फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   dda engineer murder his family

26 साल पहले की पत्नी-बेटी हत्या, मिली उम्रकैद

Tue, 11 Nov 2014 05:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 11 Nov 2014 05:16 PM IST
विज्ञापन
dda engineer murder his family

चारधाम यात्रा के बहाने पत्नी और बच्ची को मौत के घाट उतारने वाले इंजीनियर को आजीवन कारावास की सजा दी गई है। अदालत ने इंजीनियर को मंगलवार को सजा सुनाई।

विज्ञापन


दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के इंजीनियर को 26 वर्ष पुराने मामले में देहरादून की सीबीआई की विशेष अदालत ने पत्नी और दुधमुंही बच्ची की हत्या का दोषी करार दिया है। वह चारधाम यात्रा के बहाने पत्नी और बच्ची को उत्तराखंड लाया था। उत्तरकाशी में भैरोघाटी के पास उसने दोनों को भागीरथी में धकेल दिया था।
विज्ञापन


मूलत: ग्राम बिटाना तहसील गोहाना जिला सोनीपत हरियाणा एवं हाल निवासी एफ 09 विलासनगर उत्तमनगर नई दिल्ली निवासी और डीडीए में जूनियर इंजीनियर सेवाराम गोयल जून 1988 में पिता सत्यनारायण गोयल, पत्नी सरोजबाला, दो बेटियों को चारधाम यात्रा कराने उत्तराखंड लाया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


29 जून 1988 को सेवाराम ने हरिद्वार में पत्नी और छोटी बेटी के गुमशुदा होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। इससे पहले वह दिल्ली में भी रिपोर्ट दर्ज करा चुका था। लंबे समय बाद भी सरोजबाला का कुछ पता नहीं चला।

इस बीच सरोजबाला के भाई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 1990 में मामला सीबीआई को जांच के लिए सौंप दिया। सीबीआई ने जांच की तो साफ हो गया कि सेवाराम की पत्नी और बेटी लापता नहीं थे, बल्कि उनकी हत्या की जा चुकी थी। इसका आरोपी खुद सेवाराम गोयल था। इसके बाद से मामला सीबीआई कोर्ट में चल रहा था।

बेटियों को लेकर चारधाम यात्रा पर निकला

dda engineer murder his family

सोमवार को अदालत में अभियोजन पक्ष ने बताया कि सेवाराम और दिल्ली निवासी सरोजबाला की शादी मार्च 1985 में हुई थी। सरोज के परिजनों का आरोप था कि सेवाराम शादी में मिले तोहफों से संतुष्ट नहीं था।

31 दिसंबर 1985 को बेटी के जन्म के बाद भी उसका बर्ताव नहीं बदला। कुछ महीने साथ रखने के बाद उसने पत्नी को जबरन मायके भेज दिया। वहां पांच जनवरी 1987 को सरोजबाला ने दूसरी बेटी को जन्म दिया।

सेवाराम मानता था कि दूसरी बेटी उसकी नहीं है। उसने पंचायत भी बुलवाई, लेकिन साबित नहीं कर सका। पंचायत ने उसे पत्नी-बेटी को ले जाने के लिए कहा, जिसके बाद वह परिवार को साथ ले गया।

सीबीआई जांच रिपोर्ट के मुताबिक जून 1988 में वह पिता सत्यनारायण गोयल, पत्नी सरोजबाला और दोनों बेटियों को लेकर चारधाम यात्रा पर निकला।

गंगोत्री से लौटते वक्त परिवार भैरोघाटी, उत्तरकाशी के पास एक आश्रम में रुका। सत्यनारायण और बड़ी बेटी को आश्रम में छोड़ वह सरोज और एक वर्षीय बेटी चीनू को घुमाने के बहाने ले गया।

निर्जन स्थान पर उसने पत्नी और बेटी को भागीरथी में धकेल दिया और आश्रम लौट आया। यहां से वह पिता और बड़ी बेटी को लेकर दिल्ली लौट गया था।

सीबीआई विशेष न्यायाधीश न्यायाधीश अमित कुमार सिरोही की अदालत में हुई सुनवाई में सीबीआई की ओर से 16 गवाह पेश किए गए।

