ऊर्जा निगम में बड़ा फर्जीवाड़ा, EPF की फर्जी रसीद दे हड़पे पैसे
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ऊर्जा निगम में सेल्फ हेल्प ग्रुप सोसायटी के माध्यम से रखे गए 100 से अधिक कर्मचारियों से लाखों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि सोसायटी पदाधिकारियों ने कर्मियों को ईपीएफ की फर्जी रसीद देकर उनके खाते में करीब नौ साल से एक भी पैसा जमा न करवा कर डकार लिया है।
शिकायत पर ऊर्जा निगम की विजिलेंस टीम ने जांच पड़ताल शुरू कर दी है। इस संबंध में सात जुलाई को नगरीय खंड के अधिशासी अभियंता को तलब किया गया है।
ऊर्जा निगम में सेल्फ हेल्प ग्रुप सोसायटी के माध्यम से शहरी और ग्रामीण खंड में 104 कर्मचारियों को तैनात किया गया है। इसके तहत ऊर्जा निगम एक कर्मचारी को सोसायटी के माध्यम से औसतन नौ हजार रुपये मासिक मानदेय देता है। आरोप है कि सोसायटी पदाधिकारियों की ओर से कर्मचारियों को फर्जी ईपीएफ रसीद दी गई।
उस समय बताया गया कि प्रत्येक कर्मचारी के हर माह 1200 रुपये ईपीएफ खाते में जमा किए जा रहे हैं। लेकिन वर्ष 2008 से लेकर आज तक किसी भी कर्मचारी के खाते में एक भी रुपये जमा नहीं किया गया है।
परेशान कर्मियों की शिकायत पर समाज सेवी आदित्य चौधरी ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को इससे अवगत कराया। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने ऊर्जा निगम नगरीय खंड के अधिशासी अभियंता को जांच के निर्देश दिए गए। उसके बाद कर्मचारियों ने शिकायत ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक और विजिलेंस से की।
ऊर्जा निगम की विजिलेंस टीम ने 27 जून को शिकायतकर्ता आदित्य चौधरी और ऊर्जा निगम नगरीय खंड के अधिशासी अभियंता मनोज कुमार को तलब किया था। उस दिन शिकायतकर्ता ने मामले से संबंधित सभी साक्ष्य विजिलेंस अधिकारियों को सौंप दिए। लेकिन अधिशासी अभियंता मनोज कुमार किसी कारणवश नहीं पहुंच पाए।
सोमवार को अधिशासी अभियंता ने बताया कि अब विजिलेंस ने उन्हें सात जुलाई को बुलाया है। इस संबंध में जो भी सच्चाई है उससे जांच अधिकारी को अवगत कराया जाएगा।
संस्था ने किया मामले से इनकार
कोई गबन नहीं किया गया है। वर्ष 2008 में हमारी संस्था का रजिस्ट्रेशन नहीं था। न हमने किसी कर्मचारी का इपीएफ काटा था। वर्ष 2013 में संस्था का रजिस्ट्रेशन करवाया गया है। उसके बाद से ईपीएफ का पैसा लगातार जमा किया गया है। इस संबंध में हमने दस्तावेज विजिलेंस को सौंप दिए हैं।
- राजकुमार, सचिव, सेल्फ हेल्प ग्रुप सोसायटी
सोसायटी बनाकर निगम में किया था रजिस्ट्रेशन
शिकायतकर्ता ने बताया कि सेल्फ हेल्प ग्रुप सोसायटी ने पहले वर्ष 2008 में विद्युत उपभोक्ता सेवा समिति के नाम से ऊर्जा निगम में रजिस्टर्ड करवाया था। इसके तहत ऊर्जा निगम से सोसायटी का एग्रीमेंट हुआ था। जिसके तहत कर्मियों को वेतन और ईपीएफ की सुविधाएं देनी थी। इस संबंध में जब वर्ष 2013 में कुछ कर्मियों ने आवाज उठाई तो सोसायटी अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष ने समिति को भंग कर सेल्फ हेल्प ग्रुप नाम से नई संस्था बना ली।
Published By: Vivek Singh