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मासूम के खून से रंगे बेरहम पुलिस के हाथ

Wed, 23 Apr 2014 02:22 PM IST
अमर उजाला, रुड़की
अमर उजाला, रुड़की Updated Wed, 23 Apr 2014 02:22 PM IST
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baby death by police carelessness

डेढ़ साल के बीमार बच्चे को इलाज के लिए ले जा रहे पिता को पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया।

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पिता बच्चे के इलाज करवाने के लिए छोड़ने की गुहार लगाता रहा, लेकिन बेरहम खाकी का दिल नहीं पसीजा और उसे अपने साथ ले गई। कुछ देर बाद ही इलाज न मिलने के कारण बच्चे की मौत हो गई।

बाद में पुलिस ने उसे छोड़ दिया। पीड़ित पिता और ग्रामीणों ने पुलिस को मौत का जिम्मेदार ठहराते हुए बच्चे के शव के साथ सीओ मंगलौर आफिस का घेराव किया। सीओ ने प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं।

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पुलिस से लगाता रहा गुहार

baby death by police carelessness

हथियातल गांव निवासी रविंद्र एक भट्टे पर काम करता है। सोमवार शाम उसके डेढ़ साल के पुत्र की तबियत खराब हो गई।

रविंद्र अपने बच्चे को डाक्टर के पास ले जाने के लिए घर से निकला। इसी बीच घर के बाहर ही मंगलौर पुलिस ने उसे रोक लिया और पूछताछ के लिए कोतवाली चलने को कहा।

रविंद्र और उसकी पत्नी ने पुलिस को बच्चे की बीमारी का हवाला दिया। आरोप है कि पुलिस ने एक नहीं सुनी और उसे अपने साथ ले गई। उपचार नहीं मिलने से कुछ ही देर बाद मासूम की मौत हो गई।

मासूम की मौत की खबर मिलने के बाद पुलिस ने आनन-फानन में रविंद्र को छोड़ दिया। मंगलवार दोपहर को यह मामला तूल पकड़ा गया और काफी संख्या में ग्रामीण बच्चे का शव लेकर सीओ आफिस पहुंच गए।

पुलिस की बेरहमी से गई मासूम की जान

baby death by police carelessness

ग्रामीणों का कहना था कि पुलिस यदि समय रहते उसे उपचार के लिए जाने देती तो बच्चे की जान बच सकती थी। परिजनों ने पुलिस को पूछताछ में सहयोग करने का आश्वासन भी दिया था लेकिन पुलिस ने एक नहीं सुनी।

सीओ स्वतंत्र कुमार ने ग्रामीणों का समझा-बुझाकर शांत कराया। सीओ ने मामले की जांच करने का आश्वासन दिया है। घेराव करने वाले में अरविंद, पोपीन, सोनी, समुद्रा, कश्मीरा, रामवती, रविंद्र आदि मौजूद रहे।

काश! अपराधियों को पकड़ने में दिखाते इतनी जल्दबाजी
मंगलौर कोतवाली क्षेत्र के हथियातल गांव से एक प्रेमी युगल 15 अप्रैल को फरार हो गया था। युवक के परिजनों का आरोप था कि उनके बेटे की रविंद्र से जान पहचान है।

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बेकसूर लोगों को परेशान करती है पुलिस

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रविंद्र को प्रेमी युगल के बारे में जानकारी है, जबकि रविंद्र ने किसी तरह की जानकारी होने से पुलिस को इंकार किया था। परिजनों की सूचना के बाद पुलिस पूछताछ करने के इरादे से रविंद्र के घर पहुंची थी।

लेकिन पुलिस ने पूछताछ में ऐसी जल्दबाजी दिखाई कि रविंद्र को उपचार तक का समय नहीं दिया, जबकि परिजनों ने इलाज के बाद खुद ही पुलिस जांच में सहयोग का आश्वासन दिया था।

ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस अपराधियों को पकड़ने में तो दिलचस्पी नहीं दिखाती है और बेकसूर लोगों को परेशान करने में जल्दबाजी दिखाती है।

प्रेमी के परिजनों पर भी कार्रवाई हो

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ग्रामीणों का कहना था कि जिस समय पुलिस रविंद्र को ले जाने के लिए आई थी। पुलिस के साथ उस समय युवती को भगाकर ले जाने वाले युवक के परिजन भी थे।

उनके इशारे पर ही पुलिस ने यह सब किया। पीड़ित पक्ष ने पुलिस के अलावा युवक के परिजनों पर भी कार्रवाई करने की मांग की है।

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