लोक अभियोजक अधिकारी पंकज गुप्ता ने बताया कि अदालत ने सेवाराम गोयल को हत्या का दोषी करार दिया है। बताया कि गोयल सुनवाई के वक्त अदालत में मौजूद था। दोषी करार देते ही उसे हिरासत में ले लिया गया। उसे पत्नी और बच्ची की हत्या, षडयंत्र और साक्ष्य छिपाने का दोषी पाया है।

ऐसे खुला मामला

dda engineer murder his family

जुलाई 1988 में मृतका सरोजबाला की छोटी बहन का विवाह था। सरोजबाला का छोटा भाई सुभाष चंद्र गुप्ता जीजा सेवाराम गोयल के घर कार्ड देने पहुंचा तो वहां ताला लगा मिला।

पड़ोसियों से पूछा तो पता चला कि परिवार चारधाम यात्रा पर गया था, लेकिन जून अंतिम सप्ताह में सिर्फ सेवाराम, उसका पिता सत्यनारायण गोयल और बड़ी बेटी ही घर लौटे थे। सरोजबाला और छोटी बेटी साथ नहीं आई थीं। शक होने पर सुभाष ने भी थाना बसंत कुंज नई दिल्ली में रिपोर्ट दर्ज करा दी थी।

दिल्ली से लौटा था गुमशुदगी दर्ज कराने
सीबीआई जांच में स्पष्ट हुआ कि सेवाराम गोयल पत्नी, बेटी की हत्या के बाद दिल्ली चला गया था। 28 जून को वह पिता और बड़ी बेटी को लेकर हरिद्वार लौटा था। यहां उसने पुलिस में पत्नी की गुमशुदगी दर्ज कराई।

अपने ही जाल में फंसा
सेवाराम ने पुलिस को गुमराह करने के लिए पत्नी, बेटी की गुमशुदगी दिल्ली और हरिद्वार में तो दर्ज कराई, लेकिन ससुराल वालों को इसकी कोई जानकारी नहीं दी। यहीं से उस पर संदेह गहराता गया और आखिर वह अपने ही जाल में फंस गया।

लाई डिटेक्टर टेस्ट से हुई थी पुष्टि

dda engineer murder his family

सीबीआई ने जांच हाथ में लेने के कुछ समय बाद ही सेवाराम गोयल का लाई डिटेक्टर टेस्ट करवाया था। सीबीआई ने अदालत को बताया कि टेस्ट की रिपोर्ट में गोयल का अपराध में शामिल होने की पुष्टि हुई थी। इससे उसके खिलाफ जांच को आधार मिला।

पिता के खिलाफ भी थी चार्जशीट
मामले में सीबीआई ने सेवाराम गोयल के पिता सत्यनारायण गोयल को भी षड्यंत्र में शामिल होने का आरोपी पाया था। उसके खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की गई थी। लेकिन सुनवाई के दौरान ही कुछ वर्ष पूर्व सत्यनारायण की मौत हो गई। वहीं, सेवाराम गोयल की उम्र 53 वर्ष है।

नहीं मिले थे शव
सीबीआई ने अदालत को यह भी बताया कि सरोजबाला और चीनू के शव काफी तलाश के बाद भी नहीं मिले थे। लंबी जांच के बाद सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में संदेह जताया था कि सेवाराम ने ही पत्नी, बेटी की हत्या के बाद उनके शवों को ठिकाने लगा दिया।

कब क्या हुआ
-जून 1988 में सेवाराम गोयल ने डीडीए से तीन दिन का आकस्मिक अवकाश लिया
-सात जून 1988 को वह पत्नी, पिता, बेटियों संग हरिद्वार पहुंचा
-12 जून 1988 तक वह परिवार समेत हरिद्वार के जयराम आश्रम में ठहरा था
-13 जून 1988 को वह परिवार को लेकर गंगोत्री के लिए निकला
-20 जून 1988 को वह दंडी स्वामी पूर्णानंद तीर्थ आश्रम उत्तरकाशी में रुका
-21 जून 1988 की सुबह पत्नी और छोटी बेटी को भागीरथी में धकेल दिया
-21 जून 1988 की दोपहर पिता, बड़ी बेटी को लेकर आश्रम से निकला
-21 जून 1988 की शाम उत्तरकाशी में एक चाय की दुकान पर पहुंचा और रात बिताई
-22 जून 1988 को वह पिता और बड़ी बेटी के साथ दिल्ली लौट गया

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed