ कमरे में मौजूद रही। इस दौरान कमरे में किसी का भी प्रवेश वर्जित था। वहीं पीड़ित युवती फिर उत्तराखंड पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं जताते हुए दिल्ली रवाना हो गई है। उसने मुकदमे की जांच दूसरे राज्य ट्रांसफर कराने की गुहार लगाई है।
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