इस बेरहम हत्यारे की करतूत सुनकर कांप जाएगी रुह
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नैनीताल जिले में चंद रुपयों के लिए नशे में धुत सिरफिरे ने एक व्यक्ति की बेरहमी से हत्या कर डाली। पहले पत्थरों से उसका सिर कुचला और फिर कुल्हाड़ी, आरी चलाई।
बीती 19 दिसंबर से लापता व्यक्ति का शव शनिवार को हत्यारे की ही निशानदेही पर बरामद खाई से बरामद किया गया। पुलिस ने मृतक के भाई की तहरीर पर आरोपी युवक के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
पुलिस के अनुसार गेठिया सेनिटोरियम निवासी गोपाल सिंह (48) 19 दिसंबर को घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा।
परिजनों और ग्रामीणों ने काफी ढूंढखोज की तो पता चला कि गोपाल को अंतिम बार छीनकुंआ गांव के मनोज बिष्ट (27) के साथ देखा गया था। परिजनों और ग्रामीणों ने मनोज से कई बार पूछताछ की, लेकिन वह उन्हें गुमराह करता रहा।
शनिवार को जब गांव के लोगों और परिजनों ने फिर से मनोज से सख्ती से पूछताछ की तो उसने गोपाल को मारकर शव खाई में फेंकने की बात कुबूल कर ली। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
सिर कुचलने के बाद पत्थरों से ढक दिया था शव
एएसपी श्वेता चौबे, थानाध्यक्ष संजीव पांडे और चौकी प्रभारी सतीश कापड़ी ने मनोज की निशानदेही पर छीनकुंआ से करीब 500 मीटर दूर खाई से शव बरामद किया। गोपाल का सिर कुचलने के बाद शव पत्थरों से ढका गया था।
हत्यारोपी मनोज ने पुलिस को बताया कि घटना के दिन वह और गोपाल शराब के नशे में थे। गोपाल के पास रुपए देखने पर उसे लालच आ गया। इसीलिए उसने पहले पत्थर फिर कुल्हाड़ी और आरी से गोपाल को मारा।
चौकी प्रभारी सतीश कापड़ी ने बताया कि पूछताछ में मनोज ने गोपाल की जेब से दो हजार रुपए निकालने की बात भी कुबूली है। इधर, मनोज के इकबाल-ए-जुर्म के बावजूद परिजनों को आशंका है कि हत्याकांड में उसके साथ और लोग भी शामिल हो सकते हैं।
मृतक के बड़े भाई प्रताप बिष्ट की ओर से तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने धारा-302 में मुकदमा दर्ज किया है। मनोज के घर से कुल्हाड़ी और आरी भी बरामद की गई है। बता दें गोपाल और मनोज गांव में मजदूरी करते थे।
अपने हाथ में बनाए आठ से ज्यादा जख्म
मनोज के सिरफिरेपन का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गोपाल की हत्या के कई दिन बीतने के बाद शुक्रवार रात उसने खुद भी आत्महत्या का प्रयास किया।
पुलिस के डर से उसने शुक्रवार को अपने हाथ की नस काट ली, लेकिन बच गया। हाथ में उसे आठ से ज्यादा घाव किए हैं।
पुलिस ने हल्के में लिया
मृतक गोपाल की गुमशुदगी को स्थानीय पुलिस ने बेहद हल्केपन से लिया। यदि परिजन और ग्रामीण मनोज से सख्ती से पूछताछ नहीं करते तो शायद मामला कुछ दिनों तक और दबा रहता।
फिलहाल परिजनों की सक्रियता का श्रेय पुलिस ने पुलिस अपने खाते में जोड़ लिया है। यह बात पुलिस को बता दी गई थी कि गोपाल को अंतिम बार मनोज के साथ देखा गया है, मगर मनोज से पुलिस ने कभी भी पूछताछ नहीं की।